
अनिमेष पाल, नईदुनिया, जगदलपुर: दुनिया कुछ दिनों बाद वैलेंटाइन डे मनाएगी, लेकिन बस्तर के आत्मसमर्पित माओवादी जोड़ों के लिए अब हर दिन प्रेम का है। उनका प्रेम जंगल, बंदूक और भय के बीच पनपा और धीरे-धीरे हिंसा पर विजय होकर सामने आया। शनिवार को नारायणपुर में आयोजित सामूहिक विवाह समारोह में चार आत्मसमर्पित माओवादी जोड़े ने शादी की।
नारायणपुर में आयोजित सामूहिक विवाह कार्यक्रम में सुकलाल और कमला, अर्जुन और काजल उर्फ कोसी, मासो मंडावी और रीता, सनीराम और सुशीला उर्फ माटे सात जन्म की डोर में बंधे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, स्थानीय विधायक और मंत्री केदार कश्यप, मंत्री टंकराम वर्मा ने सभी को भावी जीवन की शुभकामनाएं दी। आईजी सुंदरराज पी., कलेक्टर नम्रता जैन, एसपी राबिनसन गुरिया समेत पुलिस और प्रशासनिक अमला इस शादी का साक्षी बना।
यह विवाह उस बदलाव की कहानी है, जहां मानवता और प्रेम ने हिंसा पर जीत दर्ज की। चार जोड़ियों के जीवन में अब सात जन्म की डोर में बंधकर नई शांति, सुरक्षा और भविष्य की राह खुल गई है और आने वाले वेलेंटाइन डे पर जब दुनिया प्रेम को गुलाबों और तारीखों तक सीमित करेगी, बस्तर के इन प्रेमियों के लिए यही प्रेम हर दिन का उत्सव होगा।
2006 में संगठन में शामिल हुए माओवादियों के डॉक्टर सुखलाल कहते हैं कि जंगल में सब कुछ केवल विचारधारा और डर के नाम पर चलता था, लेकिन प्रेम और परिवार की बात ने मेरी सोच बदल दी। यही वजह है कि अब हम सामान्य जीवन चुन पाए। उनकी पत्नी कमला ने कहा कि हमने साथ रहने का निर्णय लिया, और यही प्रेम ने हमें हिंसा छोड़कर मुख्यधारा की ओर कदम बढ़ाने की हिम्मत दी।
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19 वर्ष तक जंगल में रहे अर्जुन ने बताया कि काजल के साथ रहते-रहते यह सवाल बार-बार आता था कि क्या यही जीवन है? डर, भागना, छिपना। लेकिन प्रेम ने हमें सोचने और निर्णय लेने की ताकत दी।
मासो मंडावी और रीता अब लाइवलीहुड कॉलेज में प्रशिक्षण ले रहे हैं। मासो कहते हैं कि माओवाद में जीवन का कोई मूल्य नहीं था। प्रेम ने हमें यह दिखाया कि सामान्य जीवन, शांति और रोज़मर्रा की खुशियां असली जीवन हैं।
रीता कहती है कि, हिंसा और डर की दुनिया छोड़कर अब हम अपने भविष्य की कल्पना कर सकते हैं। यह सब प्रेम की वजह से संभव हुआ। सनीराम और सुशीला के लिए भी यही प्रेम शक्ति बनी। सुशीला कहती हैं, प्रेम ने ही हमें जंगल और अत्याचार से बाहर निकालने की हिम्मत दी।
सरकार हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले सभी लोगों का साथ देगी। पुनर्वास नीति में मुख्यधारा में लौट रहे माओवादियों के लिए सामान्य जीवन जीने के प्रविधान किए गए हैं।
-विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री, छग शासन