नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। कर्तव्य निर्वहन में लापरवाही के आरोप पर केंद्रीय जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने जेल प्रहरी जयप्रकाश कुजुर और लोकनाथ निषाद को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन दोनों की ड्यूटी मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड में थी।
यहां एक बंदी को जेल प्रहरियों की सांठगांठ से सारी सुविधाएं मिलने की शिकायत पर जेल अधीक्षक ने स्वयं जेल वार्ड का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान जेल वार्ड के बाहर का ताला खुला पाया गया। बंदियों से मुलाकात के नियमों का खुला उल्लंघन पाए जाने पर जेल अधीक्षक ने तत्काल निलंबन का आदेश जारी कर विभागीय जांच के आदेश जारी कर दिए हैं।
जांच के बाद चिकित्सक ने उसे भर्ती कर दिया
जानकारी के अनुसार मनेंद्रगढ़ जेल से एक बंदी को केंद्रीय जेल अंबिकापुर में शिफ्ट किया गया है। यहां उसने अपने आप को बीमार बताया। जेल के चिकित्सक की सलाह पर उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले जाया गया। यहां जांच के बाद चिकित्सक ने उसे भर्ती कर दिया।
मरीज को अटेंडर की आवश्यकता भी बता दी गई। इस कारण जेल प्रबंधन को मजबूरी में इसके लिए अनुमति देनी पड़ी। आरोप है कि यह सारी व्यवस्था पहुंच और प्रभाव के कारण संभव हो सकी। रसूखदार बंदी को मिली अटेंडर की सुविधा का लाभ अनुचित तरीके से उठाया जाने लगा।
स्वजन और परिचित बंदी के साथ उठना-बैठना शुरू करने लगे
मनपसंद भोजन, मिनरल वाटर, मोबाइल के साथ वह सारी सुविधाएं मिलने लगी जो सामान्य व्यक्ति को शायद घर पर भी नहीं मिल पाती। मनमाना तरीके से स्वजन और परिचित भी बंदी के साथ उठना-बैठना शुरू करने लगे। जेल नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जाती रही। इस कार्य में जेल प्रहरियों ने भी भरपूर मदद की।
औचक निरीक्षण पर जेल वार्ड पहुंच गए
बीमारी के नाम पर मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड में भर्ती बंदी को विशेष सुविधाएं मिलने की शिकायत को केंद्रीय जेल अधीक्षक अक्षय सिंह राजपूत ने गंभीरता से लिया। शनिवार शाम चार बजे वे स्वयं औचक निरीक्षण पर जेल वार्ड पहुंच गए। यहां की स्थिति देख कर उन्होंने गहरी नाराजगी जताई।
बाहर से ताला लगाया ही नहीं गया था
नियमों के तहत जेल वार्ड के दरवाजे पर दो ताले लगे होने चाहिए। एक ताला भीतर से लगता है तथा एक ताला बाहर से लगाया जाता है। बाहर से ताला लगाया ही नहीं गया था। यह घोर लापरवाही है क्योंकि भीतर ताले की चाबी मिलते ही बंदी फरार भी हो सकते हैं।
मुलाकात के नियम का भी उल्लंघन पाया गया
यहां बंदी से मुलाकात के नियम का भी उल्लंघन पाया गया। वहां की स्थिति देखकर जेल अधीक्षक ने गहरी नाराजगी जताई तथा तत्काल प्रभाव से ड्यूटी पर तैनात प्रहरी जयप्रकाश कुजूर तथा लोकनाथ निषाद को निलंबित कर दिया। उन्होंने बंदी को मिली अटेंडर की सुविधा को भी निरस्त कर दिया है। पूरे प्रकरण की विभागीय जांच के आदेश भी दिए गए हैं।
लंबे समय से चल रहा खेल
पहुंच और प्रभाव के दम पर बीमारी के नाम पर रसूखदार बंदियों द्वारा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में शिफ्ट होकर सुविधाओं का लाभ उठाने की शिकायत पुरानी है। इसके पीछे असप्ताल में पदस्थ कुछ चिकित्सकों की भूमिका को भी संदिग्ध माना जाता है।
इनके द्वारा कई बार आवश्यकता नहीं होने के बाद भी बंदियों को मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड में भर्ती कर दिया जाता है।
..तब ऐसे बंदियों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है
यह व्यवस्था हो जाने पर बंदियों द्वारा जेल प्रहरियों से सांठगांठ कर स्वजन और परिचितों से न सिर्फ मुलाकात की जाती है बल्कि मनपसंद भोजन,मोबाइल जैसी सुविधाओं का भी लाभ उठाया जाता है।
सबसे मजेदार बात है कि जब भी जेल मैन्युल के उल्लंघन की शिकायत सामने आती है तब ऐसे बंदियों को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया जाता है।
यह भी पढ़ें- कैदी या 'VIP' मेहमान? चेक बाउंस के दोषी को अस्पताल में मिला प्राइवेट रूम, मोबाइल चलाते वीडियो वायरल
मेडिकल कॉलेज अस्पताल के जेल वार्ड का मैंने औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान कमियां पाई गईं। जेल वार्ड के मुख्य दरवाजे का बाहर का ताला खुला पाया गया। भीतर की ओर से ताला लगा था। जेल नियमावली के पालन में लापरवाही के आरोप पर प्रहरी लोकनाथ निषाद तथा जय प्रकाश कुजूर को निलंबित किया गया है। बंदी को अटेंडर की सुविधा की अनुमति को निरस्त किया गया है। चिकित्सक से परामर्श के आधार पर बंदी को अटेंडर की सुविधा को लेकर आगे निर्णय लिया जाएगा।
-अक्षय सिंह राजपूत जेल अधीक्षक,केंद्रीय जेल अंबिकापुर