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Bastar Police: अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर कर दो करोड़ रुपये का गबन, तीन कांस्टेबल गिरफ्तार

बस्तर एसपी कार्यालय की वेतन शाखा में करोड़ों रुपये के गबन का बड़ा मामला सामने आया है। तीन आरक्षकों पर डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर पिछले तीन वर्ष...और पढ़ें

By Animesh PaulEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 12:15:35 PM (IST)Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 12:58:37 PM (IST)
Bastar Police: अधिकारी के डिजिटल हस्ताक्षर कर दो करोड़ रुपये का गबन, तीन कांस्टेबल गिरफ्तार
गिरिश राय, मुख्य आरोपित।-इंटरनेट मीडिया

HighLights

  1. वेतन देयकों में कूटरचना कर शासकीय राशि के गबन का आरोप सामने आया
  2. कैग ऑडिट में खुला राज, डिजिटल हस्ताक्षरों का दुरुपयोग कर बढ़ाए गए भत्ते
  3. बस्तर एसपी कार्यालय में दो करोड़ का वेतन घोटाला, तीन आरक्षक गिरफ्तार

नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। जिस पुलिस पर कानून की रक्षा और सरकारी धन की सुरक्षा का दायित्व होता है, उसी पुलिस अधीक्षक कार्यालय की वेतन शाखा में करोड़ों रुपये के गबन का मामला सामने आने से महकमे में हड़कंप मच गया है। बस्तर एसपी कार्यालय में पदस्थ तीन आरक्षकों पर आरोप है कि उन्होंने वेतन देयकों में कूटरचना कर पिछले तीन वर्षों में दो करोड़ रुपये से अधिक की शासकीय राशि का गबन किया। मामले का खुलासा नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की आडिट रिपोर्ट में दर्ज आपत्ति के बाद हुआ।

22 जून को आडिट आपत्ति सामने आने के बाद पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने तत्काल आंतरिक जांच के आदेश दिए। प्रारंभिक जांच में बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता की पुष्टि होने पर मंगलवार को तीनों आरक्षकों के विरुद्ध मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने आरोपित आरक्षक क्रमांक 450 गिरीश राय, आरक्षक क्रमांक 289 राजकुमार कतलम और डीएसएफ आरक्षक क्रमांक 4003 हेमंत मैथ्यू को गिरफ्तार कर न्यायालय से रिमांड पर लिया है।


साजिश के तहत की हेर-फेर

पुलिस के अनुसार तीनों आरोपितों ने आपराधिक षड्यंत्र के तहत वेतन देयकों में हेर-फेर की। आरोप है कि उन्होंने डीडीओ के डिजिटल हस्ताक्षर वाली पेन ड्राइव का दुरुपयोग करते हुए विभिन्न भत्तों की राशि बढ़ाई और अतिरिक्त भुगतान जारी कराया। इस आधार पर उनके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की विभिन्न धाराओं तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(सी) के तहत अपराध दर्ज किया गया है।

वेतन कई गुना बढ़ाया, फिर लिया अपना हिस्सा

प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि वेतन शाखा में बैठे आरोपितों ने करीब 250 पुलिसकर्मियों के वेतन देयकों में हेर-फेर की। सूत्रों के अनुसार जिन कर्मचारियों का वास्तविक वेतन 50 हजार रुपये था, उनके खाते में एक लाख से डेढ़ लाख रुपये तक का भुगतान कराया जाता था। इसके बाद अतिरिक्त राशि का हिस्सा आरोपितों तक पहुंचता था। इसी तरीके से पिछले तीन वर्षों में दो करोड़ रुपये से अधिक की शासकीय राशि का गबन किए जाने की आशंका है। पुलिस का कहना है कि यह आंकड़ा अभी प्रारंभिक जांच का है और विस्तृत जांच के बाद राशि और बढ़ सकती है।

कैग की आपत्ति बनी सबसे बड़ा सुराग

बताया जा रहा है कि यदि कैग की आडिट में वेतन भुगतान को लेकर आपत्ति दर्ज नहीं होती, तो यह अनियमितता लंबे समय तक दबे रहने की आशंका थी। आडिट रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुई विभागीय जांच में वेतन देयकों, डिजिटल हस्ताक्षर और भुगतान प्रक्रिया की पड़ताल की गई, जिसके बाद गबन का मामला सामने आया। पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि इस पूरे घटनाक्रम में और कोई कर्मचारी या अधिकारी शामिल था या नहीं तथा गबन की वास्तविक राशि कितनी है।

मास्टरमाइंड पर सबसे ज्यादा संदेह

जांच में आरक्षक गिरीश राय को पूरे कथित षड्यंत्र का प्रमुख सूत्रधार माना जा रहा है। पुलिस सूत्रों के अनुसार पिछले दो-तीन वर्षों में उसकी आर्थिक स्थिति में अचानक बड़ा बदलाव आया। उसने नई गाड़ियां खरीदीं, महंगे खर्च किए और शहर से बाहर कई यात्राएं भी कीं। जांच एजेंसियां अब उसकी संपत्ति, बैंक खातों और लेन-देन का ब्यौरा खंगाल रही हैं। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि कथित गबन की राशि किन-किन माध्यमों से खर्च या निवेश की गई।