त्योहारों से पहले महंगाई का झटका: 55 रुपये प्रति किलो पहुंची शक्कर, एथेनाल ब्लेंडिंग और FRP वृद्धि से महंगी होगी मिठाई
करीब तीन महीने पहले यही शक्कर 42 से 43 रुपये प्रति किलो की दर पर बिक रही थी।
Publish Date: Thu, 13 Aug 2026 01:57:57 PM (IST)Updated Date: Thu, 13 Aug 2026 01:58:32 PM (IST)
HighLights
- महज 15 दिनों में शक्कर के दामों में भारी उछाल
- एथेनाल उत्पादन और गन्ने के FRP में बढ़ोतरी मुख्य वजह
- आम जनता का बजट बिगड़ा, मिठाइयों के बढ़ेंगे दाम
नईदुनिया प्रतिनिधि, ग्वालियर। आगामी रक्षाबंधन और दीपावली जैसे प्रमुख त्योहारों से ठीक पहले आम जनता और मिष्ठान कारोबारियों को बड़ा झटका लगा है। बाजार में शक्कर के दामों में आई अप्रत्याशित तेजी के कारण इस बार त्योहारों पर मिठाइयों की मिठास महंगी होने जा रही है।
महज 15 से 20 दिन पहले जो शक्कर फुटकर बाजार में 48 से 49 रुपये प्रति किलो मिल रही थी, उसके भाव अब छलांग लगाकर 55 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। वहीं, थोक बाजार में भी शक्कर के दाम 52 रुपये प्रति किलो के स्तर को छू रहे हैं। गौरतलब है कि करीब तीन महीने पहले यही शक्कर 42 से 43 रुपये प्रति किलो की दर पर बिक रही थी।
एथेनाल निर्माण और गन्ने की एमएसपी में बढ़ोतरी बनी मुख्य वजह
- शक्कर के दामों में अचानक आई इस तेजी के पीछे केंद्र सरकार की एथेनाल ब्लेंडिंग नीति और गन्ने के मूल्य में वृद्धि को मुख्य कारण माना जा रहा है। सरकार द्वारा पेट्रोल में एथेनाल मिश्रण (ई-20) के लक्ष्य को पूरा करने के लिए चीनी मिलों को गन्ने के रस और सीरे से सीधे एथेनाल बनाने के लिए प्रोत्साहित किया गया है। इसके चलते चीनी मिलों ने शक्कर के उत्पादन की तुलना में एथेनाल उत्पादन पर अधिक ध्यान केंद्रित किया, जिससे देश के चीनी स्टाक और आपूर्ति शृंखला में कमी आई है।
- गन्ने के फेयर एंड रेमुनरेटिव प्राइस में वृद्धि: केंद्र सरकार द्वारा गन्ने के लाभकारी मूल्य में की गई बढ़ोतरी के कारण चीनी मिलों की उत्पादन लागत बढ़ गई है। मिल मालिकों ने इस लागत का बोझ सीधे बाजार और उपभोक्ताओं पर डाल दिया है।
आम उपभोक्ता से लेकर मिष्ठान कारोबारियों पर असर
त्योहारी सीजन की शुरुआत में शक्कर की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी से आम गृहणियों का बजट तो बिगड़ा ही है, साथ ही शहर के पारंपरिक मिष्ठान व्यवसाय पर भी इसका गहरा असर पड़ रहा है। मावा, छेना और अन्य पारंपरिक मिठाइयों के निर्माण में शक्कर मुख्य कच्चा माल है। व्यापारियों का कहना है कि शक्कर, दूध और अन्य सामग्रियों के महंगे होने से उन्हें मिठाइयों के दाम बढ़ाने पर मजबूर होना पड़ेगा।
स्थानीय थोक शक्कर व्यापारियों के अनुसार, यदि आगामी दिनों में मिलों से बाजार में अतिरिक्त कोटा जारी नहीं किया गया या सरकार ने कीमतों को नियंत्रित करने के लिए कड़े कदम नहीं उठाए, तो त्योहारों के चरम पर शक्कर के दाम और ऊपर जा सकते हैं।
थोक बाजार में ही शक्कर 52 रुपये प्रति किलो है और खेरीज में 55 रुपये प्रति किलो बिक रही है। शक्कर में तेजी इसलिए आई है क्योंकि पहले तो उत्पादन कम हुआ था। दूसरे अब शक्कर फैक्ट्रियों में शहर कम और एथेनाल अधिक बनाया जा रहा है। साथ ही गन्ने की एमएसपी भी बढ़ गई है। देानों वजहों से शक्कर में तेजी बनी हुई है। - मनीष गर्ग, थोक शक्कर व्यापारी, दाल बाजार