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पंकज बेक कस्टोडियल डेथ केस: 13 लाख की चोरी, नौ फीट ऊंचे कूलर पर फांसी... कोर्ट ने पुलिस पर उठाए सवाल, नए सिरे से जांच के आदेश

अंबिकापुर के चर्चित पंकज बेक कस्टोडियल डेथ मामले में कोर्ट ने नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं और जरूरत पड़ने पर मामला CBI को सौंपने की बात कही है।

By Asim Sen GuptaEdited By: Akash Sharma
Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 02:02:10 PM (IST)Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 02:02:10 PM (IST)
पंकज बेक कस्टोडियल डेथ केस: 13 लाख की चोरी, नौ फीट ऊंचे कूलर पर फांसी... कोर्ट ने पुलिस पर उठाए सवाल, नए सिरे से जांच के आदेश
अंबिकापुर के पंकज बेक मौत मामले में अदालत सख्त, संदेहास्पद तथ्यों पर दोबारा जांच शुरू

HighLights

  1. पंकज बेक मौत मामले में पुनरीक्षण याचिका स्वीकार
  2. अदालत ने पुलिस कहानी को माना संदेहास्पद
  3. एसपी निगरानी में जांच नहीं तो सीबीआई जांच

नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर। बहुचर्चित पंकज बेक कस्टोडियल डेथ प्रकरण में सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश महेश कुमार राज की अदालत ने सुनवाई के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदुओं को संदेहास्पद माना है। अदालत ने इन्हीं तथ्यों के आधार पर पुनरीक्षण याचिका स्वीकार करते हुए मामले की नए सिरे से जांच के आदेश दिए हैं।

वरिष्ठ अधिवक्ता राजवर्धन सिंह ने पुलिस की कहानी, न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच और मृतक के स्वजन द्वारा लगाए गए आरोपों के आधार पर अदालत के सामने कई तथ्य रखे। सुनवाई के दौरान पुलिस की पूरी कार्रवाई पर सवाल खड़े हुए। अदालत ने कहा कि पंकज बेक की मृत्यु पुलिस कस्टडी में दम घुटने से हुई है, इसलिए मामले की गंभीर जांच जरूरी है। कोर्ट ने कहा कि यदि एसपी की निगरानी में गठित टीम निष्पक्ष जांच नहीं कर पाती है तो प्रकरण CBI को सौंपा जाए।


एक लाख की चोरी और 13 लाख की स्वीकारोक्ति पर सवाल

शिकायतकर्ता तनवीर सिंह ने 11 जुलाई 2019 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी कि 27 जून 2019 को घर से एक लाख रुपये चोरी हुए थे। लेकिन न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच में पुलिस अधिकारियों ने बयान दिया कि दोनों संदेहियों ने 13 लाख रुपये चोरी करना स्वीकार किया था। अदालत में सवाल उठाया गया कि जब प्राथमिकी एक लाख रुपये चोरी की थी तो 13 लाख रुपये चोरी की स्वीकारोक्ति कैसे हुई।

घटना के 15 दिन बाद दर्ज हुई एफआइआर

अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने में हुई देरी पर भी सवाल उठाए। घटना 27 जून 2019 की बताई गई, जबकि FIR 11 जुलाई 2019 को दर्ज हुई। कोर्ट ने पूछा कि अपराध होने के बाद तत्काल रिपोर्ट क्यों नहीं की गई और चोरी स्वीकार करने के बाद आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल क्यों नहीं भेजा गया।

आठ फीट दीवार और पांच फीट व्यक्ति को लेकर उठे सवाल

परमार अस्पताल की बाउंड्रीवॉल करीब आठ फीट ऊंची बताई गई। अदालत में कहा गया कि पांच फीट के व्यक्ति का इतनी ऊंची दीवार फांदना संभव नहीं लगता। जिन रास्तों से पंकज के भागने की बात कही गई, वहां कांच के टुकड़े और टूटी शीशियां मौजूद थीं, लेकिन पंकज के पैरों के निचले हिस्से में कोई कट नहीं मिला।

कूलर से फांसी की कहानी पर भी संदेह

अदालत में बताया गया कि कूलर की ऊंचाई जमीन से करीब नौ से 10 फीट थी। फांसी के लिए पाइप और कूलर के पतले चैन का उपयोग बताया गया। कोर्ट में सवाल उठाया गया कि यदि फांसी के दौरान छटपटाहट हुई होती तो कूलर या चैन टूट सकते थे, लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अदालत ने पूछा कि यदि ऊंचाई तक पहुंचना संभव था तो पेड़ का उपयोग क्यों नहीं किया गया।

