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सर्पदंश मुआवजा घोटाला: जांच में ना हो चूक, आईजी खुद उतरे मैदान में, मौतों के फर्जी कारण बताकर लाखों हड़पे गए

जिले में प्राकृतिक आपदा राहत कोष (आरबीसी 6-4) से मुआवजा हड़पने के लिए सिम्स में पदस्थ दो पुलिसकर्मी, वकील और तहसील बाबुओं की मिलीभगत से बड़े फर्जीवाड़...और पढ़ें

By Digital DeskEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Wed, 22 Jul 2026 11:57:31 PM (IST)Updated Date: Thu, 23 Jul 2026 12:03:26 AM (IST)
सर्पदंश मुआवजा घोटाला: जांच में ना हो चूक, आईजी खुद उतरे मैदान में, मौतों के फर्जी कारण बताकर लाखों हड़पे गए
बिलासपुर का सर्पदंश मुआवजा घोटाला।

HighLights

  1. सर्पदंश घोटाला: कोर्ट में मजबूत रहे केस, आइजी कर रहे समीक्षा।
  2. आईजी रामगोपाल गर्ग ने ली उच्च स्तरीय बैठक, दिए कड़े निर्देश।
  3. साधारण मौत को सर्पदंश बताकर हड़पे, साक्ष्य मजबूत करने पर जोर।

नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। साधारण बीमारियों, अत्यधिक शराब सेवन व हादसों में हुई मौतों को कागजों में सर्पदंश या फिर जहरीले जीव जंतुओं का दंश दर्शाकर शासन से चार-चार लाख रुपये का मुआवजा हड़प, लिया। 431 मौतों और 17 करोड़ 24 लाख रुपये के इस बहुचर्चित घोटाले की पुलिस जांच जारी है।

कहीं कोई चूक ना हो, इसे ध्यान में रखते हुए बिलासपुर रेंज IG रामगोपाल गर्ग खुद मैदान में उतर गए हैं। मंगलवार को उन्होंने उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक ली। विवेचकों को पुख्ता साक्ष्य जुटाने के निर्देश दिए हैं, ताकि अदालत में किसी भी तकनीकी खामी का फायदा उठाकर आरोपित छूट न सकें।


जिले में प्राकृतिक आपदा राहत कोष (आरबीसी 6-4) से मुआवजा हड़पने के लिए सिम्स में पदस्थ दो पुलिसकर्मी, डाक्टर, वकील और तहसील बाबुओं की मिलीभगत से बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम दिया गया हैं।

गिरोह सिम्स अस्पताल में आने वाले शवों की जानकारी निकालकर स्वजन को मुआवजा दिलाने का लालच देता था। इसके बाद फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट, फर्जी मृत्यु प्रमाण पत्र और पुलिस-पटवारी की नकली सील लगाकर सामान्य मौतों को सर्पदंश में या फिर जहरीले जीव-जंतुओं के काटने से हुई मौत में बदल दिया जाता था।

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मामले में अब तक दर्ज 16 अपराधों की समीक्षा करते हुए आईजी रामगोपाल गर्ग ने केस डायरी व दस्तावेजों की बारीकी से जांच कर रहे है।

IG ने निर्देश दिया कि सिम्स की फर्जी पीएम रिपोर्ट, कूटचरित शासकीय सील, बैंक खातों के लेन-देन और डिजिटल डिवाइसों की एफएसएल रिपोर्ट चालान के साथ मजबूती से संलग्न की जाए।

सभी थानों के केस से जुडे दस्तावेज आइजी कार्यालय में खंगाले जा रहे हैं। आइजी ने पुलिस अफसरों को हिदायत दी हैं कि गिरोह के आरोपितों के खिलाफ ठोस गवाही व दस्तावेजी सबूत तैयार किए जाएं, जिससे अदालत में सजा सुनिश्चित हो सके।

केस डायरी व चालान की मजबूती पर जोर

बैठक में आइजी ने स्पष्ट कहा कि चालान पेश करते समय कानूनी पहलुओं का विशेष ध्यान रखा जाए। कूटचरित दस्तावेजों और वित्तीय लेन-देन की कड़ियों को इस तरह जोड़ा जाए कि बचाव पक्ष अदालत में कोई तकनीकी खामी न निकाल सके। विवेचकों को साक्ष्यों का गहराई से अध्ययन करने के निर्देश दिए गए हैं।

तहसीलदार और पटवारियों से पूछताछ टली

मुआवजा प्रकरणों की स्वीकृति में शामिल रहे संबंधित तहसीलदारों और पटवारियों से होने वाली पूछताछ फिलहाल टल गई है। मंगलवार को होने वाली पूछताछ टलने का कारण बैठक को भी माना जा रहा हैं, क्योंकि मंगलवार को राजस्व विभाग और पुलिस अधिकारियों की अलग अलग बैठक होने को भी इसकी वजह बताई जा रही है।

जेल में बंद आरोपितों की संलिप्तता की गहन जांच

मामले में अब तक गिरफ्तार किए गए आरोपितों की अलग-अलग प्रकरणों में भूमिका को खंगाला जा रहा है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपितों का और किसी मामले में संलिप्ता तो नहीं है क्योंकि सर्पदंश में मुआवजा राशि में से किसे कितना कमीशन पहुंचाया गया था।

सिम्स और तहसील दफ्तर के संदिग्धों पर नजर

फर्जीवाड़ा सिर्फ बाहर तक सीमित नहीं था, बल्कि सिम्स अस्पताल और तहसील कार्यालय के भीतर तक जड़ें जमा चुका था। पुलिस सिम्स के मर्चुरी स्टाफ और तहसील कार्यालय की मुआवजा शाखा में पदस्थ रहे कर्मचारियों की मिलीभगत की बारीकी से जांच कर रही है। साक्ष्य मिलते ही कई और कर्मचारियों पर गाज गिर सकती है।