• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
naidunia animated logo
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • स्‍वतंत्रता दिवस
  • सावन माह
  • मानसून
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • बिलासपुर

बिलासपुर में नागपंचमी पर उमड़ी भीड़, शिवालयों में कालसर्प दोष निवारण पूजा, अखाड़ों में उतरे पहलवान

बिलासपुर में नागपंचमी का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है। शहर के शिवालयों में नाग पूजा, दुग्धाभिषेक और कालसर्प दोष निवारण के अनुष्ठान हो रहे हैं।

By Dhirendra Kumar SinhaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Mon, 17 Aug 2026 08:05:47 AM (IST)Updated Date: Mon, 17 Aug 2026 08:05:47 AM (IST)
बिलासपुर में नागपंचमी पर उमड़ी भीड़, शिवालयों में कालसर्प दोष निवारण पूजा, अखाड़ों में उतरे पहलवान
कालजयी मंदिर में दर्शन करने पहुंचे भक्त।

HighLights

  1. नागदेवता के जयकारों से गूंजा बिलासपुर! मंदिरों में जलाभिषेक, शास्त्री मैदान में कुश्ती का ऐतिहासिक खेल
  2. नागपंचमी पर न्यायधानी सराबोर! व्यंकटेश मंदिर में झूमेंगे भगवान, शास्त्री स्कूल में जमकेगा पहलवानों का दांव
  3. बिलासपुर में नागपंचमी का उत्साह! शिवालयों में पूजा-अर्चना के संग अखाड़े में दिखेगा कुश्ती का रोमांच

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुरः नागपंचमी का पर्व सोमवार 17 अगस्त को न्यायधानी में धार्मिक आस्था और पारंपरिक उत्साह के साथ मनाया जाएगा। सुबह से शिवालयों और धार्मिक स्थलों पर भक्तों की भीड़ उमड़ेगी। नाग देवता का अभिषेक, विशेष पूजा-अर्चना और कालसर्प दोष निवारण के अनुष्ठान होंगे।

भक्त सुख-समृद्धि, खुशहाली और परिवार की मंगलकामना करेंगे। सावन माह में पड़ने वाली नागपंचमी के कारण शहर के शिव मंदिरों में विशेष धार्मिक आयोजन होंगे। श्रद्धालु शिवलिंग पर दूध और फूल अर्पित करने के साथ नाग-नागिन की प्रतिमाएं चढ़ाएंगे।

विभिन्न मंदिरों में पूजन-अर्चन का दौर सुबह से शुरू होगा। व्यंकटेश मंदिर में इसी दिन से भगवान को झूला झुलाने की परंपरा भी प्रारंभ होगी। शाम छह बजे भगवान को झूले पर विराजमान कर भजन-कीर्तन किया जाएगा। इसके बाद खीर-पूरी का भोग लगाकर भगवान को लोरी सुनाने की परंपरा निभाई जाएगी। चौरसिया समाज के लिए नागपंचमी विशेष महत्व रखती है, क्योंकि नाग देवता को समाज के कुल देवता के रूप में पूजा जाता है।


इस अवसर पर दाल-बाटी और चूरमा जैसे विशेष पकवान तैयार कर वितरण किया जाएगा। वहीं न्यायधानी में एक दिन पहले से ही पर्व का उत्साह दिखाई देने लगा है। इंटरनेट मीडिया के अलग-अलग प्लेटफार्म पर लोग नागदेवता की आकर्षक तस्वीरों के साथ मित्रों और रिश्तेदारों को शुभकामना संदेश भेज रहे हैं। नागपंचमी के अवसर पर पारंपरिक खेलों का भी आयोजन होगा। लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में कुश्ती प्रतियोगिता आयोजित की जाएगी, जहां पहलवान धोबी पछाड़, कला जंघ, बनारसी कला जंघ, चिरागदान, मोरपंख, सालतू, डबल टांग, एक लंगा, निकाल, उखाड़ और लंगड़ी ढेकली जैसे दांव-पेंच आजमाकर जीत के लिए अपना दमखम दिखाएंगे।

कालसर्प दोष निवारण और पितरों के निमित्त अनुष्ठान

नागपंचमी के अवसर पर धार्मिक मान्यताओं के अनुसार कालसर्प दोष निवारण के लिए विशेष पूजा-अर्चना की जाएगी। श्रद्धालु अपने पितरों के निमित्त तर्पण कर उनकी शांति और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करेंगे। धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर भक्त विभिन्न अनुष्ठानों में शामिल होंगे। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से नाग देवता का पूजन करने से जीवन में आने वाली बाधाओं से मुक्ति और सकारात्मक ऊर्जा की प्राप्ति होती है।

व्यंकटेश मंदिर में झूला, भजन और लोरी

नागपंचमी से व्यंकटेश मंदिर में भगवान को झूला झुलाने की विशेष परंपरा शुरू होगी। शाम छह बजे भगवान को झूले पर विराजमान किया जाएगा। इसके बाद मंदिर परिसर में भजन-कीर्तन का आयोजन होगा और श्रद्धालु भक्तिमय वातावरण में शामिल होंगे। धार्मिक कार्यक्रम के बाद भगवान को खीर-पूरी का भोग लगाया जाएगा। परंपरा के अनुसार भगवान को लोरी सुनाकर विश्राम कराया जाएगा, जिसे देखने बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचेंगे।

अखाड़े में दिखेंगे धोबी पछाड़ से लंगड़ी ढेकली

नागपंचमी पर लाल बहादुर शास्त्री स्कूल मैदान में होने वाली कुश्ती प्रतियोगिता पारंपरिक खेल प्रेमियों के लिए खास आकर्षण रहेगी। पहलवान जीत के लिए धोबी पछाड़, कला जंघ, बनारसी कला जंघ, चिरागदान और मोरपंख जैसे दांव आजमाएंगे। इसके अलावा सालतू, डबल टांग, एक लंगा, निकाल, उखाड़ और लंगड़ी ढेकली जैसे पारंपरिक दांव-पेंचों का भी प्रदर्शन होगा। मुकाबलों में पहलवान अपनी ताकत, फुर्ती और तकनीक का दम दिखाएंगे।