
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। सोशल मीडिया पर दिखे शेयर बाजार के विज्ञापन पर भरोसा करना शहर के एक व्यापारी को भारी पड़ गया। मुनाफे का लालच देकर साइबर ठगों ने उससे 14 लाख 67 हजार रुपये की ठगी कर ली। जालसाजों ने अलग-अलग वॉट्सएप नंबर और बैंक खातों के जरिए रकम जमा कराई। शिकायत के बाद सिविल लाइन पुलिस ने अपराध दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
सिविल लाइन क्षेत्र के अमलताश कालोनी में रहने वाले विशाल गुप्ता (35) ने 19 मई को फेसबुक पर शेयर बाजार में निवेश कर अधिक लाभ कमाने संबंधी विज्ञापन देखा। विज्ञापन में दिए गए नंबर पर संपर्क करने पर दूसरी ओर से खुद को अन्नया मेहरा बताने वाली महिला ने बातचीत शुरू की। महिला ने शेयर खरीद-बिक्री के जरिए अच्छा मुनाफा कमाने का भरोसा दिलाया और व्यापारी को व्हाट्सएप ग्रुप में जोड़ दिया।
इसके बाद व्यापारी को मोबाइल एप डाउनलोड कराकर उसमें रजिस्ट्रेशन कराया गया। शुरुआत में 10 हजार रुपये जमा कराए गए, फिर बैलेंस कम बताकर और रुपये जमा कराए गए। धीरे-धीरे निवेश की रकम बढ़ती गई और 20 मई से 15 जून के बीच अलग-अलग खातों में 14 लाख 67 हजार रुपये जमा करा लिए गए। एप में लगातार बढ़ता बैलेंस दिखाकर भरोसा कायम रखा गया। बाद में ठगों ने दावा किया कि निवेश से 25.94 लाख रुपये का लाभ हो चुका है, लेकिन रुपये निकालने के लिए 24.85 लाख रुपये और जमा करने होंगे। जब व्यापारी ने रकम लौटाने की मांग की तो ठगों ने पैसे डूब जाने की धमकी दी। पीड़ित ने 1930 साइबर हेल्पलाइन में शिकायत दर्ज कराई। पुलिस अब मोबाइल नंबरों और बैंक खातों की जांच कर रही है।
फेसबुक विज्ञापन से शुरू हुआ जाल
साइबर ठगों ने पूरी ठगी की शुरुआत इंटरनेट मीडिया विज्ञापन से की। शेयर बाजार में तेजी से मुनाफा कमाने का दावा करते हुए ऐसा माहौल बनाया गया कि निवेश पूरी तरह सुरक्षित और भरोसेमंद लगे। व्यापारी ने संपर्क किया तो पहले सामान्य बातचीत हुई और फिर उसे निवेश के फायदे बताए गए। शुरुआती निवेश कम रखा गया ताकि विश्वास बनाया जा सके। कुछ समय बाद एप में लाभ दिखाकर रकम बढ़ाने के लिए प्रेरित किया गया। हर चरण में ठगों ने यह भरोसा दिलाया कि पैसा शेयर बाजार में लगाया जा रहा है और जल्दी बड़ा रिटर्न मिलेगा। इसी भरोसे में व्यापारी लगातार रकम जमा करता गया। पुलिस ने लोगों से अपील की है कि इंटरनेट मीडिया पर दिखने वाले निवेश विज्ञापनों की जांच किए बिना पैसे निवेश न करें।
व्हाट्सएप ग्रुप और एप से बनाया भरोसा
ठगों ने व्यापारी को निवेश से जुड़े व्हाट्सएप ग्रुप में शामिल कर पेशेवर माहौल तैयार किया। ग्रुप में निवेश सलाह, मुनाफे के दावे और गतिविधियां साझा की जाती रहीं ताकि यह वास्तविक ट्रेडिंग प्लेटफार्म लगे। इसके बाद व्यापारी को मोबाइल एप डाउनलोड कराया गया और लागिन की प्रक्रिया पूरी कराई गई। एप में लगातार बढ़ती रकम दिखती रही, जिससे व्यापारी को लगा कि उसका पैसा सुरक्षित है। इसी दौरान निवेश बढ़ाने के लिए अलग-अलग कारण बताए गए। कभी बैलेंस कम बताया गया तो कभी ज्यादा लाभ पाने का लालच दिया गया। पुलिस का कहना है कि नकली ट्रेडिंग एप और फर्जी निवेश प्लेटफार्म के जरिए ठगी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। निवेश से पहले प्लेटफार्म की प्रमाणिकता जांचना जरूरी है।
कई नंबर और खातों से ली गई रकम
जांच में सामने आया कि ठगी को अंजाम देने के लिए आरोपित ने कई व्हाट्सएप नंबर और बैंक खातों का इस्तेमाल किया। अलग-अलग समय पर अलग खाते देकर रकम जमा कराई गई ताकि निवेशक को संदेह न हो। व्यापारी को बताया गया कि यह सामान्य ट्रेडिंग प्रक्रिया है और अलग-अलग खाते कंपनी के संचालन से जुड़े हैं। इसी तरीके से कुल 14.67 लाख रुपये जमा करा लिए गए। पुलिस अब खातों की जानकारी, ट्रांजेक्शन रिकार्ड और मोबाइल नंबरों के जरिए आरोपित तक पहुंचने की कोशिश कर रही है। साइबर अपराधों में इस तरह कई खातों का उपयोग कर पैसों का ट्रैक छिपाया जाता है। विशेषज्ञ लोगों को अनजान खातों में रकम भेजने से बचने की सलाह दे रहे हैं।
रकम निकालने पहुंचे तो खुली ठगी की परत
रकम निवेश करने के बाद जब व्यापारी ने पैसे निकालने की कोशिश की तब ठगी का असली तरीका सामने आया। ठगों ने दावा किया कि उसके निवेश पर करीब 25 लाख रुपये से ज्यादा का लाभ हो चुका है, लेकिन रकम पाने के लिए पहले 24.85 लाख रुपये और जमा करने होंगे। साथ ही चेतावनी दी गई कि अतिरिक्त राशि नहीं देने पर पहले का निवेश और मुनाफा दोनों फंस जाएंगे। इसी दबाव के कारण व्यापारी को संदेह हुआ। जानकारी लेने पर उसे पता चला कि उसके साथ साइबर ठगी हुई है। इसके बाद उसने 1930 हेल्पलाइन पर शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने लोगों से कहा है कि निवेश में मुनाफा दिखाकर अतिरिक्त राशि मांगने वाले किसी भी प्लेटफार्म से सतर्क रहें।