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सावधान: न लाइसेंस नंबर और न ही पैकिंग की तारीख; बिलासपुर स्टेशन पर बिक रही बिना नाम-पते की थाली

बिलासपुर जोनल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर 22 जून को शिवनाथ एक्सप्रेस के यात्रियों को बिना पहचान और खाद्य सुरक्षा मानकों के उल्लंघन वाली 150 रुपये...और पढ़ें

By Dhirendra Kumar SinhaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sat, 27 Jun 2026 04:32:16 PM (IST)Updated Date: Sat, 27 Jun 2026 04:32:16 PM (IST)
सावधान: न लाइसेंस नंबर और न ही पैकिंग की तारीख; बिलासपुर स्टेशन पर बिक रही बिना नाम-पते की थाली
बिलासपुर जोनल स्टेशन

HighLights

  1. शिकायत बाद भी प्लेटफार्म पर संदिग्ध भोजन की बिक्री
  2. बिना पहचान पैकिंग से यात्रियों की सेहत पर बड़ा खतरा
  3. रेलवे के कार्रवाई के दावों पर शिकायतकर्ता ने उठाए सवाल

बिलासपुर। जोनल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर यात्रियों को कथित रूप से बिना पहचान और खाद्य सुरक्षा मानकों के अनुरूप पैकिंग के भोजन बेचे जाने का मामला सामने आया है। शिवनाथ एक्सप्रेस में यात्रा कर रहे यात्रियों ने 22 जून को खरीदे गए भोजन से दुर्गंध आने की शिकायत की। मामले की सूचना दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक को दी गई, लेकिन शिकायतकर्ता ने बाद में कार्रवाई के दावों पर भी सवाल उठाए हैं।

जानकारी के अनुसार 22 जून को शिवनाथ एक्सप्रेस के कोच क्रमांक एस-7 में बर्थ क्रमांक 39 तथा आसपास की बर्थ क्रमांक 33 और 34 के यात्रियों ने बिलासपुर स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर तीन पर फूड स्टाल के हाकरों से डेढ़ सौ रुपये प्रति थाली के हिसाब से तीन सादा शाकाहारी भोजन खरीदे। आरोप है कि भोजन प्लास्टिक की थाली में बिना किसी निर्माता, सप्लायर या पैकिंग संबंधी जानकारी के बेचा गया।


यात्रियों का कहना है कि थाली खोलते ही सड़ी हुई दुर्गंध आने लगी तथा दाल, पूरी और सब्जी खराब स्थिति में थीं। भोजन को फूड प्वाइजनिंग का कारण बनने योग्य बताते हुए यात्रियों ने उसे डस्टबिन में फेंक दिया। घटना की सूचना तत्काल मोबाइल फोन पर दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे बिलासपुर मुख्यालय के मुख्य वाणिज्य प्रबंधक को दी गई। शिकायतकर्ता के अनुसार अधिकारी ने छापामार कार्रवाई का आश्वासन दिया और बाद में फोन पर लगभग 30 लोगों को पकड़े जाने की जानकारी भी दी।

हालांकि शिकायतकर्ता का दावा है कि मौके पर कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई और स्टेशन पर अनाधिकृत तरीके से भोजन की बिक्री पहले की तरह जारी है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि रेलवे प्लेटफार्मों पर खाद्य सुरक्षा नियमों की अनदेखी हो रही है तथा विरोध करने वाले यात्रियों के साथ दुर्व्यवहार और मारपीट की शिकायतें भी सामने आती रही हैं।

बिना नाम-पते की पैकिंग पर उठे गंभीर सवाल

यात्रियों का आरोप है कि जिस भोजन की बिक्री की गई, उसकी पैकिंग पर न निर्माता का नाम था, न लाइसेंस नंबर और न ही पैकिंग अथवा उपयोग की अंतिम तिथि दर्ज थी। वहीं भोजन बेचने वाले हाकरों के पास भी कोई पहचान पत्र दिखाई नहीं दिया। ऐसे में खाद्य सुरक्षा मानकों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

400 स्टेशनों का नेटवर्क, सीमित खानपान व्यवस्था

शिकायत में दावा किया गया है कि दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के बिलासपुर मुख्यालय के अंतर्गत लगभग 400 से अधिक स्टेशन आते हैं, जबकि इनमें से केवल 40 से 50 स्टेशनों पर ही भोजन बिक्री की नियमित व्यवस्था है। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया कि पूरी सप्लाई चेन में छत्तीसगढ़ का एक भी वेंडर कर्मचारी शामिल नहीं है।

कार्रवाई के दावे और जमीनी हकीकत पर सवाल

मुख्य वाणिज्य प्रबंधक ने शिकायतकर्ता को फोन पर लगभग 30 लोगों के विरुद्ध कार्रवाई की जानकारी दी। लेकिन शिकायतकर्ता नरेंद्र दत्त्तात्रेय तेलंग का कहना है कि मौके पर कोई वास्तविक कार्रवाई दिखाई नहीं दी और प्लेटफार्मों पर अनाधिकृत भोजन की बिक्री जारी है। अब यात्रियों की अपेक्षा है कि रेलवे प्रशासन और खाद्य विभाग संयुक्त रूप से नियमित जांच अभियान चलाकर स्थिति स्पष्ट करें। वहीं पूरे मामले पर रेलवे के सीनियर डीसीएम अनुराग कुमार सिंह का दो टूक कहना था कि रेलवे की ओर से नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।