धमतरी में सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में 15 सालों में एक लाख पेड़ों की हुई अवैध कटाई, 166 के खिलाफ केस दर्ज
ड्रोन सर्वे और हाई-रिजोल्यूशन फोटो के जरिए पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया गया, जिसमें खेत, कटे हुए पेड़ और ठूंठ तक को करीब 10 सेंटीमीटर तक जूम करके देख ...और पढ़ें
Publish Date: Tue, 28 Apr 2026 07:18:24 PM (IST)Updated Date: Tue, 28 Apr 2026 07:24:15 PM (IST)
धमतरी में सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्रHighLights
- वन विभाग के सेटेलाइट और ड्रोन से हुई है पूरी जानकारी।
- करीब 10 सेंटीमीटर तक जूम करके देखा जा सकता है।
- इससे हर कब्जाधारी की जमीन की पहचान कर ली गई है।
नईदुनिया प्रतिनिधि, धमतरी। सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र में सेटेलाइट इमेजरी और ड्रोन सर्वे से एक बड़ी जानकारी सामने आया है। जांच में पाया गया है कि रिजर्व क्षेत्र के कोर वन्यप्राणी क्षेत्र और महानदी के कैचमेंट इलाके में पिछले 15 सालों में करीब एक लाख पेड़ों की अवैध कटाई कर 106 हेक्टेयर जमीन पर अतिक्रमण कर लिया गया था। इस मामले में ग्राम जेतपुरी के 166 अतिक्रमणकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है।
वन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार वर्ष 2011 में 45 हेक्टेयर क्षेत्र में अतिक्रमण पाया गया था, जो अगले 10 वर्षों में बढ़कर 106 हेक्टेयर तक पहुंच गया। हैरानी की बात यह है कि सभी अतिक्रमणकारियों के पास राजस्व क्षेत्र में अपनी जमीन भी मौजूद है, इसके बावजूद वे वन भूमि पर कब्जा किया था।
सेटेलाइट और ड्रोन से इसकी सबूत मिल गई है। अवैध कटाई और अतिक्रमण की पुष्टि के लिए भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन से वर्ष 2006, 2008, 2010, 2012 और 2022 की कार्टाेसेट सैटेलाइट इमेजरी मंगाई गई। इन तस्वीरों में साफ दिखाई दे रहा है कि वन क्षेत्र में भारी मात्रा में कमी आई है।
ड्रोन सर्वे और हाई-रिजोल्यूशन फोटो के जरिए पूरे क्षेत्र का निरीक्षण किया गया, जिसमें खेत, कटे हुए पेड़ और ठूंठ तक को करीब 10 सेंटीमीटर तक जूम करके देखा जा सकता है। इससे हर कब्जाधारी की जमीन की पहचान कर ली गई है।
एक हेक्टेयर में 1000 से घटकर सिर्फ 25–50 पेड़ शेष
वन विभाग की जांच में सामने आया है कि पहले इस वन क्षेत्र में प्रति हेक्टेयर लगभग 1000 पेड़ थे, जो अब घटकर 25–50 पेड़ प्रति हेक्टेयर रह गए हैं। इससे स्पष्ट है कि अतिक्रमणकारियों ने खेती के लिए बड़े पैमाने पर जंगल साफ किया है। अतिक्रमण करने के लिए पेड़ों की अवैध कटाई करने वाले 166 आरोपितों के खिलाफ वन विभाग ने बेदखली नोटिस जारी करके कार्रवाई शुरू कर दिया है।
सात वर्ष तक की सजा
उल्लेखनीय है कि वन्यजीव संरक्षण और वन संपत्ति क्षति के मामलों में वन्यजीव संरक्षण अधिनियम के तहत आरोपितों को सात वर्ष तक की सजा और लोक संपत्ति क्षति अधिनियम में तीन वर्ष तक के कारावास का प्रविधान है। टाइगर रिजर्व की टीम पिछले तीन वर्षों में 850 हेक्टेयर से अधिक अतिक्रमण हटा चुकी है और 600 से ज्यादा शिकारी, तस्कर और अतिक्रमणकारियों को गिरफ्तार कर चुके हैं। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष लगभग शून्य होने की स्थिति में पहुंचा है।
पारिस्थितिकी पर पड़ा असर
- सीतानदी कोर क्षेत्र केवल महानदी का उद्गम स्थल ही नहीं है, बल्कि हाथी, तेंदुआ और बाघ जैसे वन्यजीवों का महत्वपूर्ण आवास भी है।
- बड़े पैमाने पर जंगल कटने से क्षेत्र की पारिस्थितिकी पर गंभीर प्रभाव पड़ा है।
- वन विभाग का कहना है कि अतिक्रमण हटाने के बाद यहां भू-जल संरक्षण संरचनाएं और बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाएगा ताकि जंगल को फिर से बहाल किया जा सके।
- सीतानदी टाइगर रिजर्व क्षेत्र के अधिकारी वरूण जैन ने वाट्सएप के माध्यम से कई फोटो व वन विभाग द्वारा जांच संबंधी फोटो वायरल कर अतिक्रमणकारियों द्वारा पेड़ों के अवैध कटाई की जानकारी दी है।