
टी. सूर्याराव, नईदुनिया, भिलाई। महादेव ऑनलाइन बेटिंग सिंडिकेट के कथित संचालक सौरभ चंद्राकर का नाम आज देश और विदेश में चर्चाओं का विषय बना हुआ है। लेकिन भिलाई के लोगों के लिए सौरभ की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है। मदर टेरेसा नगर की साधारण गलियों में पला-बढ़ा एक युवक, जिसके परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सामान्य थी, आज हजारों करोड़ रुपये के कथित ऑनलाइन सट्टेबाजी नेटवर्क से जुड़े आरोपों के कारण सुर्खियों में है।
सौरभ चंद्राकर का जन्म और बचपन तत्कालीन विशेष विकास प्राधिकरण (साडा), अब भिलाई नगर निगम द्वारा विकसित मदर टेरेसा नगर क्षेत्र में बीता। परिवार निगम द्वारा आवंटित एक साधारण आवास में रहता था। उस समय परिवार की आर्थिक स्थिति बेहद सीमित थी। सौरभ के पिता रामेश्वर चंद्राकर साडा में पंप ऑपरेटर के रूप में कार्यरत थे। अपनी सीमित आय में वे परिवार का पालन-पोषण करते थे। परिवार में सादगी और मेहनत का माहौल था। सौरभ के चाचा दिलीप चंद्राकर भी क्षेत्र में परिचित नाम रहे हैं।
मदर टेरेसा नगर के सरकारी स्कूलों और आसपास के शैक्षणिक संस्थानों में पढ़ाई करने वाले सौरभ को जानने वाले बताते हैं कि उसकी पढ़ाई में विशेष रुचि नहीं थी। पढ़ाई के दौरान उसका प्रदर्शन सामान्य से भी कमजोर माना जाता था। कई स्थानीय लोगों का कहना है कि किशोरावस्था में ही उसे सट्टेबाजी और ताश के खेलों की ओर आकर्षण होने लगा था।

भिलाई के नेहरू नगर स्थित सौरभ चंद्राकर की जूस फैक्ट्री, जहां से उसने अपना कैरियर शुरू किया था।
स्थानीय लोगों के बीच एक किस्सा आज भी चर्चा में रहता है। बताया जाता है कि जब सौरभ ने पहली बार सट्टे में पैसे लगाए और इसकी जानकारी उसके पिता रामेश्वर चंद्राकर को मिली, तब उन्होंने उसे कड़ी फटकार लगाई थी। परिवार चाहता था कि वह पढ़ाई या किसी रोजगार के जरिए स्थिर भविष्य बनाए, लेकिन धीरे-धीरे उसकी रुचि सट्टेबाजी की दुनिया की ओर बढ़ती चली गई।
परिवार की आर्थिक स्थिति में कुछ सुधार तब आया जब रामेश्वर चंद्राकर ने वर्षों की बचत और नौकरी के सहारे भिलाई के एक अन्य क्षेत्र में मकान खरीदा। उस समय यह परिवार के लिए बड़ी उपलब्धि मानी गई थी। लेकिन इसी दौरान सौरभ का झुकाव तेजी से ऐसे लोगों की ओर बढ़ा जो सट्टेबाजी और उससे जुड़े कारोबार में सक्रिय थे।
सौरभ ने भिलाई के नेहरू नगर क्षेत्र में उसने एक जूस दुकान खोली, जिसे स्थानीय लोग "जूस फैक्ट्री" के नाम से जानते थे। हालांकि यह व्यवसाय अपेक्षित सफलता हासिल नहीं कर सका। उस समय उसके पास कारोबार चलाने के लिए पर्याप्त पूंजी भी नहीं थी। स्थानीय व्यापारियों के अनुसार वह कई बार पावर हाउस क्षेत्र के फल व्यापारियों और परिचितों से उधार में फल लेकर अपनी दुकान चलाता था। दुकान का खर्च निकालना भी उसके लिए चुनौती बना रहता था।
नेहरू नगर की यह छोटी सी दुकान उस समय शायद ही किसी के लिए आकर्षण का केंद्र रही हो, लेकिन बाद के वर्षों में जब सौरभ का नाम महादेव ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्क से जुड़ा, तब लोगों ने उसी जूस दुकान और उसके पुराने संघर्षों को याद करना शुरू किया।
भिलाई के कई पुराने निवासी बताते हैं कि कुछ वर्षों के भीतर सौरभ की जीवनशैली में अचानक बदलाव दिखाई देने लगा। साधारण आर्थिक पृष्ठभूमि से आने वाला युवक तेजी से धन-संपत्ति और आलीशान जीवनशैली से जुड़ता नजर आया। इसके बाद उसका अधिकांश समय भिलाई से बाहर गुजरने लगा और धीरे-धीरे उसका नाम देश के सबसे चर्चित ऑनलाइन बेटिंग नेटवर्कों में शामिल महादेव ऐप प्रकरण से जुड़ गया।
यह भी पढ़ें- Chhattisgarh Breaking: छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के पूर्व कोषाध्यक्ष रामगोपाल अग्रवाल को Eow ने हिरासत में लिया
आज जब ओमान में हिरासत और भारत प्रत्यर्पण की चर्चाएं हो रही हैं, तब भिलाई के मदर टेरेसा नगर, नेहरू नगर और पावर हाउस क्षेत्र के लोग उसी सौरभ चंद्राकर को याद कर रहे हैं, जिसे कभी एक साधारण परिवार का संघर्षरत युवक माना जाता था। भिलाई की गलियों से शुरू हुई यह कहानी अब देश के सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में दर्ज हो चुकी है।