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बस्‍तर में भ्रष्टाचार का घुन: 45 हजार का वेतन, आरक्षक के खाते में पहुंचने लगे हर महीने 30 लाख

2023 के पहले वेतन का भुगतना आफलाइन होता था इसलिए जांच में भ्रष्टाचार की राशि और बढ़ सकती है। आरोपित वर्ष 2011 से एसपी कार्यालय में पदस्थ था। उसके पूरे...और पढ़ें

By Animesh PaulEdited By: Navodit Saktawat
Publish Date: Wed, 01 Jul 2026 11:02:28 PM (IST)Updated Date: Wed, 01 Jul 2026 11:05:26 PM (IST)
बस्‍तर में भ्रष्टाचार का घुन: 45 हजार का वेतन, आरक्षक के खाते में पहुंचने लगे हर महीने 30 लाख
बस्‍तर पुलिस विभाग में भ्रष्‍टाचार।

HighLights

  1. एसपी कार्यालय के गिरफ्तार आरक्षक के खाते में चार महीने में पहुंचे 1.20 करोड़
  2. वर्ष 2023 के बाद मुख्य आरोपित गिरीश राय के खाते में डले हैं 3.40 करोड़ रुपये
  3. बस्तर एसपी कार्यालय में 15 की भूमिका संदिग्ध, संख्या 60 पहुंचने की आशंका

नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। बस्तर पुलिस अधीक्षक कार्यालय के वेतन घोटाले में गिरफ्तार आरक्षक गिरीश राय के बैंक खाते में पिछले चार महीने में जिला कोषालय (ट्रेजरी) से 1.20 करोड़ रुपये जमा कराए गए। अचानक उसके वेतन खाते में प्रति माह 30 लाख रुपये पहुंच लगे।

इसी के बाद कैग की आडिट टीम के हस्तक्षेप किया जो वर्ष 2023 से चल रहे भ्रष्टाचार में तीन लोगों की गिरफ्तारी का कारण बना। प्राथमिक जांच में स्पष्ट हुआ है कि मुख्य आरोपित गिरीश के साथ एसपी कार्यालय के 15 अन्य की भी भूमिका संदिग्ध है और यह संख्या 60 तक पहुंच सकती है।


पुलिस के अनुसार वर्ष 2023 के बाद मुख्य आरोपित गिरीश राय के खाते में ट्रेजरी से 3.40 करोड़ रुपये आनलाइन व्यवस्था के तहत डले हैं। वह जिले के सभी पुलिसकर्मियों का वेतन सूची तैयार कर ट्रेजरी में भेजता था।

वर्ष 2023 या उससे पहले से चल रहे इस भ्रष्टाचार में पकड़े नहीं जाने से गिरीश का मनोबल बढ़ता गया और उसने फरवरी महीने से अपने खाते में वेतन के रूप में 30 लाख प्रतिमाह डलवाने शुरु कर दिए।

2023 के पहले वेतन का भुगतना आफलाइन होता था इसलिए जांच में भ्रष्टाचार की राशि और बढ़ सकती है। आरोपित वर्ष 2011 से एसपी कार्यालय में पदस्थ था। उसके पूरे कार्यकाल की भी जांच हो रही है।

गिरफ्तार किए गए दो अन्य आरोपितों राजकुमार कतलम और हेमंत मैथ्यू के वेतन खाते में कुछ लाखों में भ्रष्टाचार की राशि पहुंची है। पुलिस ने अभी इस संबंध में स्पष्ट नहीं किया है। असामान्य भुगतान पर नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की आडिट टीम ने हस्तक्षेप किया था।

बताया जा रहा है कि गबन की राशि का एक बड़ा हिस्सा उसने शेयर मार्केट में निवेश किया, जहां उसे भारी नुकसान हुआ। इसके अलावा लग्जरी गाड़ियों की खरीद, बाहरी यात्राओं और अन्य महंगे शौक पर भी बड़ी रकम खर्च की। पुलिस की टीम अब उसके बैंक खातों, निवेश और संपत्तियों का ब्यौरा खंगाल रही है।

कैग की टीम पिछले एक सप्ताह से एसपी कार्यालय में रिकार्ड की गहन जांच कर रही थी। जांच के दौरान लगभग 70 पृष्ठों की सूची तैयार की गई है, जिसमें करीब 350 पुलिसकर्मियों के वेतन भुगतान का विवरण शामिल है। इनमें से लगभग 15 कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है, जिनके खातों में असामान्य तरीके से बढ़ा हुआ वेतन और भत्ता डाला गया।

लंबे समय से वेतन शाखा में पदस्थ था आरक्षक

गिरीश को आरक्षक होने के बावजूद वर्ष 2011 से एसपी कार्यालय की वेतन शाखा में रखा गया था। उसकी लंबे समय तक एक ही स्थान पर पदस्थापना से विभागीय मिलीभगत की आशंका बढ़ गई है। कुछ माह पहले गिरीश ने जिला पुलिस समिति के बैंक खाते से करीब 70 लाख रुपये निकालने का प्रयास किया था, लेकिन सफल नहीं हो सका।