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भिलाई में पूर्व सैनिकों की मांग, 30 हजार मासिक वेतन, सफारी सूट और सम्मान दें सुरक्षा एजेंसियां

भिलाई में भाजपा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ ने निजी सुरक्षा एजेंसियों में कार्यरत पूर्व सैनिकों के लिए तीस हजार रुपये मासिक वेतन और सम्मानजनक कार्य माहौल की पुरजोर मांग की है।

By T Surya RaoEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Thu, 29 Oct 2026 10:48:50 PM (IST)Updated Date: Thu, 29 Oct 2026 10:51:14 PM (IST)
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भिलाई में पूर्व सैनिकों की मांग, 30 हजार मासिक वेतन, सफारी सूट और सम्मान दें सुरक्षा एजेंसियां
पूर्व सैनिक भिलाई कलेक्टर से मुलाकात करते हुए। - पूर्व सैनिक

HighLights

  1. पूर्व सैनिकों ने तीस हजार मासिक वेतन मांगा
  2. निजी सुरक्षा एजेंसियां दें देश के सपूतों को सम्मान
  3. कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर बैठक कराने की मांग की

नईदुनिया प्रतिनिधि, भिलाई। भारतीय सेना में 15 से 26 साल तक देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले पूर्व सैनिकों को सेवानिवृत्ति के बाद नागरिक जीवन में मिलने वाले सम्मान और अधिकारों को लेकर छत्तीसगढ़ के भिलाई में आवाज उठी है। भाजपा पूर्व सैनिक प्रकोष्ठ, जिला भिलाई के बैनर तले पूर्व सैनिकों ने जिला प्रशासन के समक्ष अपनी विभिन्न समस्याओं को रखते हुए ज्ञापन सौंपा है।

उनका कहना है कि देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले इन वीर जवानों को निजी सुरक्षा एजेंसियों में बेहद कम वेतन और असम्मानजनक माहौल में काम करने के लिए मजबूर होना पड़ता है, जिसे अब और सहन नहीं किया जाएगा।


कम वेतन और पारिवारिक जिम्मेदारियों का संकट

जनदर्शन कार्यक्रम के दौरान जिला कलेक्टर को सौंपे गए ज्ञापन में पूर्व सैनिकों ने स्पष्ट किया है कि सेना से रिटायर होने के बाद उन्हें निजी सुरक्षा एजेंसियों में महज 12 से 15 हजार रुपये प्रतिमाह की शुरुआती सैलरी पर काम करना पड़ता है। बढ़ती महंगाई और पारिवारिक जिम्मेदारियों के इस दौर में इतनी कम राशि में जीवनयापन करना बेहद कठिन हो जाता है।

25 से 30 हजार करें वेतन

प्रकोष्ठ के जिला संयोजक एवं पूर्व सैनिक बी. तुलसी राव के नेतृत्व में मांग की गई है कि पूर्व सैनिकों के अनुभव, कौशल और अनुशासन को ध्यान में रखते हुए उनका न्यूनतम मासिक वेतन 25 से 30 हजार रुपये तय किया जाना चाहिए, ताकि वे गरिमापूर्ण जीवन जी सकें।

ड्रेस कोड बनाएं, सैन्य प्रतीकों का दुरुपयोग रोकें

वेतन के अलावा पूर्व सैनिकों ने निजी सुरक्षा एजेंसियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मांग की है कि सभी निजी एजेंसियों में पूर्व सैनिकों के लिए एक निर्धारित रंग की सफारी ड्रेस लागू की जानी चाहिए। इसके अलावा विभिन्न एजेंसियों द्वारा अपनी मनमानी कैप और बेल्ट के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए। ज्ञापन में इस बात पर भी जोर दिया गया है कि भारतीय सेना की मूल वर्दी, रैंक, बैज और अन्य आधिकारिक प्रतीक चिह्नों का अनधिकृत उपयोग धड़ल्ले से हो रहा है, जिस पर तुरंत प्रभावी कानूनी नियंत्रण लगाया जाना चाहिए।

योग्यता के अनुरूप पद और संयुक्त बैठक का सुझाव

पूर्व सैनिकों ने प्रशासनिक स्तर पर यह भी मांग की है कि उन्हें केवल साधारण गार्ड के रूप में नहीं, बल्कि उनकी योग्यता और सेवा अनुभव के आधार पर सुरक्षा सुपरवाइजर और सुरक्षा पर्यवेक्षक जैसे जिम्मेदार पदों पर नियुक्त किया जाना चाहिए। इस पूरी व्यवस्था को सुधारने के लिए श्रम विभाग, जिला प्रशासन और निजी सुरक्षा एजेंसियों के प्रतिनिधियों की संयुक्त बैठक आयोजित करने का सुझाव दिया गया है।

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