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बस्तर की बगिया में मध्य अमेरिका का रस: ट्रीमैन संपत झा का सफल प्रयोग, उगाया लेमन ड्रॉप मैंगोस्टीन

बस्तर के प्रसिद्ध पर्यावरण प्रेमी संपत झा ने अपने उद्यान में मध्य अमेरिका के दुर्लभ फल लेमन ड्रॉप मैंगोस्टीन को सफलतापूर्वक उगाया है। गार्सिनिया इंटरम...और पढ़ें

By Vinod SinghEdited By: Paritosh Dubey
Publish Date: Sun, 06 Sep 2026 10:38:57 PM (IST)Updated Date: Sun, 06 Sep 2026 10:40:59 PM (IST)
बस्तर की बगिया में मध्य अमेरिका का रस: ट्रीमैन संपत झा का सफल प्रयोग, उगाया लेमन ड्रॉप मैंगोस्टीन
अपनी उपज दिखाते ट्रीमैन संपत झा। - नईदुनिया

HighLights

  1. बस्तर में उगाया गया दुर्लभ लेमन ड्रॉप मैंगोस्टीन
  2. ट्रीमैन संपत झा ने किया यह सफल प्रयोग
  3. विदेशी फल विविधता से समृद्ध हुआ बस्तर क्षेत्र

नईदुनिया प्रतिनिधि जगदलपुर। प्राकृतिक संपदा, घने वनों और समृद्ध जैव विविधता के लिए विश्व प्रसिद्ध बस्तर अब दुर्लभ विदेशी फलदार पौधों के सफल प्रयोगों के केंद्र के रूप में उभर रहा है। पर्यावरण प्रेमी और ट्रीमैन के नाम से विख्यात संपत झा ने अपने उद्यान में मध्य अमेरिका मूल के दुर्लभ उष्णकटिबंधीय फल 'गार्सिनिया इंटरमीडिया' (जिसे आमतौर पर लेमन ड्रॉप मैंगोस्टीन कहा जाता है) को सफलतापूर्वक उगाकर फल उत्पादन हासिल किया है।

गार्सिनिया इंटरमीडिया का प्राकृतिक विस्तार मुख्य रूप से मेक्सिको, ग्वाटेमाला, कोस्टा रिका, पनामा और कोलंबिया के उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में पाया जाता है। बस्तर की उपजाऊ माटी और अनुकूल जलवायु में इस पौधे का सफल विकास यह साबित करता है कि यह क्षेत्र फल विविधता और नए फलोद्यान प्रयोगों के लिए कितना उत्तम है। इससे पहले भी ट्रीमैन संपत झा बस्तर में विश्व प्रसिद्ध मियाज़ाकी आम का सफल उत्पादन कर कृषि जगत को चौंका चुके हैं।


पर्यावरण संरक्षण और फल विविधता को बढ़ावा देने की पहल

ट्रीमैन संपत झा के अनुसार, प्रकृति ने दुनिया भर में हजारों प्रकार के फलदार वृक्ष प्रदान किए हैं। इनका लाभ समाज को तभी मिल सकता है जब इन पर अध्ययन और प्रायोगिक परीक्षण किए जाएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसे प्रयोगों का उद्देश्य केवल विदेशी प्रजातियों को लाना नहीं है, बल्कि बस्तर की स्थानीय और देशी फल प्रजातियों के संवर्धन के साथ-साथ फल विविधता के प्रति जागरूकता बढ़ाना है।

आर्थिक संभावनाएं भी विकसित हुईं

बदलते पर्यावरण के दौर में फलदार पौधे न केवल पौष्टिक आहार का जरिया हैं, बल्कि ये हरियाली बढ़ाने, जैव विविधता को सुरक्षित रखने और नई पीढ़ी को प्रकृति से जोड़ने का काम करते हैं। बस्तर में घरेलू बाड़ियों, आश्रमों, विद्यालयों और खाली पड़ी भूमि पर उपयोगी फलदार पौधे लगाने से भविष्य में किसानों और युवाओं के लिए भी नई आर्थिक संभावनाएं विकसित हो सकती हैं। उन्होंने आम जनमानस से अपील की है कि पर्यावरण संतुलन और हरित आवरण बढ़ाने के लिए प्रत्येक परिवार अपने घर, खेत या उपलब्ध स्थान पर कम से कम एक फलदार पौधा अवश्य लगाए।