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बिलासपुर पूर्व महापौर के कार्यकाल में हुए भूमि आवंटन की जांच शुरू; संपदा अधिकारी देवांगन पहले ही सस्पेंड

पूर्व महापौर रामशरण यादव मामले में कमिश्नर का कड़ा रुख, टीम गठित, व्यापार विहार जमीन घोटाले की भी खुलेगी फाइल कमिश्नर प्रकाश सर्वे ने गठित की 4 सदस्यी...और पढ़ें

By Atul VasingEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 09:54:50 AM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 09:54:50 AM (IST)
बिलासपुर पूर्व महापौर के कार्यकाल में हुए भूमि आवंटन की जांच शुरू; संपदा अधिकारी देवांगन पहले ही सस्पेंड
प्रतीकात्मक चित्र इंटरनेट से लिया गया

HighLights

  1. चार सदस्यीय टीम गठित, व्यापार विहार जमीन घोटाले की भी खुलेगी फाइल
  2. उच्च स्तरीय कमेटी को 7 दिनों में जांच रिपोर्ट सौंपने का अल्टीमेटम
  3. बिलासपुर नगर निगम के भ्रष्ट अधिकारियों में हड़कंप

बिलासपुर। नईदुनिया प्रतिनिधि। नगर निगम में प्रशासनिक हलचल तेज हो गई है। पूर्व महापौर रामशरण यादव और तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन से जुड़े बहुचर्चित मामले में निगम प्रशासन ने कड़ा रुख अख्तियार किया है। नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने पहले ही त्वरित कार्रवाई करते हुए तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन को निलंबित कर चुके है। इसके साथ ही, इस पूरे संवेदनशील मामले की निष्पक्ष और परत-दर-परत जांच के लिए कमिश्नर ने एक चार सदस्यीय उच्च स्तरीय जांच टीम का गठन किया है।

कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने जांच कमेटी को बेहद कड़े निर्देश जारी किए हैं। टीम को साफ तौर पर हिदायत दी गई है कि वे मामले से जुड़े सभी पहलुओं की बारीकी से जांच पड़ताल करें और ठीक सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत जांच रिपोर्ट कमिश्नर कार्यालय के समक्ष पेश करें। इस कार्रवाई के बाद से निगम के अधिकारी-कर्मचारियों में हड़कंप का माहौल है।


चार सदस्यीय इस विशेष टीम में दिनेश निर्मलकर संयुक्त संचालक, वित्त, राजकुमार मिश्रा चीफ इंजीनियर, अंकुर पांडेय वर्तमान संपदा अधिकारी और मनीष पात्रे राजस्व अधिकारी को जिम्मेदारी सौंपी गई है। यह टीम न केवल वित्तीय अनियमितताओं और दस्तावेजों की हेराफेरी की जांच करेगी, बल्कि तत्कालीन संपदा अधिकारी के कार्यकाल के दौरान लिए गए निर्णयों की वैधता को भी परखेगी।

यह है पूरा मामला

यह पूरा विवाद पूर्व महापौर रामशरण यादव के कार्यकाल और तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन के बीच हुए नियमों के कथित उल्लंघन और प्रशासनिक शक्तियों के दुरुपयोग से जुड़ा है। संपदा विभाग द्वारा आवंटन, एनओसी और सरकारी भूमि के प्रबंधन में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी की शिकायतें लगातार आला अधिकारियों तक पहुंच रही थीं। प्रारंभिक जांच में तत्कालीन संपदा अधिकारी राजेश देवांगन की भूमिका को संदिग्ध पाया गया, जिसके बाद शासन के निर्देशों के तहत यह दंडात्मक कार्रवाई की गई है। नगर निगम की छवि को दागदार करने वाले इस मामले में अब वित्तीय नुकसान और नियम विरुद्ध किए गए कार्यों का आकलन किया जा रहा है।

कमिश्नर का बड़ा बयान: व्यापार विहार जमीन मामले की भी खुलेगी फाइल

नगर निगम कमिश्नर प्रकाश कुमार सर्वे ने कड़ी चेतावनी देते हुए स्पष्ट किया है कि निगम प्रशासन किसी भी स्तर पर भ्रष्टाचार या अनियमितता को बर्दाश्त नहीं करेगा। उन्होंने जानकारी दी कि इस जांच के दायरे को बढ़ाते हुए बहुचर्चित व्यापार विहार जमीन मामले की बंद पड़ी फाइलों को भी दोबारा खुलवाया जाएगा। कमिश्नर ने कहा कि व्यापार विहार में सरकारी जमीन के आवंटन और उपयोग में जो भी गड़बड़ियां हुई हैं, उसकी पूरी जांच की जाएगी। जो भी दोषी पाया जाएगा, उस पर सख्त वैधानिक कार्रवाई होगी।

इन बिंदूओं पर होगी जांच

पूर्व महापौर के कार्यकाल के दौरान संपदा विभाग द्वारा किए गए जमीनों और दुकानों के आवंटन की फाइलों को खंगाला जाएगा। संयुक्त संचालक वित्त दिनेश निर्मलकर और चीफ इंजीनियर राजकुमार मिश्रा की अगुवाई वाली टीम को मात्र एक सप्ताह के भीतर गड़बड़ी का पूरा चिट्ठा और वित्तीय नुकसान की रिपोर्ट सौंपनी होगी। व्यापार विहार क्षेत्र में बेशकीमती जमीनों के व्यावसायिक उपयोग और नियमों को ताक पर रखकर दिए गए लाभ के सभी पहलुओं की नए सिरे से पड़ताल होगी।