
नईदुनिया प्रतिनिधि बिलासपुर। एक सप्ताह पहले तक बिलासपुर में तापमान लगभग 40 डिग्री सेल्सियस के करीब पहुंच रहा था, लेकिन अब इसमें लगभग 8.3 डिग्री की उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। मंगलवार को जिले की कई तहसीलों में हल्की वर्षा हुई, जबकि पूरे जिले में कुल 112 मिमी वर्षा रिकार्ड की गई। शहर में केवल 5.5 मिमी वर्षा दर्ज हुई।
मौसम विभाग के अनुसार बुधवार को भी इसी तरह की स्थिति बने रहने की संभावना है। मौसम विभाग ने बताया कि सीजनल द्रोणिका पंजाब से उत्तर बंगाल की खाड़ी तक 0.9 किलोमीटर ऊंचाई तक विस्तारित है। इसके अलावा 58 डिग्री पूर्व और 32 डिग्री नार्थ में एक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय है। उत्तर बंगाल की खाड़ी और उससे लगे क्षेत्र में 1.5 किलोमीटर से 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण बना हुआ है।
इसके प्रभाव से 3 जुलाई को उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उसके आसपास निम्न दाब का क्षेत्र बनने की संभावना है। वहीं उत्तर बंगाल की खाड़ी से उत्तर पूर्व अरब सागर तक छत्तीसगढ़ होते हुए 4.5 किलोमीटर से 7.6 किलोमीटर ऊंचाई तक द्रोणिका विस्तारित है। उत्तर छत्तीसगढ़ और उसके आसपास 1.5 किलोमीटर ऊंचाई पर भी ऊपरी हवा का चक्रीय चक्रवाती परिसंचरण सक्रिय है। मौसम विभाग ने 2 जुलाई को प्रदेश के अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा, गरज-चमक, अंधड़, वज्रपात तथा एक-दो स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना जताई है।
एक सप्ताह में बदला मौसम का मिजाज
बिलासपुर में एक सप्ताह पहले तक तेज गर्मी और लगभग 40 डिग्री सेल्सियस तापमान लोगों के लिए परेशानी का कारण बना हुआ था। अब मौसम में आए बदलाव से तापमान सामान्य से नीचे पहुंच गया है। इससे गर्मी का असर काफी कम हुआ है। हालांकि वातावरण में नमी बढ़ने से उमस बरकरार है, जिससे लोगों को दिनभर असहजता का सामना करना पड़ रहा है।
निम्न दाब बनने से बढ़ सकती हैं गतिविधियां
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर पश्चिम बंगाल की खाड़ी में तीन जुलाई को संभावित निम्न दाब का क्षेत्र बनने के बाद प्रदेश में वर्षा की गतिविधियों में तेजी आने के आसार हैं। इसका प्रभाव छत्तीसगढ़ के कई हिस्सों में देखने को मिल सकता है। अगले कुछ दिनों तक बादल, गरज-चमक और रुक-रुककर वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना जताई गई है।
गरज-चमक और वज्रपात की सलाह
मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि दो जुलाई को प्रदेश के एक-दो स्थानों पर गरज-चमक के साथ अंधड़, वज्रपात तथा भारी वर्षा की स्थिति बन सकती है। ऐसे मौसम में खुले मैदान, ऊंचे पेड़ों और बिजली के खंभों के आसपास जाने से बचने की सलाह दी गई है। आवश्यकता होने पर ही घर से बाहर निकलना सुरक्षित माना गया है।
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