छत्तीसगढ़ की जेलों में गूंज रही ''जय माता दी'' की अनुगूंज, 2,397 बंदियों ने रखा है उपवास, पवित्र रमजान माह में 130 बंदियों ने रखा रोजा
छत्तीसगढ़ की जेलों में इस बार नवरात्र का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर बनकर सामने आया है। ...और पढ़ें
Publish Date: Mon, 23 Mar 2026 09:45:19 AM (IST)Updated Date: Mon, 23 Mar 2026 10:37:54 AM (IST)
HighLights
- जेल प्रशासन द्वारा विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं
- 2125 पुरुष और 272 महिला बंदी ने रखा है उपवास
- इन बंदियों द्वारा विधिवत कलश स्थापना की गई है
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर : छत्तीसगढ़ की जेलों में इस बार नवरात्र का पर्व केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक जागरण का विशेष अवसर बनकर सामने आया है। प्रदेश की विभिन्न जेलों में परिरुद्ध बंदियों के लिए जेल प्रशासन द्वारा विशेष सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे वे भक्ति और साधना के माध्यम से अपने जीवन में सकारात्मक परिवर्तन ला सकें।
कुल 2397 बंदी नवरात्र का उपवास कर रहे हैं
प्रदेश की जेलों में कुल 2397 बंदी नवरात्र का उपवास कर रहे हैं, जिनमें 2125 पुरुष और 272 महिला बंदी शामिल हैं। यह आंकड़ा इस बात का प्रमाण है कि कठिन परिस्थितियों में भी आस्था और अध्यात्म का दीपक बुझता नहीं, बल्कि और अधिक प्रज्वलित होता है।
सरगुजा संभाग की बात करें तो यहां की जेलों में कुल 361 बंदी (336 पुरुष और 25 महिला) नवरात्र का व्रत रख रहे हैं। केंद्रीय जेल अंबिकापुर सहित जिला जेल जशपुर, सूरजपुर, मनेंद्रगढ़, बैकुंठपुर और रामानुजगंज में भी बंदियों द्वारा पूरी श्रद्धा और नियमपूर्वक उपवास रखा जा रहा है।
बंदियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं
महानिदेशक जेल हिमांशु गुप्ता के मार्गदर्शन में जेल प्रशासन द्वारा बंदियों के लिए विशेष व्यवस्थाएं सुनिश्चित की गई हैं। विशेष रूप से व्रत रखने वाले बंदियों के लिए फल, दूध और अन्य उपवास योग्य खाद्य सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है, जिससे वे अपनी आस्था का पालन सहज रूप से कर सकें।
बंदियों द्वारा विधिवत कलश स्थापना की गई है
केंद्रीय जेल अंबिकापुर में जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत के नेतृत्व में अधिकारी और कर्मचारी बंदियों के इस आध्यात्मिक प्रयास में सहयोग कर रहे हैं। यहां बंदियों द्वारा विधिवत कलश स्थापना की गई है और प्रतिदिन सुबह-शाम पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है।
पूरे वातावरण में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार देखने को मिल रहा है। नवरात्र के इस पावन अवसर पर बंदियों के भीतर जागृत हो रही आध्यात्मिक चेतना उन्हें एक नई दिशा देने का कार्य कर रही है।
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रमजान के पवित्र महीने में लगभग 130 बंदियों ने रोजा रखा
जेल अधिकारियों का मानना है कि जेलों में मनाया जा रहा नवरात्र केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक ऐसी प्रेरणादायक कहानी बन गया है, जहां बंदियों के जीवन में आस्था और सुधार की रोशनी जगमगा रही है। यहां सिर्फ नवरात्र में ही ऐसा वतावरण नहीं बना है।
रमजान के पवित्र महीने में लगभग 130 बंदियों ने रोजा रखा था। उस दौरान रोजेदारों के लिए भी जेल प्रबंधन द्वारा विशेष व्यवस्था की गई थी। इफ्तार और सेहरी के समय बंदियों के लिए विशेष प्रबंध किए गए थे।