
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। आदिवासी बहुल बस्तर में मतांतरण का मुद्दा एक बार फिर हिंसक टकराव में बदल गया है। बस्तर थाना क्षेत्र के रेटावंड गांव में बाहरी परिवार द्वारा कथित धर्म प्रचार को लेकर ग्रामीणों का आक्रोश फूट पड़ा, जिससे दो पक्ष आमने-सामने आ गए और जमकर मारपीट हुई।
घटना के वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पुलिस हरकत में आई और मामला थाने तक पहुंच गया। जानकारी के अनुसार, ओडिशा के नवरंगपुर से चार वर्ष पहले आए पास्टर किशोर भत्रा का परिवार गांव में रह रहा था।
ग्रामीणों का आरोप है कि पास्टर ने टेंट लगाकर नियमित रूप से रविवार की प्रार्थना सभाएं शुरू कीं और झाड़-फूंक व प्रार्थना के जरिए बीमारी ठीक करने का दावा करते हुए करीब 8 से 10 परिवारों को अपने प्रभाव में लिया। इस गतिविधि को ग्रामीण मतांतरण से जोड़कर देख रहे हैं।
विवाद उस समय भड़का जब गांव में पारंपरिक ‘देव स्थापना’ की पूजा चल रही थी। इसी दौरान मतांतरित समूह द्वारा लाउडस्पीकर पर प्रार्थना शुरू करने से माहौल तनावपूर्ण हो गया। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तीखी बहस मारपीट में बदल गई।
घटना के बाद विशेष समुदाय के लोगों ने थाने में शिकायत दर्ज कराते हुए मारपीट, गाली-गलौज और धमकी देने के आरोप लगाए। दूसरी ओर, सरपंच भोलाराम बघेल समेत ग्रामीणों का कहना है कि बाहरी व्यक्ति गांव में रहकर जबरन धार्मिक गतिविधियां संचालित कर रहा है, जिससे सामाजिक संतुलन और पारंपरिक व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों ने पास्टर को गांव छोड़ने की मांग पर अड़े रहते हुए विरोध जताया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस ने दोनों पक्षों, जनप्रतिनिधियों और गांव के जिम्मेदार लोगों की बैठक बुलाई। बातचीत के बाद यह सहमति बनी कि पास्टर का परिवार बच्चों की वार्षिक परीक्षाएं समाप्त होने के बाद गांव खाली कर देगा।
बस्तर एसपी शलभ सिन्हा के अनुसार, गांव में फिलहाल पुलिस बल तैनात है और स्थिति नियंत्रण में है, हालांकि निगरानी जारी रखी जा रही है।
गहराता सामाजिक तनाव बस्तर के आदिवासी क्षेत्रों में पारंपरिक आस्था और मतांतरण के बीच टकराव अब लगातार उभरता संकट बनता जा रहा है। देवगुड़ी और स्थानीय देवी-देवताओं पर आधारित जनजातीय आस्था को ग्रामीण अपनी पहचान का मूल मानते हैं। ऐसे में बाहरी प्रभाव और धार्मिक परिवर्तन की घटनाएं सामाजिक तनाव को जन्म दे रही हैं।
रेटावंड की घटना इससे पहले नारायणपुर के एड़का और बस्तर जिले के भेजरीपदर जैसे गांवों में हुई झड़पों की कड़ी के रूप में देखी जा रही है। कई गांवों में अब बाहरी लोगों के प्रवेश, धार्मिक गतिविधियों और मतांतरित परिवारों के सामाजिक व्यवहार को लेकर अनौपचारिक नियम बनाए जा रहे हैं, जिससे सामाजिक विभाजन और गहरा हो रहा है।
हालिया जांचों में विदेशी फंडिंग के संदिग्ध नेटवर्क ने बस्तर में चल रहे मतांतरण विवाद को नई दिशा दी है। प्रवर्तन एजेंसियों की एक कार्रवाई में बेंगलुरु एयरपोर्ट पर बड़ी मात्रा में नकदी और कई डेबिट कार्ड बरामद किए गए। प्रारंभिक जांच में इनका संबंध अमेरिकी मिशनरी संगठन द टिमोथी इनिशिएटिव (टीटीआइ) से जुड़े नेटवर्क से जोड़ा गया है।
जांच एजेंसियों के अनुसार नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच लगभग 94 करोड़ रुपये संदिग्ध तरीके से भारत लाए जाने के संकेत मिले हैं। इनमें से करीब 6.5 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग के माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में उपयोग किए जाने की आशंका जताई गई है।
राशि का उपयोग कथित तौर पर धार्मिक गतिविधियों, प्रार्थना सभाओं और छोटे स्तर पर चर्च निर्माण के लिए किया गया। धन के ट्रांजेक्शन में मल्टीपल डेबिट कार्ड, एटीएम निकासी और थर्ड-पार्टी खातों के इस्तेमाल के संकेत मिले हैं, जिससे निगरानी एजेंसियों को संदेह हुआ।
हालांकि, एजेंसियों ने अभी अंतिम निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है और जांच जारी है। इन खुलासों ने बस्तर के ग्रामीण इलाकों में पहले से मौजूद अविश्वास को और गहरा किया है।