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गुरुजी के निधन से बिगड़ा भिलाई-चरोदा का सियासी गणित, टिकट के दावेदारों की बढ़ी मुश्किलें

अहिवारा विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन से भिलाई चरोदा नगर निगम चुनाव के समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं जिससे टिकट के दावेदारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।

By T Surya RaoEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Mon, 02 Nov 2026 05:00:20 PM (IST)Updated Date: Mon, 02 Nov 2026 05:02:10 PM (IST)
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गुरुजी के निधन से बिगड़ा भिलाई-चरोदा का सियासी गणित, टिकट के दावेदारों की बढ़ी मुश्किलें
भिलाई नगर निगम की तस्वीर। प्रतीकात्मक अर्काइव

HighLights

  1. डोमनलाल कोर्सेवाड़ा के निधन से बदले सियासी समीकरण
  2. पार्षद और महापौर चुनाव के दावेदारों की मुश्किलें
  3. कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव और सांसद विजय बघेल

टी.सूर्याराव, नईदुनिया. भिलाई। अहिवारा के विधायक डोमनलाल कोर्सेवाड़ा यानी गुरुजी के निधन से भिलाई-चरोदा नगर निगम की राजनीति में कई दावेदारों के समीकरण बिगड़ गए हैं। दिसंबर में प्रस्तावित नगरीय निकाय चुनाव को लेकर पार्षद से लेकर महापौर पद तक चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे नेताओं को अब नए राजनीतिक समीकरणों के बीच अपनी राह तलाशनी होगी। खासकर वे नेता, जो गुरुजी के समर्थन और उनके प्रभाव के दम पर भाजपा से टिकट मिलने की उम्मीद लगाए बैठे थे, उन्हें अब निराशा हाथ लगती दिखाई दे रही है।

भिलाई-चरोदा नगर निगम में कुल 40 वार्ड हैं। यहां कुल 72,247 मतदाता हैं। इनमें 35,172 पुरुष, 36,074 महिला और एक अन्य मतदाता शामिल हैं। इतने बड़े मतदाता वर्ग वाले निगम में महापौर और पार्षद पदों के लिए भाजपा तथा कांग्रेस दोनों ही दलों में दावेदारों की सक्रियता बढ़ने लगी है। हालांकि, भाजपा के भीतर गुरुजी की मौजूदगी से जिन नेताओं को राजनीतिक संबल मिलता था, उनके लिए अब परिस्थितियां बदल गई हैं।


अहिवारा नपा चुनाव में गुरुजी ने दिखाई थी पकड़

करीब दो वर्ष पहले अहिवारा नगर पालिका चुनाव के दौरान भी गुरुजी की राजनीतिक पकड़ चर्चा में रही थी। उस समय उन्होंने अपने समर्थक नटवर ताम्रकार को प्रत्याशी बनवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। हालांकि, चुनाव में भाजपा समर्थक रहे विद्यानंद कुशवाहा ने निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरकर कांग्रेस और भाजपा दोनों को शिकस्त दे दी थी।

टिकट वितरण में दिखाई दिया था प्रभाव

उस चुनाव में भाजपा की टिकट को लेकर भी काफी चर्चा हुई थी। राजनीतिक गलियारों में यह बात सामने आई थी कि डोमनलाल कोर्सेवाड़ा की पसंद और उनके कहने पर ही टिकट का फैसला किया गया था। इस घटनाक्रम से अंदाजा लगाया जा सकता है कि स्थानीय राजनीति में गुरुजी की कितनी पकड़ थी। उनके समर्थक भी इसी प्रभाव के आधार पर आगामी नगरीय निकाय चुनाव में अपनी दावेदारी मजबूत मानकर चल रहे थे।

अब नए समीकरण में किसका चलेगा प्रभाव

गुरुजी के नहीं रहने के बाद भिलाई-चरोदा नगर निगम चुनाव में भाजपा के भीतर नए राजनीतिक समीकरण बनने की संभावना है। इस बार स्थानीय स्तर पर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री गजेंद्र यादव की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। गजेंद्र यादव का गृह क्षेत्र होने के कारण उनके समर्थक भी पार्षद और महापौर पद के लिए टिकट की दावेदारी करेंगे। ऐसे में वे अपने करीबी नेताओं को पार्टी का प्रत्याशी बनवाने के लिए प्रयास कर सकते हैं।

विजय बघेल भी करेंगे प्रयास

वहीं दुर्ग लोकसभा क्षेत्र के सांसद विजय बघेल का भी इस चुनाव में प्रभाव देखने को मिल सकता है। वे भी अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए सक्रिय रहेंगे।

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