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बिजली कंपनी पर हाई कोर्ट सख्त, पूछा- हादसों पर लापरवाह अफसरों की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं?

बिलासपुर हाई कोर्ट ने बिजली कंपनी (सीएसपीडीसीएल) से सुरक्षा एसओपी लागू करने और लापरवाही बरतने वाले अफसरों की जिम्मेदारी तय करने पर तीन सप्ताह में शपथपत्र के जरिए जवाब मांगा है।

By Kamlesh RajakEdited By: Anurag Mishra
Publish Date: Wed, 04 Nov 2026 09:17:04 AM (IST)Updated Date: Wed, 04 Nov 2026 09:17:04 AM (IST)
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बिजली कंपनी पर हाई कोर्ट सख्त, पूछा- हादसों पर लापरवाह अफसरों की जिम्मेदारी तय क्यों नहीं?
बिजली कंपनी पर हाई कोर्ट सख्त।

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने सीएसपीडीसीएल से सुरक्षा एसओपी पर जवाब मांगा।
  2. अफसरों की जिम्मेदारी तय न होने पर कोर्ट ने उठाए सवाल।
  3. कंपनी को तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र पेश करने का निर्देश।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: बिजली वितरण व्यवस्था में सुरक्षा और हादसों की रोकथाम के लिए जारी मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) के पालन को लेकर हाई कोर्ट ने छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी (सीएसपीडीसीएल) से जवाब मांगा है।

कोर्ट ने कहा कि 21 अगस्त 2026 को जारी एसओपी को देखने से प्रथम दृष्टया ऐसा लगता है कि बिजली वितरण व्यवस्था के रखरखाव, आम लोगों की सुरक्षा और एसओपी लागू करने में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जिम्मेदारी तय करने का कोई प्रावधान नहीं किया गया है।

सक्षम अधिकारी को शपथपत्र पेश करने का निर्देश

कोर्ट ने कंपनी के सक्षम अधिकारी को तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र पेश कर बताने का निर्देश दिया है कि एसओपी लागू करने और लोगों को जागरूक करने के लिए क्या कदम उठाए गए हैं। मुख्य न्यायाधीश जस्टिस कृष्ण राम महापात्र और जस्टिस संतोष शर्मा की युगल पीठ ने स्वतः संज्ञान से दर्ज जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान यह निर्देश दिया। सुनवाई में राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास तथा विद्युत वितरण कंपनी के संबंधित पक्षों की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता मनोज परांजपे ने पैरवी की।


लापरवाही बरतने वालों पर जवाबदेही तय करने को कहा

  • कोर्ट ने कंपनी के सक्षम अधिकारी को शपथपत्र में यह भी स्पष्ट करने को कहा है कि एसओपी लागू नहीं करने और अपने कर्तव्यों तथा जिम्मेदारियों के निर्वहन में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए या नहीं।
  • यानी कंपनी को केवल एसओपी लागू करने की जानकारी ही नहीं देनी होगी, बल्कि यह भी बताना होगा कि नियमों का पालन नहीं होने पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ जवाबदेही तय करने की व्यवस्था क्यों नहीं है या इस दिशा में क्या कदम उठाए जा सकते हैं।

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सात दिसंबर को अगली सुनवाई

हाई कोर्ट ने निर्देश दिया है कि शपथपत्र तीन सप्ताह के भीतर दाखिल किया जाए और उसकी प्रति राज्य सरकार के अधिवक्ता को भी उपलब्ध कराई जाए। मामले को अगली सुनवाई के लिए सात दिसंबर 2026 को रखा गया है।

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