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सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद...मेडिकल छात्रों से लिए जाने वाले बांड की राशि पर हाई कोर्ट ने एनएमसी से मांगा जवाब

छत्तीसगढ़ के मेडिकल, डेंटल और फिजियोथेरेपी स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले छात्रों से ली जाने वाली अनिवार्य बांड राशि की वैधता को लेकर बिलासपु...और पढ़ें

By Kamlesh RajakEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sat, 26 Sep 2026 12:08:19 AM (IST)Updated Date: Sat, 26 Sep 2026 12:08:19 AM (IST)
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद...मेडिकल छात्रों से लिए जाने वाले बांड की राशि पर हाई कोर्ट ने एनएमसी से मांगा जवाब

HighLights

  1. मेडिकल बांड की राशि पर हाई कोर्ट ने NMC से मांगा जवाब।
  2. प्रवेश नियम 2025 के तहत बांड प्रक्रिया की होगी जांच।
  3. सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले के तहत याचिका दाखिल।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: छत्तीसगढ़ में मेडिकल, डेंटल और फिजियोथेरेपी स्नातक पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों से अनिवार्य बांड के तहत तय राशि को लेकर हाई कोर्ट ने राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है।

मुख्य न्यायाधीश कृष्न राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणियों के प्रकाश में छत्तीसगढ़ मेडिकल, डेंटल एंड फिजियोथेरेपी अंडरग्रेजुएट एडमिशन रूल्स, 2025 की धारा 10(ii) और 10(iii) के तहत बांड राशि तय करने की निर्णय प्रक्रिया की तर्कसंगतता की जांच करना जरूरी है। एनएमसी को इस संबंध में उठाए गए कदमों पर जवाब देने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।

यह मामला अर्पिता वर्मा एवं अन्य विरुद्ध छत्तीसगढ़ शासन एवं अन्य से जुड़ा है। 24 सितंबर को सुनवाई में याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता राजीव श्रीवास्तव के साथ अधिवक्ता सजल कुमार गुप्ता और काजल चंद्रा उपस्थित हुए। राज्य की ओर से उप शासकीय अधिवक्ता अनुजा शर्मा तथा एनएमसी की ओर से अधिवक्ता अनिरुद्ध श्रीवास्तव उपस्थित थे।


याचिकाकर्ताओं ने एसोसिएशन आफ मेडिकल सुपरस्पेशियलिटी एस्पिरेंट्स एंड रेजिडेंट्स बनाम यूनियन आफ इंडिया मामले में सुप्रीम कोर्ट के 2019 के फैसले का हवाला दिया। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सरकारी चिकित्सा संस्थानों से प्रशिक्षित डाक्टरों के लिए अनिवार्य सेवा और बांड की व्यवस्था अनुचित नहीं है, लेकिन सेवा अवधि और बांड की राशि तर्कसंगत होनी चाहिए। हाई कोर्ट ने एनएमसी से बांड राशि तय करने की प्रक्रिया की न्यायिक समीक्षा की आवश्यकता बताई है और मामले को दो सप्ताह बाद सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया है।