E-20 Petrol: कंपनियों के पोस्टर बता रहे फायदे, मैकेनिक बोले- इंजन और फ्यूल पंप के लिए खतरा
E20 Petrol Engine Damage: प्रचार और जमीनी सच्चाई के इस विरोधाभास के बीच शहर के वाहन चालक ठगा सा महसूस कर रहे हैं और रोजाना अपनी गाड़ियों के मेंटेनेंस ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 10 Aug 2026 12:41:26 PM (IST)Updated Date: Mon, 10 Aug 2026 12:47:19 PM (IST)
HighLights
- पेट्रोल पंपों पर प्रचार
- वाहनों में आ रही खराबी
- मैकेनिकों और चालकों की चिंता
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। शहर सहित अंचल के पेट्रोल पंपों पर कंपनियों ने ई-20 पेट्रोल के फायदे बताते हुए पोस्टर चिपकाए हैं, जिससे पेट्रोल लेने आ रहे वाहन चालकों को इसकी खासियत बताई जा सके, लेकिन इसके उलट जो खासियत पोस्टरों में बताई जा रही है, वो उसके उलट रहा है। शहर के वाहन चालकों और आटो मैकेनिकों के अनुसार, एथेनाल युक्त इस ईंधन से गाड़ियों के इंजन, फ्यूल इंजेक्टर, कार्बोरेटर और रबर पाइप तेजी से खराब हो रहे हैं।
वाहन मालिक हैं परेशान
अचानक पिकअप कम होने, माइलेज घटने और चलती गाड़ी के अचानक बंद होने जैसी समस्याओं से वाहन मालिक खासे परेशान हैं। एक तरफ जहां पेट्रोल पंपों पर पोस्टर लगाकर इसे इंजन की बेहतर परफार्मेंस और पर्यावरण-अनुकूल ईंधन के रूप में प्रचारित किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ मैकेनिकों की दुकानों पर खराब वाहनों का तांता लगा हुआ है। प्रचार और जमीनी सच्चाई के इस विरोधाभास के बीच शहर के वाहन चालक ठगा सा महसूस कर रहे हैं और रोजाना अपनी गाड़ियों के मेंटेनेंस पर हजारों रुपये खर्च करने को मजबूर हैं।
वाहन मालिकों में आक्रोश और असमंजस
सिटी सेंटर निवासी अवनीश गुप्ता का कहना है कि पेट्रोल पंप पर तो बोर्ड लगा है कि ई-20 से माइलेज अच्छा मिलेगा, लेकिन हकीकत में कार का माइलेज पांच से छह किमी प्रति लीटर तक घट गया है। वहीं, शर्मा फार्म हाउस निवासी दिनेश सिंह बताते हैं कि उनकी चार साल पुरानी बाइक का फ्यूल पाइप एथेनाल की वजह से गल गया, जिससे लीकेज होने लगा और बड़ा हादसा होते-होते बचा।
मैकेनिकों की जुबानी: क्या आ रही हैं समस्याएं
शहर के प्रमुख ऑटोमोबाइल हब जैसे शिंदे की छावनी, नाका चंद्रवदनी के गैरेज में इन दिनों रोजाना दर्जनों ऐसी गाड़ियां पहुंच रही हैं, जिनका फ्यूल सिस्टम एथेनाल की वजह से डैमेज हो चुका है। छप्परवाले पुल के वर्कशाप चलाने वाले मैकेनिक हरीश जाटव का कहना है कि पिछले कुछ महीनों से कार्बोरेटर और फ्यूल इंजेक्टर ब्लाक होने की शिकायतें 40 से 50 फीसदी बढ़ गई हैं।
एथेनाल में नमी सोखने का गुण होता है, जिससे पेट्रोल टैंक के अंदर पानी जमा होने लगता है और रबर पाइप गलकर कट जाते हैं। पुरानी गाड़ियों के लिए ई-20 पेट्रोल बिल्कुल भी सही नहीं है।
कार मैकेनिक सलीम का कहना है कि कारों में सबसे ज्यादा समस्या फ्यूल पंप और इंजेक्टर खराब होने की आ रही है। एथेनाल-ब्लेंडेड ईंधन के कारण कार्ब्युरेटर और फ्यूल लाइनों में जंग लग रही है, जिसके चलते गाड़ी बार-बार मिसिंग मारती है और पिकअप पूरी तरह खत्म हो जाता है। एक बार फ्यूल पंप बदलने में ग्राहक को 8000 से 15000 तक का फटका लग रहा है।
पेट्रोल पंपों पर लगाए पोस्टर में यह बताया गया है
- इंजन को कोई नुकसान नहीं होता।
- बीमा क्लेम पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता।
- ई-10 ईंधन की तुलना में बेहतर एक्सलेरेशन और अधिक स्मूद ड्राइविंग का अनुभव
- कार्बन उत्सर्जन में 30% की कमी
- उच्च आक्टेन के कारण ई-20 आधुनिक हाई कंपेशन इंजनों के लिए अधिक उपयुक्त।
- रिसर्च आक्टेन 95 तक होने से नाकिंग कम होती है और इंजन का प्रदर्शन बेहतर होता है।