
नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। जिले की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी इन दिनों जलकुंभी के तेजी से फैलते प्रकोप और शहर के गंदे नालों से हो रहे प्रदूषण के कारण गंभीर संकट से गुजर रही है। सिद्धार्थ नगर से लेकर महमरा एनीकट, झेझरी, पथरिया-सनगीघाट और अरसनारा तक नदी की सतह जलकुंभी से ढंक चुकी है। कई स्थानों पर स्थिति ऐसी है कि नदी का स्वरूप फुटबाल मैदान जैसा दिखाई देने लगा है।
स्थानीय लोगों के अनुसार जलकुंभी सड़ने के बाद नदी में दलदल जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे जल की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। कई जगह दुधारू पशु दलदल में फंसकर जान गंवा चुके हैं।
वहीं नदी में स्नान करने वाले लोगों को खुजली, त्वचा रोग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जलकुंभी की मोटी परत से जल प्रवाह भी प्रभावित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों के जीवन और नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
हालांकि नदी संरक्षण के लिए समय-समय पर जलकुंभी हटाने और प्रदूषण रोकने की योजनाएं बनाई गईं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन अब तक नहीं हो सका है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से शहर के गंदे नालों का पानी सीधे नदी में मिलने से रोकने, व्यापक स्तर पर जलकुंभी हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने तथा शिवनाथ नदी के संरक्षण के लिए स्थायी और प्रभावी कार्ययोजना लागू करने की मांग की है।