
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। छत्तीसगढ़ के अभयारण्यों और आरक्षित वन क्षेत्रों में पकड़े जा रहे तेंदुओं को रेडियो कालर लगाने, दूसरे सुरक्षित वन क्षेत्र में स्थानांतरित करने और उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त भोजन उपलब्ध कराने के मामले में हाई कोर्ट ने वन विभाग से विस्तृत जानकारी मांगी है। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति कृष्ण राम महापात्र और न्यायमूर्ति संतोष शर्मा की युगलपीठ ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को तीन सप्ताह के भीतर शपथपत्र पेश करने का निर्देश दिया है।
नितिन सिंघवी की जनहित याचिका पर पांच नवंबर को सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता सूर्या कवलकर डांगी ने वन विभाग के रवैये पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि विभाग पकड़े गए तेंदुओं को रेडियो कॉलर लगाने, उन्हें निर्धारित नीति के अनुसार दूसरे स्थान पर छोड़ने और उनके प्राकृतिक आवास में पर्याप्त भोजन की व्यवस्था करने के प्रति उदासीन है।
उन्होंने अदालत का ध्यान इस ओर भी दिलाया कि वन विभाग के अधिकारियों की ओर से अलग-अलग समय पर पेश किए गए शपथपत्रों में पकड़े गए तेंदुओं को रेडियो कालर लगाने और उनके स्थानांतरण की नीति का पालन किए जाने की स्पष्ट जानकारी नहीं है। तेंदुओं को लंबे समय तक कैद में रखने को लेकर भी चिंता जताई गई।
राज्य शासन की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता प्रवीण दास ने बताया कि इस दिशा में कदम उठाए गए हैं, लेकिन उनके पास पकड़े गए तेंदुओं को रेडियो कालर लगाने, राज्य में उनके स्थानांतरण और प्राकृतिक आवास के आसपास पर्याप्त शिकार उपलब्ध कराने के संबंध में विस्तृत जानकारी नहीं है। पर्याप्त भोजन मिलने से तेंदुओं के आसपास के गांवों की ओर आने की आशंका कम हो सकती है।
अदालत ने प्रधान मुख्य वन संरक्षक को रेडियो कॉलर, तेंदुओं के स्थानांतरण, उनके प्राकृतिक आवास में भोजन की उपलब्धता और संबंधित व्यवस्थाओं का विस्तृत ब्योरा शपथपत्र में देने का निर्देश दिया है। शपथपत्र की प्रति याचिकाकर्ता के अधिवक्ता को भी उपलब्ध करानी होगी। मामले की अगली सुनवाई 11 जनवरी 2027 को होगी।
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