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भिलाई की जीवनदायिनी शिवनाथ पर प्रदूषण और जलकुंभी का घना साया, संकट में पारिस्थितिकी तंत्र और व्यवस्था पर सवाल

भिलाई की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी इन दिनों जलकुंभी और शहर के गंदे नालों के प्रदूषण से जूझ रही है। नदी का एक बड़ा हिस्सा जलकुंभी से ढंक गया है, जिससे दलदल...और पढ़ें

By T Surya RaoEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sat, 04 Jul 2026 02:49:19 PM (IST)Updated Date: Sat, 04 Jul 2026 02:52:08 PM (IST)
भिलाई की जीवनदायिनी शिवनाथ पर प्रदूषण और जलकुंभी का घना साया, संकट में पारिस्थितिकी तंत्र और व्यवस्था पर सवाल
शिवनाथ नदी में सगनीघाट के पास एनीकेट के पास पांच सौ मीटर लंबाई तक जलकुंभी के विस्तार से छिप गई है नदी। नईदुनिया

HighLights

  1. शिवनाथ नदी में जलकुंभी का भारी संकट
  2. प्रदूषण से जलीय जीवों और स्वास्थ्य को खतरा
  3. स्थायी कार्ययोजना की मांग हो रही तेज

नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। जिले की जीवनदायिनी शिवनाथ नदी इन दिनों जलकुंभी के तेजी से फैलते प्रकोप और शहर के गंदे नालों से हो रहे प्रदूषण के कारण गंभीर संकट से गुजर रही है। सिद्धार्थ नगर से लेकर महमरा एनीकट, झेझरी, पथरिया-सनगीघाट और अरसनारा तक नदी की सतह जलकुंभी से ढंक चुकी है। कई स्थानों पर स्थिति ऐसी है कि नदी का स्वरूप फुटबाल मैदान जैसा दिखाई देने लगा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार जलकुंभी सड़ने के बाद नदी में दलदल जैसी स्थिति बन जाती है, जिससे जल की गुणवत्ता लगातार गिर रही है। कई जगह दुधारू पशु दलदल में फंसकर जान गंवा चुके हैं।

नहाने से होती है खुजली

वहीं नदी में स्नान करने वाले लोगों को खुजली, त्वचा रोग और अन्य स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। जलकुंभी की मोटी परत से जल प्रवाह भी प्रभावित हो रहा है, जिससे जलीय जीवों के जीवन और नदी के प्राकृतिक पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।


संरक्षण की प्रभावी कार्ययोजना की मांग

हालांकि नदी संरक्षण के लिए समय-समय पर जलकुंभी हटाने और प्रदूषण रोकने की योजनाएं बनाई गईं, लेकिन उनका प्रभावी क्रियान्वयन अब तक नहीं हो सका है। स्थानीय नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने प्रशासन से शहर के गंदे नालों का पानी सीधे नदी में मिलने से रोकने, व्यापक स्तर पर जलकुंभी हटाने के लिए विशेष अभियान चलाने तथा शिवनाथ नदी के संरक्षण के लिए स्थायी और प्रभावी कार्ययोजना लागू करने की मांग की है।