
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर। अवैध शराब पकड़ने और आरोपियों को सजा दिलाने की जिम्मेदारी आबकारी विभाग की है, लेकिन हाल ही में सामने आए छह मामलों में विभाग अदालत में अपराध साबित नहीं कर सका। इन मामलों में कुल 10 आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया गया।
कहीं स्वतंत्र गवाहों ने जब्ती से इनकार किया तो कहीं विवेचक बार-बार बुलाए जाने के बावजूद गवाही देने नहीं पहुंचे। एक मामले में जब्त शराब के रखरखाव से संबंधित मालखाना पंजी भी पेश नहीं की गई। इन फैसलों ने विभाग की विवेचना और न्यायालयीन पैरवी पर सवाल खड़े किए हैं।
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छह मामलों में कहां-कहां कमजोर पड़ा अभियोजन
1- 3.5 लीटर महुआ शराब की जब्ती पर सवाल
ग्राम जलसो, थाना कोनी निवासी अजय वर्मा के मकान से 22 मई 2021 को सुबह 10.15 बजे संभागीय उड़नदस्ता टीम ने 3.5 बल्क लीटर हाथ भट्टी महुआ शराब जब्त करने का दावा किया था। सहायक जिला आबकारी अधिकारी राजेन्द्र नाथ तिवारी के नेतृत्व में हुई कार्रवाई के गवाह अजय सूर्यवंशी और विकास वर्मा जब्ती से मुकर गए। विवेचक तिवारी भी कई बार बुलाने पर गवाही देने नहीं पहुंचे। न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी कु. सिद्धी व्होरा ने धारा 34(1)(क) के मामले में आरोपी को दोषमुक्त कर दिया।
2- 14 पाव शराब की जब्ती गवाहों ने नकारी
ग्राम पथरी निवासी दिलीप भारती के घर से 31 जनवरी 2020 को आबकारी वृत्त बिलासपुर पश्चिम ने 180 एमएल के 14 पाव, कुल 2.52 बल्क लीटर देशी प्लेन शराब जब्त करने का दावा किया था। गवाह मनोज गोस्वामी और अजय भारती गोस्वामी ने हस्ताक्षर तो स्वीकार किए, लेकिन जब्ती से इनकार किया। विवेचक उपनिरीक्षक मुकेश पाण्डेय भी अदालत में उपस्थित नहीं हुए। धारा 34(1)(क) के इस मामले में कु. सिद्धी व्होरा की अदालत ने दिलीप को दोषमुक्त कर दिया।
3- 20 पाव शराब के मामले में विवेचक अनुपस्थित
टिकरापारा निवासी दीपक खटिक के घर से 16 अक्टूबर 2020 को सुबह सात बजे आबकारी वृत्त बिलासपुर पूर्व ने 180 एमएल के 20 पाव, कुल 3.600 बल्क लीटर देशी मसाला शराब जब्त करने का दावा किया था। उपनिरीक्षक धीरज कन्नौजिया को मुखबिर से सूचना मिली थी। गवाह प्रेम खटिक और दिलीप यादव ने जब्ती तथा मौके पर मौजूदगी से इनकार किया। विवेचक कन्नौजिया समन के बाद भी नहीं पहुंचे। अदालत ने धारा 34(1)(क) में दीपक को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त किया।
4- मालखाना पंजी नहीं पेश करना पड़ा भारी
ग्राम विद्याडीह निवासी राहू मरार से 24 जनवरी 2025 को आबकारी वृत्त मस्तूरी ने पांच लीटर के केरीकेन में चार बल्क लीटर महुआ शराब जब्त करने का दावा किया था। गवाह पुरुषोत्तम गंधर्व और सुनील मरार मुकर गए। विवेचक उपनिरीक्षक रमेश कुमार दुबे ने माना कि शराब के सुरक्षित रखरखाव का मालखाना पंजी पेश नहीं किया गया। अदालत ने आबकारी अधिनियम की धारा 57-क और भारतीय साक्ष्य अधिनियम की धारा 114(छ) के आधार पर प्रतिकूल उपधारणा लेते हुए राहू को दोषमुक्त कर दिया।
5- विदेशी मदिरा दुकान में मिलावट का आरोप विफल
गुरुनानक चौक, तोरवा की शासकीय विदेशी मदिरा दुकान में आठ अगस्त 2022 को उपनिरीक्षक कुमार अभिषेक ने जांच की थी। चार इम्पीरियल ब्लू व्हिस्की बोतलों के ढक्कन ढीले और मदिरा की डिग्री 25 यू.पी. के मानक से कम मिलने का दावा किया गया।
धारा 38(क), 39(ख) और 39(ग) के मामले में गवाह विकेश यादव और महेन्द्र तिवारी ने कार्रवाई का समर्थन नहीं किया और आरोपियों को पहचानने से भी इनकार किया। विवेचक भी गवाही देने नहीं पहुंचे। 27 अक्टूबर 2026 को कु. सिद्धि व्होरा की अदालत ने संजय तिवारी, पर्व बैठकर, कमल जायसवाल, यज्ञेश चतुर्वेदी और कोमल जायसवाल को दोषमुक्त कर दिया।
6- 15 लीटर शराब की जब्ती में प्रक्रियात्मक कमी
23 फरवरी 2021 को आबकारी वृत्त तखतपुर ने धन सिंह पाली के घर से 15 लीटर महुआ शराब जब्त करने का दावा किया था। गवाह जिजयाराम और कन्हैया लाल ने जब्ती का समर्थन नहीं किया। अदालत में मकान के स्वामित्व के दस्तावेज भी पेश नहीं हुए। धारा 57 और 57-क के तहत वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने तथा मालखाना अभिलेखों के रखरखाव से जुड़ी प्रक्रियात्मक कमियां भी सामने आईं। विशेष न्यायाधीश लवकेश प्रताप सिंह बघेल ने धन सिंह को संदेह का लाभ देकर दोषमुक्त कर दिया।
विभागीय जवाबदेही पर सवाल
छह मामलों में गवाहों का मुकरना, विवेचकों का अदालत में उपस्थित नहीं होना और मालखाना पंजी पेश नहीं किया जाना अभियोजन की कमजोरियों को उजागर करता है। उपलब्ध फैसलों के विवरण में लापरवाही के लिए किसी अधिकारी पर विभागीय कार्रवाई का उल्लेख नहीं है। जब्ती के बाद साक्ष्य सुरक्षित रखने, विवेचना पूरी करने और अदालत में गवाही देने की जिम्मेदारी निभाने में चूक करने वाले अधिकारियों अब तक जवाब नहीं मांगा गया है।
वर्जन
कोर्ट से आरोपितों के छूटने की जानकारी नहीं है। ऐसे मामलों में आमतौर पर अभियोजन से नोटिस संबंधित विवेचकों को दिया जाता है। मामलों की जानकारी लेने के बाद बरी होने के कारणों की समीक्षा कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
वीएस साव एबीडीओ, आबकारी विभाग