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अनुसूचित जाति आयोग ने खुद ही मान लिया अपराध साबित, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रद की सिफारिश, खींची लक्ष्मण रेखा

छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति आयोग के अधिकार क्षेत्र पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है।

By Kamlesh RajakEdited By: manoj dubey
Publish Date: Fri, 11 Sep 2026 02:19:37 PM (IST)Updated Date: Fri, 11 Sep 2026 02:21:11 PM (IST)
अनुसूचित जाति आयोग ने खुद ही मान लिया अपराध साबित, छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने रद की सिफारिश, खींची लक्ष्मण रेखा

HighLights

  1. हाई कोर्ट ने आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर माना
  2. हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख किया
  3. पहले की जांच के दस्तावेज भी आयोग को दिए

कमलेश रजक‌,नईदुनिया बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने अनुसूचित जाति आयोग के अधिकार क्षेत्र पर महत्वपूर्ण निर्णय सुनाया है। कोर्ट ने कहा कि आयोग केवल शिकायत की जांच कर सकता है और तथ्यों के आधार पर संबंधित सरकार या प्राधिकरण को कार्रवाई की सिफारिश कर सकता है, लेकिन वह किसी व्यक्ति के खिलाफ आपराधिक अपराध सिद्ध होने का निष्कर्ष नहीं दे सकता।

यह अधिकार आपराधिक न्यायालय का है। जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने कोरबा के सहायक प्रोफेसर मृगेश कुमार यादव के खिलाफ आयोग द्वारा एफआईआर दर्ज कराने की सिफारिश को चुनौती देने वाली याचिका स्वीकार की।

हाई कोर्ट ने आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर माना

आयोग ने अपनी सिफारिश में एससी/एसटी अत्याचार निवारण अधिनियम की धारा 3(1) के तहत लगाए गए आरोप को प्रमाणित माना था, जिसे हाई कोर्ट ने आयोग के अधिकार क्षेत्र से बाहर माना। मृगेश कुमार शासकीय महाविद्यालय बरपाली में सहायक प्रोफेसर हैं।


याचिका के अनुसार, परीक्षा के दौरान दीपमाला को कथित रूप से नकल करते हुए मृगेश कुमार यादव और एक अन्य शिक्षिका खुशबू तिवारी ने पकड़ा था। इसके बाद दीपमाला ने मृगेश के खिलाफ राज्य अनुसूचित जाति आयोग, रायपुर में शिकायत की।

पहले की जांच के दस्तावेज भी आयोग को दिए

इसमें आरोप लगाया कि याचिकाकर्ता परीक्षा में नकल करने की बात को लेकर उसे दबाव में ले रहे थे और उसे परेशान कर रहे थे। आयोग ने 21 जनवरी 2020 को मृगेश को नोटिस जारी किया। मृगेश ने तीन फरवरी 2020 को विस्तृत जवाब प्रस्तुत किया और पहले की जांच के दस्तावेज भी आयोग को दिए।

इसके बावजूद आयोग ने 16 मार्च 2021 को मृगेश के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की सिफारिश की, जिसे हाई कोर्ट में चुनौती दी गई।

हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख किया

याचिकाकर्ता के अधिवक्ता ने दलील दी कि आयोग ने केवल एफआईआर की सिफारिश नहीं की, बल्कि आरोप को सिद्ध भी घोषित किया। आयोग की ओर से कहा गया कि उसने शिकायत की गंभीरता को देखते हुए यह सिफारिश की थी। हाई कोर्ट ने आयोग की शक्तियों की सीमा तय करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कई फैसलों का उल्लेख किया।

हाई कोर्ट ने यह कहा, आयोग को शिकायतों की जांच करने का अधिकार है, लेकिन वह पक्षकारों के अधिकारों का न्यायनिर्णयन नहीं कर सकता। हाई कोर्ट ने आयोग की 16 मार्च 2021 की विवादित सिफारिश को निरस्त करते हुए याचिका स्वीकार कर ली।

कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आयोग को शिकायत की जांच और तथ्यों के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश करने का अधिकार है, लेकिन वह आपराधिक दोषसिद्धि का निष्कर्ष नहीं दे सकता।

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