रात एक बजे जानकारी और सुबह अस्पताल को पता चलने पर सवाल

पुलिस अधिकारियों ने बताया था कि रात करीब एक बजे पंकज के परमार अस्पताल में फांसी लगाने की जानकारी मिल गई थी। आरक्षक मनीष सिंह के दीवार फांदकर अंदर जाने की बात भी सामने आई थी। अस्पताल प्रबंधन के चिकित्सकों ने बताया कि 22 जुलाई की सुबह 6 से 6:30 बजे युवक को देखा गया। अदालत ने सवाल किया कि रात में जानकारी होने के बावजूद अस्पताल को सूचना क्यों नहीं दी गई।

CRPF जवान के बयान पर भी अदालत ने जताया संदेह

सीआरपीएफ जवान दीपक का बयान न्यायिक मजिस्ट्रेट की जांच में लिया गया था। उसने बताया था कि रात 11:45 बजे एक व्यक्ति को अंडरवियर में भागते देखा था। अदालत ने सवाल किया कि जब जवान की ड्यूटी रात 12 बजे से दो बजे तक थी तो 11:45 बजे उसने व्यक्ति को कैसे देखा। साथ ही घटना की जानकारी कमांडेंट को क्यों नहीं दी गई।

कांच के टुकड़ों और कीचड़ को लेकर भी उठे सवाल

घटनास्थल के आसपास कांच की बोतलों के टूटे टुकड़े पड़े थे, लेकिन पंकज के पैरों में चोट नहीं मिली। बरसात के समय होने के बावजूद मृतक के तलवों और उंगलियों के अंदर कीचड़ नहीं मिला। अदालत ने इन परिस्थितियों को भी जांच का विषय माना।

छह फीट पाइप से नौ फीट ऊंचाई तक पहुंचने पर सवाल

जांच रिपोर्ट में बताया गया था कि पंकज छह फीट की दीवार फांदकर अंदर गया और पानी के पाइप के सहारे ऊपर पहुंचा। अदालत ने पूछा कि क्या पांच फीट का व्यक्ति छह फीट के पाइप के सहारे नौ फीट ऊंचाई तक पहुंच सकता है? क्या पाइप इतना मजबूत था कि उस पर चढ़ा जा सके।

पैरों के निशानों की जांच नहीं होने पर सवाल

जांच में दीवार पर मृतक के पैरों के निशान बताए गए थे, लेकिन यह पुष्टि नहीं की गई कि ये वास्तव में पंकज के ही निशान थे। सीआरपीएफ कैंपस से मिले बताए गए पैर के निशान की भी स्पष्ट जांच नहीं हुई।

केस डायरी और सीसीटीवी फुटेज नहीं होने पर नाराजगी

अदालत ने प्रकरण से जुड़ी रोजनामचा, सानहा और केस डायरी अवलोकन के लिए मांगी थी, लेकिन पेश नहीं की गई। चोरी मामले से जुड़े स्पष्ट सीसीटीवी फुटेज भी प्रस्तुत नहीं किए गए। उप संचालक अभियोजन द्वारा दिए गए सुझावों पर भी जांच नहीं होने की बात सामने आई।

क्या था पूरा मामला

तनवीर सिंह ने शिकायत की थी कि CCTV लगाने आए पंकज बेक और इमरान ने एक लाख रुपये चोरी किए हैं। इसके बाद पुलिस दोनों से पूछताछ करती रही। 22 जुलाई 2019 की सुबह पंकज बेक का शव परमार हॉस्पिटल में फांसी पर लटका मिला। पुलिस का दावा था कि 21 जुलाई की रात वह साइबर सेल से भागकर फांसी लगा ली।

परिजनों ने हत्या कर शव लटकाने का आरोप लगाया था। तत्कालीन थाना प्रभारी विनीत दुबे, उप निरीक्षक प्रियेश जान, मनीष यादव, आरक्षक दीनदयाल सिंह और लक्ष्मण सिंह पर एफआइआर दर्ज हुई थी। पुलिस की क्लोजर रिपोर्ट के आधार पर 27 जुलाई 2023 को मामला खत्म कर दिया गया था। अब अदालत के आदेश के बाद मामले की नए सिरे से जांच होगी।