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    छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी... अंबिकापुर-गढ़वा रेल लाइन को मिली हरी झंडी, सीधे जुड़ेंगे तीन राज्य

    भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने अंबिकापुर-गढ़वा रोड नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर दिया है।

    By Asim Sen GuptaEdited By: Dheeraj Belwal
    Publish Date: Fri, 19 Jun 2026 05:50:44 PM (IST)Updated Date: Fri, 19 Jun 2026 05:50:44 PM (IST)
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    छत्तीसगढ़ के रेल यात्रियों के लिए खुशखबरी... अंबिकापुर-गढ़वा रेल लाइन को मिली हरी झंडी, सीधे जुड़ेंगे तीन राज्य
    कोयला परिवहन के साथ आम यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत।

    HighLights

    1. अंबिकापुर-गढ़वा रोड नई रेल लाइन विशेष परियोजना घोषित
    2. ओडिसा, छत्तीसगढ़ और झारखंड को जोड़ेगा नया रेल नेटवर्क
    3. कोयला परिवहन के साथ आम यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

    नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। वर्षों से अंबिकापुर से रेल लाइन विस्तार की उठ रही मांग अब हकीकत के करीब पहुंच गई है। भारत सरकार के रेल मंत्रालय ने अंबिकापुर-गढ़वा रोड नई रेल लाइन परियोजना को विशेष रेल परियोजना के रूप में भारत के राजपत्र में अधिसूचित कर दिया है। कुल 261.838 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में रामानुजगंज से बरवाडीह लिंक को भी शामिल किया गया है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही सरगुजा-बलरामपुर से झारखंड तक रेल कनेक्टिविटी की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

    परियोजना का मार्ग और आर्थिक महत्व

    नई प्रस्तावित रेल लाइन में अंबिकापुर को मिलाकर कुल 21 स्टेशन होंगे। अंबिकापुर शहर के मणिपुर में जंक्शन प्रस्तावित है। संभव है कि पत्थलगांव की ओर से आने वाली सरडेगा-पत्थलगांव-अंबिकापुर रेल लाइन भी यहीं आकर मिलेगी। वर्षों से लोग अंबिकापुर से रेल लाइन विस्तार की मांग कर रहे हैं। केंद्र सरकार की इस पहल के बाद यह मांग पूरी होने की संभावना बढ़ गई है।


    इस क्षेत्र से कोयला परिवहन को ज्यादा सुविधाजनक माना गया है। यही कारण है कि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और झारखंड को कम दूरी वाली रेल कनेक्टिविटी से जोड़ने की पहल शुरू की गई है। यह काम हो जाने से छत्तीसगढ़ के अलावा पड़ोसी प्रांत ओडिशा और झारखंड से भी आवागमन सुलभ हो जाएगा। ओडिशा से नई रेल लाइन छत्तीसगढ़ में लाने का भी प्रस्ताव है। यह लाइन पत्थलगांव में आकर मिलेगी। पत्थलगांव से जशपुर होकर झारखंड के लोहरदग्गा तक भी रेल लाइन विस्तार प्रस्तावित है।

    यहां प्रस्तावित हैं रेलवे स्टेशन

    अंबिकापुर से रेल लाइन मणिपुर जंक्शन में पहुंचेगी। यहां से रेल लाइन परसा, कंचनपुर, बघिमा, राजपुर, कर्रा, पस्ता, गोविंदपुर, लूरगी, झलरिया, मिगनी पहाड़, दलधोवा, सरनाडीह, बलरामपुर, तातापानी होते हुए रामानुजगंज पहुंचेगी। रामानुजगंज भी जंक्शन के रूप में विकसित होगा।

    यहाँ से लाइन दो हिस्सों में बंटेगी। रामानुजगंज से एक लाइन विश्रामपुर, रंका, अचला होते हुए गढ़वा तक जाएगी। गढ़वा से गढ़वा रोड वर्षों से रेल लाइन से जुड़ा है। गढ़वा रोड से कोलकाता, दिल्ली समेत देश के अलग-अलग रूट के लिए ट्रेनें गुजरती हैं। दूसरी लाइन रामानुजगंज से तेवली, बिंदा, अरार, नवाडीह होते हुए बरवाडीह को जोड़ेगी। गढ़वा रोड और बरवाडीह एक ही मुख्य लाइन पर स्थित हैं। ऐसे में अंबिकापुर सीधे दिल्ली-हावड़ा ग्रैंड कॉर्ड से जुड़ जाएगा।

    राजपत्र के बाद अब आगे क्या?

    • भूमि अधिग्रहण: रेल लाइन के लिए आवश्यक भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। प्रभावित किसानों और हितधारकों को मुआवजा दिया जाएगा।
    • विस्तृत सर्वे और डिज़ाइन: अलाइनमेंट की फाइनल जांच, मिट्टी परीक्षण, ब्रिज, स्टेशन, पुल-पुलियों आदि का विस्तृत डिजाइन तैयार किया जाएगा।
    • बजट स्वीकृति: परियोजना की कुल लागत का अंतिम अनुमान तैयार कर केंद्र सरकार से बजट की स्वीकृति ली जाएगी।
    • निविदा प्रक्रिया: निर्माण कार्य के लिए निविदाएं निकाली जाएंगी और योग्य एजेंसी का चयन होगा। ठेके की सभी शर्तों को अंतिम रूप दिया जाएगा।
    • निर्माण कार्य: सारी प्रक्रिया पूरी होने के बाद रेल लाइन, स्टेशन, पुल, प्लेटफॉर्म, यात्री सुविधाएं आदि का निर्माण कार्य शुरू होगा।

    दो अभयारण्य बन सकते हैं बड़ी बाधा

    परियोजना भले ही अधिसूचित हो गई हो, लेकिन जमीनी काम शुरू होने में विलंब तय है। इसकी सबसे बड़ी वजह फॉरेस्ट क्लीयरेंस है। रामानुजगंज से बरवाडीह के लिए प्रस्तावित लाइन पलामू टाइगर रिजर्व के क्षेत्र से होकर गुजरेगी। इधर अंबिकापुर से रामानुजगंज तक प्रस्तावित लाइन का बड़ा हिस्सा सेमरसोत अभयारण्य से होकर गुजरेगा।

    यह भी पढ़ें- छत्तीसगढ़ के 29 लाख बच्चों के लिए गुड न्यूज, पहली से आठवीं तक 'सेंट्रल किचन' से मिलेगा पौष्टिक भोजन

    दोनों ही संरक्षित वन क्षेत्र हैं। पर्यावरण मंत्रालय और राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड से अनुमति लेना बेहद जटिल और लंबी प्रक्रिया है। जानकारों का मानना है कि फॉरेस्ट और वाइल्ड लाइफ क्लीयरेंस में ही कई साल लग सकते हैं। इसके बाद ही भूमि अधिग्रहण और निर्माण कार्य शुरू हो पाएगा।