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    बस्तर में 'ऑपरेशन खजाना'... जंगल में माओवादियों के 200 करोड़ के गुप्त खजाने की खोज

    माओवादियों का सफाया करने के बाद अब सुरक्षाबल ने उनके नेटवर्क को जड़ से मिटाने के लिए ''ऑपरेशन खजाना'' शुरू किया है।

    By Satish PandeyEdited By: ADITYA KUMAR
    Publish Date: Sun, 31 May 2026 10:00:32 PM (IST)Updated Date: Sun, 31 May 2026 10:00:32 PM (IST)
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    बस्तर में 'ऑपरेशन खजाना'... जंगल में माओवादियों के 200 करोड़ के गुप्त खजाने की खोज
    बस्तर में 'ऑपरेशन खजाना' (फोटो-एआइ निर्मित)

    सतीश पांडेय, नईदुनिया, रायपुर। माओवादियों का सफाया करने के बाद अब सुरक्षाबल ने उनके नेटवर्क को जड़ से मिटाने के लिए ''ऑपरेशन खजाना'' शुरू किया है। इस हाईटेक अभियान के तहत घने जंगल में जमीन के नीचे छिपाकर रखे गए माओवादियों के घातक हथियारों और नकदी को निकाला जा रहा है। इसके लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के सैटेलाइट और ग्राउंड पेनेट्रेटिंग रडार (जीपीआर) जैसी आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया जा रहा है।

    अनुमान है कि माओवादियों ने जमीन के नीचे 200 करोड़ रुपये से अधिक का बारूद और कैश दबा रखा है। बीते तीन महीनों में ही सुरक्षा बल ने इस ऑपरेशन के जरिए आठ करोड़ रुपये से अधिक के अत्याधुनिक हथियार और नकदी बरामद करने में सफलता हासिल की है।


    आसमान से थर्मल स्कैनिंग और जमीन पर रडार से प्रहार

    ऑपरेशन से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक बस्तर के घने जंगलों के कारण जो इलाके इंसानी आंखों से ओझल हैं, उन पर नजर रखने के लिए इसरो के अत्याधुनिक रिसैट-2बी सैटेलाइट का उपयोग किया जा रहा है। यह सैटेलाइट संदिग्ध खुदाई, नई पगडंडियों और जमीन के तापमान में आने वाले अंतर (थर्मल सिग्नेचर) के जरिए सटीक डंप लोकेशंस को ट्रेस कर रहा है।

    इसके साथ ही, आसमान से ड्रोन के जरिए थर्मल स्कैनिंग की जा रही है, जबकि जमीन पर बम निरोधक दस्ता (बीडीएस) डीप मेटल डिटेक्टर लेकर जंगलों की खाक छान रहा है। बीते तीन महीनों में ही बलों ने 8 करोड़ रुपये से अधिक के अत्याधुनिक हथियार और नकदी बरामद कर ली है।

    खुली माओवादियों की डंप पॉलिसी

    जांच में सामने आया है कि माओवादी अपनी अवैध वसूली (लेवी) का करीब 50 प्रतिशत हिस्सा नकद और असलहे के रूप में जमीन के नीचे गाड़ देते थे। इसके लिए वे थ्री-लेयर सिक्योरिटी का इस्तेमाल करते थे। सरेंडर करने वाले एक बड़े माओवादी नेता के मोबाइल से पुलिस ने ऐसी ही 22 गुप्त लोकेशन को डिकोड किया है, जिससे इस ऑपरेशन को बड़ी सफलता मिल रही है।

    सुरक्षा बलों का यह ऑपरेशन साफ संकेत देता है कि अब बस्तर में माओवाद को न सिर्फ जमीन के ऊपर, बल्कि जमीन के नीचे से भी हमेशा-हमेशा के लिए उखाड़ फेंका जाएगा। सुरक्षा बल के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि जब तक बस्तर की मिट्टी से आखिरी डेटोनेटर और विस्फोटक नहीं निकाल लिया जाता, तब तक यह अभियान जारी रहेगा। सुरक्षा बल अब केवल माओवादियों की मौजूदगी खत्म करने तक सीमित नहीं हैं, बल्कि उनके पूरे आर्थिक और हथियार नेटवर्क को जड़ से खत्म करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं। जंगलों में गड़े हुए माओवाद पर यह हमारा निर्णायक प्रहार है।

    ये है माओवादियों की थ्री-लेयर डंप पॉलिसी

    • पहली परत (ऊपरी): मिट्टी और बबूल के कांटे, ताकि कोई वहां न जा सके।
    • दूसरी परत (मध्यम): खतरनाक आईईडी विस्फोटक, ताकि ढूंढने वाले की जान जा सके।
    • तीसरी परत (निचली): वाटरप्रूफ प्लास्टिक में पैक हथियार, कारतूस और करोड़ों का कैश।