शीर्ष माओवादियों के ढेर होने के बावजूद झुकने को तैयार नहीं था पापाराव, केवल बीजापुर में ही 48 केस और 41 स्थायी वारंट लंबित थे
बस्तर के घने जंगलों में दशकों तक सुरक्षा बलों के लिए ‘अदृश्य’ बना रहा माओवादी कमांडर पापाराव उर्फ सुन्नम चन्द्रैया अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है। ...और पढ़ें
Publish Date: Thu, 26 Mar 2026 02:55:37 PM (IST)Updated Date: Thu, 26 Mar 2026 03:02:37 PM (IST)
HighLights
- पामेड़-उसूर एरिया कमेटी से शुरू हुआ सफर
- पापाराव की टीम भी कम खतरनाक नहीं थी
- अब कैडर तीनों स्तर पर ढांचा बिखर गया है
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। बस्तर के घने जंगलों में दशकों तक सुरक्षा बलों के लिए ‘अदृश्य’ बना रहा माओवादी कमांडर पापाराव उर्फ सुन्नम चन्द्रैया अब इतिहास का हिस्सा बन चुका है। 1997 में संगठन से जुड़ा यह चेहरा धीरे-धीरे दंडकारण्य के सबसे प्रभावशाली सैन्य नेतृत्व में शामिल हुआ और अंततः डीकेएसजेडसी के साउथ सब जोनल ब्यूरो का इंचार्ज बना।
वइ इतना खतरनाक और दुस्साहसी था कि माओवादी प्रमुख बसव राजू के मारे जाने, देवजी और भूपति के समर्पण के बाद वह अपनी छोटी से टीम के दम पर इस आंदोलन को दोबारा से खड़ा करने के प्रयास में था, परंतु सुरक्षा बलों की रणनीति के आगे आखिरकार वह घिरा और समर्पण को मजबूर हुआ।
पामेड़-उसूर एरिया कमेटी से शुरू हुआ सफर
पापाराव का सफर पामेड़-उसूर एरिया कमेटी से शुरू हुआ। 2018 में पश्चिम बस्तर संभाग के प्रभारी और फिर जोनल नेतृत्व तक पहुंचा। एके-47 से लैस और 25 लाख के इनामी पापाराव पर बीजापुर, सुकमा और दंतेवाड़ा में दर्जनों गंभीर मामले दर्ज थे। केवल बीजापुर में ही 48 केस और 41 स्थायी वारंट लंबित थे।
पापाराव की टीम भी कम खतरनाक नहीं थी
उसकी टीम भी कम खतरनाक नहीं थी। डीकेएसजेडसी सचिव अनिल ताती, जिसने 2006 में संगठन जाइन किया, संगठन के ‘मास नेटवर्क’ और जनताना सरकार के शैक्षणिक ढांचे का प्रमुख चेहरा रहा। आठ लाख के इनामी ताती ने हथियार के साथ-साथ वैचारिक ढांचे को मजबूत करने का काम किया।
वहीं, प्रकाश माड़वी उर्फ गुड्डु ने मुठभेड़ों और हमलों में सक्रिय भूमिका निभाई। टेकलगुड़ेम, मीनपा और आइपेंटा जैसी घटनाओं से लेकर 2025 के नेशनल पार्क ऑपरेशन तक उसकी मौजूदगी रही।
विलास अवलम पर्दे के पीछे से आइईडी नेटवर्क संभालता था
विलास अवलम उर्फ सुदरू संगठन के उस चेहरे का प्रतिनिधित्व करता है, जो पर्दे के पीछे रहकर सप्लाई, सुरक्षा और आइईडी नेटवर्क संभालता था। गणेश उईके का सुरक्षा गार्ड रहने से लेकर एरिया कमांड इन चीफ बनने तक उसने संगठन के सैन्य ढांचे को जमीनी स्तर पर मजबूत किया।
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कैडर तीनों स्तर पर ढांचा बिखर गया है
विशेषज्ञ मानते हैं कि पापाराव और उसकी कोर टीम के खत्म होने से माओवादी संगठन का कमांड, कंट्रोल और कैडर तीनों स्तर पर ढांचा बिखर गया है। जो कभी ‘जनयुद्ध’ का दावा करता था, वह अब छोटे-छोटे बिखरे समूहों तक सिमट चुका है।