
बिजनेस डेस्क। हर साल 1 मई का दिन दुनिया भर के करोड़ों मजदूरों के पसीने और उनकी मेहनत को समर्पित होता है। इसे 'लेबर डे' या 'अंतरराष्ट्रीय श्रमिक दिवस' कहा जाता है। इस दिन का इतिहास 1886 के अमेरिका से जुड़ा है, जहां काम के घंटे 8 घंटे तय करने की मांग को लेकर हुए आंदोलन ने वैश्विक स्तर पर कामकाजी वर्ग की दशा बदल दी।
आज भारत में भी श्रमिकों के अधिकारों को लेकर बड़े बदलाव हो रहे हैं। आजादी के बाद से हुए तमाम सुधारों में सबसे महत्वपूर्ण कदम केंद्र सरकार द्वारा '4 नए लेबर कोड' को प्रभावी बनाना है।
हाल ही में नोएडा में हुए श्रमिक आंदोलनों के बाद सरकार ने न्यूनतम मजदूरी में करीब 21% की वृद्धि की है। 1 अप्रैल 2026 से लागू नई दरों के अनुसार स्थिति इस प्रकार है...
भारत में औसत मासिक वेतन के मामले में राज्यों के बीच बड़ी असमानता है...
सबसे ज्यादा वेतन: मिजोरम शीर्ष पर है (₹37,169), इसके बाद नागालैंड, गोवा, महाराष्ट्र, तेलंगाना और हरियाणा जैसे राज्य आते हैं।
सबसे कम वेतन: उत्तर प्रदेश, त्रिपुरा, छत्तीसगढ़, पश्चिम बंगाल और पंजाब में मजदूरों का औसत वेतन ₹16,467 से ₹18,426 के बीच है।
भारत सरकार द्वारा पेश किए गए नए लेबर कोड श्रमिकों को कानूनी रूप से अधिक सशक्त बनाते हैं। अब हर कर्मचारी को लिखित अपॉइंटमेंट लेटर देना होगा, जिससे नौकरी की सुरक्षा बढ़ेगी। पेंशन, बीमा और ईएसआईसी (ESIC) के लाभ अब केवल नियमित ही नहीं, बल्कि गिग और प्लेटफॉर्म वर्कर्स (डिलीवरी बॉय आदि) को भी मिलेंगे। नियोक्ताओं के लिए समय पर वेतन देना अनिवार्य है, जिससे श्रमिकों की आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित होगी। 40 वर्ष से अधिक उम्र के कर्मचारियों के लिए हर साल निशुल्क हेल्थ चेकअप कराना कंपनी की जिम्मेदारी होगी। महिलाओं को सुरक्षा के साथ नाइट शिफ्ट में काम करने की अनुमति दी गई है, ताकि वे उच्च आय वाली नौकरियों में समान अवसर पा सकें।
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