
नईदुनिया न्यूज, गरियाबंद। जिले के उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व में विकसित कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) आधारित 'हाथी अलर्ट एप' और तापीय (थर्मल) ड्रोन आधारित हाथी निगरानी प्रणाली को अमेरिका की प्रतिष्ठित तकनीकी (Tech) पत्रिका एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू में प्रमुखता से स्थान मिला है।
उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उपनिदेशक द्वारा विकसित इस एप ने मानव-हाथी संघर्ष कम करने में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है।
पत्रिका में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार भारत में हाथियों और इंसानों के बीच बढ़ते संघर्ष को रोकने के लिए विकसित आधुनिक तकनीकों में छत्तीसगढ़ का यह मॉडल सबसे प्रभावी उदाहरणों में शामिल है। घने जंगलों और दुर्गम क्षेत्रों में हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए वन विभाग तापीय सेंसर से लैस ड्रोन का उपयोग कर रहा है।
ये ड्रोन रात के अंधेरे में भी हाथियों की मौजूदगी का पता लगा लेते हैं। इसके बाद प्रशिक्षित ऑपरेटर हाथी अलर्ट एप पर जानकारी अपलोड करते हैं। एप तत्काल वन अमले और आसपास के गांवों के लोगों को लघु संदेश (एसएमएस), फोन काल और व्हाट्सएप के माध्यम से पांच से दस किलोमीटर के दायरे में चेतावनी भेज देता है। समय रहते सूचना मिलने से ग्रामीण सुरक्षित स्थानों पर पहुंच जाते हैं और वन अमला भी आवश्यक कार्रवाई कर लेता है।

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वन विभाग के अनुसार इस तकनीक से मानव-हाथी संघर्ष, जनहानि और फसल नुकसान की घटनाओं में कमी आई है। यही कारण है कि इस नवाचार को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी सराहना मिल रही है। एमआईटी टेक्नोलॉजी रिव्यू विश्व की अग्रणी तकनीकी पत्रिकाओं में शामिल है, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता, रोबोटिक्स, जलवायु परिवर्तन, साइबर सुरक्षा और उभरती तकनीकों पर शोधपरक सामग्री प्रकाशित करती है।
इस पत्रिका में छत्तीसगढ़ की वन संरक्षण पहल को स्थान मिलना राज्य के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है। वन विशेषज्ञों का मानना है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, तापीय ड्रोन और डिजिटल संचार प्रणाली का यह समन्वित मॉडल भविष्य में मानव-वन्यजीव सह-अस्तित्व को और मजबूत करेगा।