
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से भिलाई और दुर्ग होते हुए नागपुर के रास्ते देश के विभिन्न हिस्सों में हवाला के जरिए अवैध रकम भेजे जाने का मामला सामने आया है। सूत्रों के अनुसार इस अवैध नेटवर्क के माध्यम से रोजाना लगभग 50 करोड़ रुपये का लेनदेन होने का अनुमान लगाया जा रहा है। लोहा कारोबार से जुड़े व्यापारियों, बिजली उत्पादन कंपनियों और सोने की नकद खरीदी-बिक्री में हवाला कारोबारियों की सक्रियता ने सुरक्षा एजेंसियों की नींद उड़ा दी है।
राजधानी रायपुर में हवाला के इस अवैध कारोबार को संचालित करने के लिए बाकायदा गुप्त कार्यालय खोले गए हैं। इन कार्यालयों के जरिए देश के किसी भी शहर या राज्य में बिना किसी आधिकारिक बैंकिंग प्रक्रिया के आसानी से रकम पहुंचाई जाती है। हवाला संचालक अपने गुप्त नेटवर्क के माध्यम से तय स्थान पर सुरक्षित पैसा पहुंचाते हैं। इसके एवज में दूरी और भेजी जाने वाली कुल राशि के आधार पर एक प्रतिशत से अधिक तक कमीशन तय किया जाता है।
इस अवैध कारोबार में लेनदेन को पुख्ता करने के लिए अनोखे तरीके अपनाए जाते हैं। नोटों की पहचान के लिए विशेष संकेतों का उपयोग किया जाता है। कई मामलों में नोट को फाड़कर या उसके विशेष हिस्से का इस्तेमाल कर भुगतान सुनिश्चित किया जाता है। फिल्मों जैसी इस कार्यप्रणाली के जरिए ऑपरेटर बिना किसी कागजी कार्रवाई के करोड़ों रुपये का हेरफेर आसानी से कर लेते हैं।
हाल ही में पच्चीस अक्टूबर की रात दुर्ग जिले के कुम्हारी के पास एक वाहन से चार करोड़ रुपये नकद बरामद होने के बाद इस नेटवर्क की कलई खुल गई। वाहन में बनाए गए विशेष गुप्त केबिन में यह भारी रकम छिपाकर ले जाई जा रही थी। इस बड़ी कार्रवाई ने यह साबित कर दिया है कि राजधानी और आसपास के इलाकों में हवाला का कारोबार किस स्तर पर फैल चुका है।
हवाला कारोबार की सबसे बड़ी जटिलता यह है कि इसमें पैसे भेजने और प्राप्त करने वाले व्यक्ति अलग-अलग शहरों में रहते हैं। स्थानीय स्तर पर नकद का आदान-प्रदान होने के कारण पुलिस के लिए इस पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ना बेहद चुनौतीपूर्ण है। रायपुर से नागपुर और अन्य राज्यों तक फैले इस नेटवर्क की गहराई से जांच की जा रही है।