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जमीन सीमांकन रिपोर्ट दबाकर बैठे राजस्व अफसरों को झटका; छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट के जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने बिलासपुर तहसील क्षेत्र के सरकंडा निवासी सुधीर मिश्रा की याचिका पर सुनवाई करते हुए तहस...और पढ़ें

By Manoj Kumar TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Thu, 02 Jul 2026 10:07:24 AM (IST)Updated Date: Thu, 02 Jul 2026 10:07:24 AM (IST)
जमीन सीमांकन रिपोर्ट दबाकर बैठे राजस्व अफसरों को झटका; छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने दिए सख्त कार्रवाई के निर्देश

HighLights

  1. बिलासपुर तहसीलदार को हाईकोर्ट का अल्टीमेटम
  2. 15 दिनों में आवेदन कर्ता को दें सीमांकन रिपोर्ट
  3. आवेदन के बाद भी भटकता रहा पीड़ित

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। हाई कोर्ट ने बिलासपुर तहसील क्षेत्र में जमीन सीमांकन की रिपोर्ट को लेकर प्रशासनिक अमले को सख्त निर्देश दिए हैं। न्यायमूर्ति अमितेंद्र किशोर प्रसाद की एकलपीठ ने तहसीलदार को आदेश दिया है कि वे याचिकाकर्ता को संबंधित भूमि की सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराएं, ताकि पीड़ित पक्ष अपने कानूनी अधिकारों के लिए आगे कदम उठा सके।

मामला सरकंडा थाना क्षेत्र के लक्ष्मी निवास कालोनी का है। यहां रहने वाले 58 वर्षीय सुधीर मिश्रा ने हाई कोर्ट में एक याचिका दायर की थी, जिसमें राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग के सचिव, बिलासपुर कलेक्टर और तहसीलदार को पक्षकार बनाया गया था। याचिकाकर्ता के अनुसार, उनकी खसरा नंबर 158/6 स्थित 0.61 हेक्टेयर भूमि के सीमांकन के लिए 15 अप्रैल 2026 को एक टीम का गठन किया गया था, जिसने अपनी जांच पूरी कर रिपोर्ट संबंधित अधिकारियों को सौंप दी थी।


हालांकि, याचिकाकर्ता ने 10 अप्रैल 2026 को सीमांकन रिपोर्ट की प्रमाणित प्रति प्राप्त करने के लिए आवेदन किया था, लेकिन काफी समय बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट प्रदान नहीं की गई। अधिवक्ता अरविंद सिन्हा ने कोर्ट में दलील दी कि सरकारी अधिकारियों की लापरवाही के कारण उनके मुवक्किल को अपनी ही जमीन की रिपोर्ट के लिए भटकना पड़ रहा है।

कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद तहसीलदार को निर्देश दिया कि वे 15 दिनों के भीतर रिपोर्ट की प्रति याचिकाकर्ता को उपलब्ध कराएं। उच्च न्यायालय ने इस निर्देश के साथ रिट याचिका को निष्पादित कर दिया है।