नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच हुए युद्ध का असर छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले पर भी पड़ रहा है। यहां से करीब 400 टन तिलापिया मछली अमेरिका और गल्फ देशों में निर्यात होती थी। 40 से 50 करोड़ रुपये का व्यवसाय हो जाता था, लेकिन जब से मीडिल ईस्ट में लड़ाई शुरू हुई तिलापिया मछली का निर्यात प्रभावित हो गया।
अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की शांति वार्ता चल रही है, लेकिन आज भी तिलापिया मछली का निर्यात अमेरिका और गल्फ देशों में नहीं हो पा रहा है।
धमतरी और दुधावा बांध में बड़ी मात्रा में तिलापिया का उत्पादन होता है
धमतरी और दुधावा बांध में बड़ी मात्रा में तिलापिया मछली का उत्पादन होता है, लेकिन लड़ाई के चलते वर्तमान में इस मछली का निर्यात प्रभावित है। ऐसे में मछली उत्पादक व इस कारोबार से जुड़े लोगों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।
जिले में करीब 100 से अधिक लोग इस मछली के कारोबार से जुड़े हुए हैं। जिले के धमतरी, कुरूद, मगरलोड और नगरी ब्लॉक के गांवों समेत अन्य जगहों पर मछली का उत्पादन होता है। यहां बड़ी मात्रा में तिलापिया मछली का उत्पादन भी किया जाता है।
इस मछली की मांग बाजार में अधिक रहती है
नगरी ब्लॉक में मछली का एक बड़ा व्यवसाय भी है, जिसका कारोबार अमेरिका व कई गल्फ देशों तक है। जिला मुख्यालय धमतरी से 70 किलोमीटर दूर दुधावा बांध में करीब 300 कैज कल्चर से तिलापिया मछली का उत्पादन किया जाता है। इस मछली का उत्पादन कम समय और कम लागत में होता है। इसलिए इस मछली की मांग बाजार में अधिक रहती है।
जिले में मछली पालन से जुड़े कुछ बड़े कारोबारियों का तिलापिया मछली अमेरिका व गल्फ देशों तक निर्यात होता है, लेकिन इन दिनों विदेश तक मछली निर्यात करने का काम प्रभावित है।
अमेरिका में बिकता है 160 से 170 रुपये किलो
नगरी-सिहावा क्षेत्र के बड़े मछली कारोबारी इरशाद खान एमआइके फिश के नाम से मछली पालन और एक्सपोर्ट का व्यवसाय करते हैं। उन्होंने बताया कि पिछले सात-आठ वर्षों से इस व्यवसाय से जुड़े हैं और उनका परिवार तो पिछले 25 सालों से यह कार्य कर रहा है। प्रमुख रूप से वे तिलापिया मछली का पालन करते हैं, क्योंकि इसकी मांग अमेरिका और गल्फ देशों में ज्यादा है।
मछली कारोबारी इरशाद ने बताया कि जिले से हर महीने 300 से 350 टन तिलापिया मछली अमेरिका और गल्फ देशों में निर्यात की जाती थी। वहां इस मछली के दाम प्रति किलो 160 से 170 रुपये है। मजबूरी में उन्हें तिलापिया मछली को छत्तीसगढ़ और ओडिशा की स्थानीय बाजारों में 110 से 120 रुपये प्रति किलो में बेचना पड़ा रहा है।
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जिले में सौ से ज्यादा मछली पालक
उल्लेखनीय है कि जिले में तिलापिया मछली का उत्पाउन 100 से ज्यादा किसान करते हैं, लेकिन लड़ाई के चलते तिलापिया मछली का निर्यात प्रभावित है। इससे उत्पादक किसानों को भी नुकसान उठाना पड़ रहा है। बताया जाता है कि एक किसान के साथ औसतन 15-20 लोगों को रोजगार मिलता है। इन लोगों पर सैकड़ों परिवार के सदस्य निर्भर है।
केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत ये लोग मछली पालन का कारोबार करते हैं। जो अब संकट में नजर आ रहा है। व्यापारियों और किसानों की मांग है कि सरकार जल्द निर्यात की वैकल्पिक व्यवस्था करें, ताकि उन्हें राहत मिल सके।
मछली उत्पादन के लिए धमतरी की अलग पहचान है। यहां से मछलियों का निर्यात भी होता है। इन दिनों युद्ध की स्थिति के कारण मछलियों का निर्यात नहीं हो पा रहा है। ऐसे में स्थानीय स्तर पर मछलियों को उचित कीमत नहीं मिल पा रही है। यह स्थिति अस्थायी है और जल्द ही बाजार फिर से खुलेंगे।
-अबिनाश मिश्रा, कलेक्टर धमतरी