
बिजनेस डेस्क। अगर आप इस दिवाली अपने लिए सोने की कोई ज्वेलरी बनवाने की सोच रहे हैं, तो आपको यह जानना जरूरी है कि ज्वेलर आपको जो ज्वेलरी दे रहा है वह असली है या बस सोने की प्लेटिंग है।
वैसे तो सोने की पहचान उसके हॉलमार्क से होती है, लेकिन और भी कई तरीके हैं जिनसे आप असली सोना आसानी से पहचान सकते हैं।
सोना पहचानने के तरीकों को जानने से पहले यह जानना जरूरी है।
हॉलमार्क और HUID कोड जांचें: सोने की असली पहचान उसके हॉलमार्क से होती है। भारत सरकार (BIS) के नियमानुसार सोने के आभूषणों पर तीन निशान होने चाहिए बीआईएस का लोगो, कैरेट में शुद्धता (जैसे 22K916 या 18K750) और 6 अंकों का अल्फान्यूमेरिक एचयूआईडी कोड। बस कोड देखकर यकीन न करें, आप BIS Care ऐप डाउनलोड करके इस एचयूआईडी कोड को दर्ज कर ज्वेलरी की पूरी डिटेल और उसकी असली शुद्धता मिनटों में चेक कर सकते हैं।
चुंबक टेस्ट: अगर आपके पास कोई मजबूत चुंबक है, तो उसे सोने के आभूषण के पास लाएं। अगर सोना चुंबक की तरफ खिंचता है या चिपकता है, तो समझ जाएं कि उसमें लोहे, निकेल या किसी अन्य धातु की मिलावट की गई है।
पानी से करें जांच: पानी से भी जांच कर सकते हैं। एक पारदर्शी बर्तन या ग्लास में पानी भरें और सोने के गहने को उसमें डालें। असली सोना भारी होने के कारण तुरंत बर्तन की तली में बैठ जाएगा। अगर आपकी ज्वेलरी तैरती है या देर से नीचे बैठती है, तो उसमें मिलावट हो सकती है।
सिरका टेस्ट: सोने के आभूषण पर सिरके यानी विनेगर की कुछ बूंदें डालें। अगर सोने का रंग बदल जाता है या वह काला या हरा पड़ने लगता है, तो वह नकली या कम कैरेट का हो सकता है। असली सोने पर सिरके का कोई रासायनिक असर नहीं होता है।
हल्की खरोंच से करें टेस्ट: असली सोने से कभी भी पसीने या धातु जैसी कोई गंध नहीं आती है। बिना पॉलिश वाली चीनी मिट्टी की प्लेट पर सोने को हल्का सा रगड़ने पर अगर सुनहरी रेखा बनती है तो सोना असली है, अगर काली या धूसर रेखा बनती है तो वह नकली है।
एक्सआरएफ (XRF) स्पेक्ट्रोमेट्री जांच: यह आधुनिक एक्स-रे तकनीक सोने की सतह और उसके अंदर मौजूद अन्य धातुओं का सटीक रासायनिक विश्लेषण करती है।
इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी: माइक्रोस्कोप के जरिए सोने के सूक्ष्म कणों की संरचना की जांच की जाती है, जिससे भारी धातुओं के बारीक पाउडर की मिलावट तुरंत पकड़ में आ जाती है।
मेल्टिंग टेस्ट (गलाने की प्रक्रिया): आभूषण बनाने के दौरान जब सोने को गलाया जाता है, तब मिलावटी पाउडर अलग हो जाता है और वास्तविक सोने की सही मात्रा का पता चल जाता है।
एसिड टेस्ट: पत्थर पर घिसकर नाइट्रिक एसिड लगाने का यह पारंपरिक तरीका सामान्य अशुद्धियों को पकड़ लेता है, हालांकि भारी धातुओं के नए पाउडर वाली मिलावट में यह जांच पूरी तरह कारगर साबित नहीं हो पा रही है।
कैरेटोमीटर या कैरेट मशीन: डिजिटल कैरेट मीटर के जरिए सोने की शुद्धता (कैरेट) का बुनियादी स्तर मापा जाता है।
अगर आप सोना खरीदने का मन बना चुके हैं, तो यहां प्रमुख शहरों के ताजा रेट्स चेक करते जाएं।