अरे वाह, दो डीएफओ ने खुद थामी आरा मशीन... मैदान में उतरकर कर्मचारियों को सिखाए सुरक्षित कटाई के गुर
बिलासपुर संभाग के खोडरी वन परिक्षेत्र अंतर्गत करगीखुर्द में आयोजित काष्ठ विदोहन प्रशिक्षण के दौरान मरवाही डीएफओ कुमार निशांत और मुंगेली डीएफओ तन्मय कौशिक ने खुद आरा मशीन चलाकर वृक्ष कटाई और लट्ठा निर्माण का व्यावहारिक प्रदर्शन किया।
Publish Date: Sun, 18 Oct 2026 10:59:14 PM (IST)Updated Date: Sun, 18 Oct 2026 10:59:14 PM (IST)
हाथ आरा मशीन का उपयोग कर कटाई की सही विधि की जानकारी देते मरवाही डीएफओ कुमार निशांत।HighLights
- खोडरी के करगीखुर्द में हुआ काष्ठ विदोहन प्रशिक्षण आयोजित।
- डीएफओ कुमार निशांत और तन्मय कौशिक ने चलाई मशीन।
- कर्मचारियों को वैज्ञानिक और सुरक्षित कटाई के गुर सिखाए।
नईदुनिया प्रतिनिधि, बिलासपुर: जिम्मेदारी केवल निर्देश देने से नहीं, बल्कि खुद मैदान में उतरकर उदाहरण पेश करने से साबित होती है। वन विभाग के काष्ठ विदोहन प्रशिक्षण में इसकी अनूठी मिसाल देखने को मिली, जब दो वरिष्ठ वन अधिकारियों ने खुद आरा मशीन संभाली और वृक्ष विदोहन से लेकर लट्ठा निर्माण तक की प्रक्रिया का प्रदर्शन किया।
अधिकारियों ने कर्मचारियों को संदेश दिया कि लकड़ी कटाई जैसे जोखिम भरे कार्यों में जल्दबाजी नहीं, बल्कि वैज्ञानिक तकनीक, सावधानी और सुरक्षा मानकों का पालन सबसे जरूरी है। शनिवार को खोडरी वन परिक्षेत्र के करगीखुर्द परिसर में वन विभाग के काष्ठ विदोहन वर्ष 2026-27 के अंतर्गत एक दिवसीय प्रशिक्षण एवं प्रदर्शन कार्यक्रम आयोजित किया गया।
इसमें मरवाही वनमंडल के डीएफओ कुमार निशांत और मुंगेली वनमंडल के डीएफओ तन्मय कौशिक ने स्वयं आरा मशीन चलाकर वृक्ष विदोहन और लट्ठा निर्माण की तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन किया। इस दौरान बिलासपुर के मुख्य वन संरक्षक मनोज पांडेय सहित मरवाही, बिलासपुर और मुंगेली वनमंडल के अधिकारी-कर्मचारी तथा स्थानीय ग्रामीण उपस्थित रहे।
करगीखुर्द में आयोजित यह प्रशिक्षण सुरक्षित एवं वैज्ञानिक काष्ठ विदोहन की दिशा में महत्वपूर्ण पहल रहा। इसका उद्देश्य वन विभाग के मैदानी अमले को तकनीकी रूप से दक्ष बनाना और कार्यस्थल पर सुरक्षा को प्राथमिकता देने की आदत विकसित करना है।
सुरक्षित कटाई और वैज्ञानिक तकनीक पर जोर
प्रशिक्षण का उद्देश्य कर्मचारियों को लकड़ी कटाई की तकनीक से परिचित कराने के साथ ही सुरक्षित कार्यप्रणाली के प्रति जागरूक करना भी था। वृक्षों की कटाई से लेकर लट्ठों के निर्माण तक प्रत्येक चरण में तकनीकी नियमों और सुरक्षा मानकों के पालन की जानकारी दी गई। अधिकारियों ने बताया कि मशीनों के इस्तेमाल के दौरान छोटी-सी लापरवाही भी गंभीर दुर्घटना का कारण बन सकती है। ऐसे में प्रशिक्षित तरीके से काम करना और सुरक्षा संबंधी सावधानियों को अपनाना अनिवार्य है।
कर्मचारियों का बढ़ाया आत्मविश्वास
कार्यक्रम की खास बात यह रही कि वरिष्ठ अधिकारियों ने केवल सैद्धांतिक जानकारी देने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्वयं आरा मशीन चलाकर तकनीक का प्रदर्शन किया। इससे कर्मचारियों को वास्तविक परिस्थितियों में काम करने की प्रक्रिया समझने का अवसर मिला। अधिकारियों की इस पहल ने व्यावहारिक प्रशिक्षण के महत्व को भी रेखांकित किया। संदेश स्पष्ट था कि प्रभावी नेतृत्व वही है, जो निर्देश देने के साथ अपने अनुभव और कार्यशैली से दूसरों को सीखने का अवसर भी दे।