
नईदुनिया प्रतिनिधि, अंबिकापुर:अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के भव्य आयोजन को लेकर सरगुजा प्रशासन की तैयारियां अब सवालों के घेरे में आ गई हैं। पीजी कालेज मैदान में विशाल डोम और टेंट खड़े होने के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि आखिर निविदा प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही काम कैसे शुरू हो गया। प्रशासनिक दस्तावेजों की समय-सीमा और मैदान में चल रहे कार्यों को देखकर पूरे मामले में पारदर्शिता पर प्रश्नचिह्न लग रहे हैं।
21 जून को आयोजित होने वाले योग दिवस कार्यक्रम के लिए 16 जून को कलेक्टर कार्यालय से आदेश जारी किया गया। 17 जून को बजट स्वीकृति की प्रक्रिया पूरी हुई और उसी रात करीब 11 बजे कलेक्टर ने विभिन्न व्यवस्थाओं के लिए नोडल अधिकारियों की नियुक्ति की। लेकिन इससे पहले ही पीजी कालेज मैदान में डोम और टेंट लगाने का कार्य शुरू हो चुका था।
बताया जा रहा इस आयोजन पर करीब डेढ़ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि जब प्रशासनिक प्रक्रिया और जिम्मेदार अधिकारियों की नियुक्ति बाद में हुई, तो मैदान में काम शुरू करने की अनुमति किसने दी और किस आधार पर दी है।
अधिकारियों को भी नहीं थी जानकारी
चौंकाने वाली बात यह है कि कई विभागीय अधिकारियों को भी यह जानकारी नहीं थी कि पीजी कालेज मैदान में इतनी बड़ी संरचना तैयार की जा रही है। आयोजन से जुड़े कुछ अधिकारियों ने अनौपचारिक चर्चा में स्वीकार किया कि उन्हें बाद में व्यवस्थाओं की जानकारी मिली। इससे यह सवाल और गहरा हो गया है कि निर्णय प्रक्रिया में किस स्तर पर काम को हरी झंडी दी गई।
स्थानीय टेंट व्यवसायियों में नाराजगी
मामले को लेकर स्थानीय टेंट व्यवसायियों में भी नाराजगी है। उनका आरोप है कि जिले में बड़े आयोजनों के लिए स्थानीय व्यवसायियों को अवसर देने के बजाय लगातार बाहरी एजेंसियों को सीधे काम सौंपा जा रहा है।
टेंट संचालकों का कहना है कि केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यक्रम और खेलो इंडिया प्रतियोगिता के दौरान भी स्थानीय व्यवसायियों को कोई सूचना नहीं दी गई थी। उनका आरोप है कि इस बार भी जिले के किसी टेंट संचालक को प्रक्रिया की जानकारी तक नहीं दी गई और बाहरी एजेंसी ने सीधे मैदान में काम शुरू कर दिया।
पूर्व कलेक्टर ने निरस्त कर दिया था कार्यक्रम
दूसरे जिले से भारी भरकम खर्च पर टेंट की व्यवस्था किए जाने के मामले में पूर्व कलेक्टर विलास भोसकर ने पूरे आयोजन को ही रद कर दिया था। उन्होंने साफ कहा था इतनी बड़ी राशि जिले में उपलब्ध नहीं है, इस कारण आयोजन सूरजपुर जिले चला गया था। पीजी कालेज मैदान में आयोजन और व्यवस्थाओं को लेकर पहले भी विवाद हो चुके हैं। अब तीसरी बार स्थानीय व्यवसायियों को दरकिनार किए जाने के आरोप लग रहे हैं।
विपक्ष को मिला मुद्दा, सिंहदेव ने कहा गलत है यह
योग दिवस जैसे राष्ट्रीय महत्व के आयोजन पर उठे इन सवालों ने विपक्ष को भी एक नया मुद्दा दे दिया है। विपक्षी दल पूरे मामले में निविदा प्रक्रिया, कार्य आवंटन और खर्च की जांच की मांग उठाने की तैयारी में हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री टीएस सिंहदेव ने कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही कार्य प्रारंभ हुआ है तो इसकी जवाबदेही तय की जानी चाहिए। एक और मेडिकल कालेज भवन के लिए टेंडर जारी नहीं होता दूसरी ओर बगैर टेंडर के योग दिवस पर टेंट लगाए जा रहे हैं। इसी से सरकार की कार्यप्रणाली को समझा जा सकता है।