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बस्तर में किसानों का अनोखा प्रदर्शन: जब ट्रैक्टरों को रस्सी से खींचकर एसडीएम दफ्तर पहुंचे किसान

छत्तीसगढ़ के बस्तर (भोंड) में 'इंद्रावती बचाओ संघर्ष समिति' के बैनर तले किसानों ने डिब्बों में डीजल न मिलने और खाद की किल्लत के खिलाफ अनोखा प्रदर्शन क...और पढ़ें

By Animesh PaulEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Wed, 03 Jun 2026 11:08:03 AM (IST)Updated Date: Wed, 03 Jun 2026 11:16:47 AM (IST)
बस्तर में किसानों का अनोखा प्रदर्शन: जब ट्रैक्टरों को रस्सी से खींचकर एसडीएम दफ्तर पहुंचे किसान
ट्रैक्टरों को रस्सी से बांध कर खींचते प्रदर्शनकारी किसान। नईदुनिया

HighLights

  1. पेट्रोल पंपों से डिब्बों (कैन) में डीजल न दिए जाने पर किसानों का प्रदर्शन
  2. खरीफ सीजन में खेतों के बीच ट्रैक्टर का ईंधन खत्म होने से किसान परेशान
  3. किसानों ने मांगें पूरी न होने पर जिला मुख्यालय में दी आंदोलन की चेतावनी

नईदुनिया प्रतिनिधि, बस्तर। खेती-किसानी के इस व्यस्त सीजन में बस्तर के किसानों का गुस्सा सातवें आसमान पर है। पेट्रोल पंपों की ओर से डिब्बों (कैन) में डीजल देने से इनकार करने के विरोध में मंगलवार को किसानों ने अनोखा प्रदर्शन किया, जिसने राष्ट्रीय राजमार्ग-30 से गुजरने वाले राहगीरों को हैरानी में डाल दिया। इंद्रावती बचाओ संघर्ष समिति के नेतृत्व में आड़ावाल और भरनी क्षेत्र के सैकड़ों किसान खाली डिब्बे हाथ में लिए और आधा दर्जन ट्रैक्टरों को मोटी रस्सियों से बांधकर, पैदल खींचते हुए पांच किलोमीटर दूर तहसील मुख्यालय बस्तर (एसडीएम कार्यालय) पहुंचे।

खेतों में थमे ट्रैक्टर, किसान बेहाल

किसान नेता लक्ष्मण बघेल और लखेश्वर कश्यप ने बताया कि इस समय खेतों में जुताई और बुवाई का काम जोरों पर है। कई बार खेतों के बीच में ही ट्रैक्टर का डीजल खत्म हो जाता है। ऐसी स्थिति में पूरा ट्रैक्टर पेट्रोल पंप तक लाना मुमकिन नहीं होता। नारायणपाल जैसी जगहों पर जब किसान डिब्बे में थोड़ा डीजल मांगने पहुंचे, तो पंप संचालकों ने साफ मना कर दिया। इस व्यावहारिक समस्या से परेशान होकर किसानों को यह कदम उठाना पड़ा। एसडीएम कार्यालय के सामने किसानों का यह प्रदर्शन करीब एक घंटे तक चला।


खाद का संकट और 'टोकन व्यवस्था' पर सवाल

डीजल के साथ-साथ किसान इस समय लेंपस (समेकित समितियों) में खाद की भारी किल्लत से भी जूझ रहे हैं। किसान नेता हेमराज बघेल, अमृत कश्यप और पूरन सिंह कश्यप ने प्रशासन की 'टोकन व्यवस्था' पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सरकार कह रही है कि रकबे के हिसाब से टोकन बांटकर खाद दी जाएगी। लेकिन धान खरीदी के समय भी कई किसान टोकन जेब में लिए घूमते रह गए और अपनी फसल नहीं बेच पाए। इस बात की क्या गारंटी है कि खाद के समय किसानों को धोखा नहीं मिलेगा।

किसानों ने दो टूक शब्दों में शासन-प्रशासन को चेतावनी दी है कि यदि डिब्बों में डीजल की आपूर्ति तुरंत बहाल नहीं की गई और खाद का संकट दूर नहीं हुआ, तो आने वाले दिनों में जिला मुख्यालय का घेराव कर बड़ा और उग्र आंदोलन किया जाएगा।