दुर्ग के बघेरा क्षेत्र में बंदरों का आतंक, छत या बालकनी में छोड़ी बड़ी-बिजौड़ी तो चट कर रहे हैं वानर, देखिए तस्वीरें
दुर्ग जिले के बघेरा क्षेत्र में बंदरों का भारी आतंक लगातार बढ़ रहा है जहाँ छतों पर सुखाए जाने वाले सामानों और खाद्य पदार्थों को वे नष्ट कर रहे हैं।
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 03:55:08 PM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 04:09:34 PM (IST)
दुर्ग के बघेरा में बालकनी में डेरा डाले वानर। - वीडियो ग्रैब नईदुनिया प्रतिनिधि, दुर्ग। छत्तीसगढ़ के दुर्ग जिले के अंतर्गत आने वाले बघेरा क्षेत्र में बंदरों का उत्पात मचा हुआ है। स्थानीय रहवासियों का जीना मुहाल हो गया है। शहर से लगे इस घनी आबादी वाले क्षेत्र में बंदरों की फौज आतंक मचा रही है। स्थिति यह है कि छोटे बच्चों का घरों से निकलना, बालकनी और छतों पर जाना तक दूभर हो गया है।
ग्रामीण और शहरी इलाकों के मिलन स्थल जैसे बघेरा क्षेत्र में पारंपरिक रूप से लोग अपने घरों की छतों और आंगनों का उपयोग विभिन्न प्रकार की जरूरी चीजें सुखाने के लिए करते हैं। इन दिनों शादियों और अन्य आयोजनों का सीजन होने के कारण घरों में पापड़, बड़ी, मसाले, अनाज, कपड़े और अन्य सांस्कृतिक रूप से महत्वपूर्ण जरूरत की चीजें बड़े पैमाने पर तैयार कर छतों पर धूप में सुखाई जा रही हैं।
सामने जमे बैठे बंदरों के डर से बालकनी का गेट खोलने में भी डरते हैं लोग। - वीडियो ग्रैब
छतों और बालकनी पर धावा
बघेरा क्षेत्र में सक्रिय बंदरों का झुंड अचानक इन छतों पर धावा बोल देता है। बंदर न केवल सुखाने के लिए रखे गए खाद्य पदार्थों को चट कर जाते हैं, बल्कि महंगे कपड़ों और अन्य जरूरी सामानों को फाड़कर पूरी तरह तहस-नहस कर देते हैं। सुबह से लेकर शाम तक बंदरों के झुंड छतों पर उछल-कूद मचाए रहते हैं, जिससे लोगों की मेहनत और पैसों दोनों का नुकसान हो रहा है।
इधर से उधर छलांग मारते बंदरों के हमले का भी डर बना रहता है। - वीडियो ग्रैब
गृहणियों की बढ़ गई है मुसीबत
बघेरा के स्थानीय निवासियों का कहना है कि शादी-विवाह की तैयारियों के सिलसिले में रिश्तेदारों और परिवार के लोगों के लिए विशेष खाद्य सामग्रियां तैयार की जाती हैं। ऐसे में जब महिलाएं और परिवार के सदस्य घंटों मेहनत कर खाद्य सामग्री को धूप में सुखाने के लिए छोड़ते हैं, तो चंद मिनटों में बंदरों का झुंड आकर सब कुछ सफाचट कर देता है या पैरों तले कुचल कर बर्बाद कर देता है। कई बार तो बंदरों को भगाने की कोशिश करने पर वे काटने या हमला करने के लिए भी दौड़ पड़ते हैं, जिससे बच्चों और बुजुर्गों में भय का माहौल बना हुआ है। महिलाओं का कहना है कि अब वे अकेले छतों पर जाने से भी कतराने लगी हैं।
गेट होगा आदमी के लिए हम बंदरों के लिए तो छत ही गेट है। छत से सोसायटी में प्रवेश करता बंदर। - वीडियो ग्रैब्
वन विभाग और स्थानीय प्रशासन की उदासीनता
क्षेत्रीय नागरिकों ने इस गंभीर समस्या को लेकर कई बार स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों का ध्यान आकर्षित करने का प्रयास किया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि नगर निगम और वन विभाग की टीमों द्वारा बघेरा क्षेत्र में बंदरों को पकड़ने या उन्हें सुरक्षित जंगलों में छोड़ने के लिए कोई विशेष अभियान नहीं चलाया जा रहा है।
नागरिकों की मांग और सुरक्षा के उपाय
बघेरा क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों और पीड़ित परिवारों ने मांग की है कि तुरंत प्रभाव से बंदर पकड़ने वाली विशेष रेस्क्यू टीमों को क्षेत्र में तैनात किया जाए।