नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: तारबाहर इंदिरा गांधी चौक पर ट्रैफिक सिग्नल व्यवस्था वाहन चालकों के लिए रोज नई परेशानी खड़ी कर रही है। दिन में कई बार ऐसा हो रहा है कि करीब 30 सेकंड इंतजार के बाद ग्रीन मिलते ही दो से पांच सेकंड में सिग्नल फिर येलो या रेड हो जाता है। सड़क की हालत खराब है, जेब्रा क्रासिंग की मार्किंग मिट चुकी है और नियमविरुद्ध खंबे भी परेशानी बढ़ा रहे हैं। छत्तीसगढ़ में 12 अगस्त से त्योहारी सीजन प्रारंभ हो रहा है, आमजन की कमाई जुर्माना पटाने में निकल रही है।
चौराहे पर सबसे बड़ा सवाल सिग्नल की टाइमिंग को लेकर है। वाहन चालक बताते हैं कि रेड लाइट पर निर्धारित समय तक इंतजार करने के बाद जैसे ही ग्रीन होती है, आगे बढ़ने के लिए महज कुछ सेकेंड मिलते हैं। दो-चार सेकेंड का अंतर हुआ नहीं कि मोबाइल पर चालान पहुंच जाता है। लोगों का कहना है कि जब सिग्नल ही सही तरीके से काम नहीं कर रहा तो उसकी गलती का खामियाजा वाहन चालक क्यों भुगते?
नईदुनिया ने जब ऐसे लोगों से बात की तो उन्होंने बताया कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति ऐसी है कि महीने में मुश्किल से दो हजार रुपये तक की आमदनी होती है, लेकिन चालान की राशि में उनकी कमाई का बड़ा हिस्सा चला जाता है। कुछ महिलाओं ने बताया कि उन्होंने महतारी वंदन का पैसा तक चालान पटाने में चला गया ।
लोगों में नाराजगी इस बात की भी है कि शिकायत करने से डरते हैं। उनका कहना है कि पुलिस दोबारा उनकी गाड़ी को टारगेट कर सकती है और नंबर ट्रेस कर लगातार चालान भेज सकती है। इसी डर से कई लोग शिकायत नहीं करते। दूसरी ओर जनप्रतिनिधियों पर भी लोगों का गुस्सा है। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि एसी की हवा खा रहे हैं, उन्हें जनता की परेशानी से कोई लेना-देना नहीं है।
यह भी पढ़ें- एनएच-45 बना जानलेवा जंजाल! 600 करोड़ की सड़क का बेस कमजोर, 40 किमी मार्ग धंसा, उग्र हुए ग्रामीण
ये हैं असल जिम्मेदार
तीन विभाग, एक चौराहा और जवाबदेही गायब। सिग्नल की टाइमिंग और यातायात संचालन की निगरानी में यातायात विभाग की भूमिका है। सड़क, संरचना और उससे जुड़े रखरखाव के लिए लोक निर्माण विभाग जिम्मेदार हो सकता है। वहीं शहर की सड़कों, फुटपाथ और स्थानीय यातायात ढांचे से जुड़े हिस्सों में नगर निगम की जिम्मेदारी बनती है। प्रमुख रूप से यातायात विभाग सबसे पहले जिम्मेदार है।\
हो सकता है समाधान?
सिग्नल का टाइमिंग सिस्टम तत्काल तकनीकी टीम से जांचा जाए। हर दिशा में ट्रैफिक दबाव के अनुसार ग्रीन टाइम निर्धारित हो और टाइमर वाहन चालकों को स्पष्ट दिखाई दे। कैमरा चालान से पहले सिग्नल सिस्टम की तकनीकी खराबी की जांच हो। सड़क की मरम्मत, जेब्रा क्रासिंग की दोबारा मार्किंग, पैदल यात्रियों के संकेत और सुरक्षित साइन बोर्ड लगाए जाएं। हेल्पलाइन नंबर भी सार्वजनिक किया जाए। -
सिग्नल पर क्या नहीं होना चाहिए?
तारबाहर चौक में ट्रैफिक सिग्नल के आसपास ऐसे लोहे के खंभे, बोर्ड या संरचनाएं हैं, जो वाहन चालक या पैदल यात्री की दृश्यता बाधित करते हैं सिग्नल को ढकने वाले पेड़, विज्ञापन या अन्य अवरोध भी नहीं होने चाहिए। स्टाप लाइन और जेब्रा क्रासिंग स्पष्ट नहीं है, मिट चुका है। टूटे संकेतक और भ्रम पैदा करने वाली मार्किंग हैं। सिग्नल की टाइमिंग भी अचानक बदलना नहीं चाहिए। यह बड़ी समस्या है।
जुर्माने का इतना प्रावधान
क्र. यातायात उल्लंघन मोटर व्हीकल एक्ट जुर्माना/दंड रुपये
- 1 रेड लाइट/सिग्नल क्रास करना धारा 184 2,000 से 5,000
- 2 बिना हेलमेट दोपहिया चलाना धारा 194D 500
- 3 बाइक पर तीन सवारी धारा 194C 500
- 4 सीट बेल्ट नहीं लगाना धारा 194B 500
- 5 ड्राइविंग लाइसेंस के बिना वाहन चलाना धारा 181 1000 से 5,000
- 6 वाहन चलाते समय मोबाइल का इस्तेमाल धारा 184 500 से 900
- 7 शराब पीकर वाहन चलाना धारा 185 10,000 से 20,000
- 8 बिना बीमा वाहन चलाना धारा 196 2,000
- 9 बिना रजिस्ट्रेशन वाहन चलाना धारा 192 2,000
- 10 खतरनाक तरीके से वाहन चलाना धारा 184 2,000 से 5,000
वर्जन
तकनीकी समस्या पर जांच कराता हूं तारबाहर चौक में ट्रैफिक सिग्नल के अचानक ग्रीन से रेड होने या बदल जाने को लेकर जानकारी नहीं है। कल ही जांच कराता हूं। सिग्नल पर जो भी दिक्कतें होंगी उन्हें दूर किया जाएगा। सिग्नल आमजन की सुविधा और सुरक्षा के लिए है।
-रामगोपाल करियारे एएसपी, यातायात पुलिस बिलासपुर