ओडिशा ने एनीकट को बताया कारण, छत्तीसगढ़ बोला- यह झूठा प्रपंच, खातीगुड़ा से छोड़े गए 10 टीएमसी पानी से डूबा बस्तर
इंद्रावती नदी में बाढ़ को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा में विवाद है। ओडिशा भालूगुड़ा एनीकट को, जबकि छत्तीसगढ़ ओडिशा के खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़ने को जिम्मेदार ठहरा रहा है।
Publish Date: Mon, 26 Oct 2026 10:25:06 AM (IST)Updated Date: Mon, 26 Oct 2026 10:25:06 AM (IST)
ओडिशा से छोड़े गए 10 टीएमसी पानी से बस्तर डूबा। (नईदुनिया)HighLights
- इंद्रावती नदी में बाढ़ पर दोनों राज्यों में विवाद।
- ओडिशा ने भालूगुड़ा एनीकट को तबाही का कारण बताया।
- छत्तीसगढ़ का तर्क- खातीगुड़ा बांध से छोड़ा गया पानी।
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर: पिछले माह सितंबर के अंतिम सप्ताह में इंद्रावती नदी में ओडिशा और बस्तर में आई अति बाढ़ की स्थिति को लेकर छत्तीसगढ़ और ओडिशा के बीच आरोप-प्रत्यारोप बढ़ गया है। छत्तीसगढ़ शासन ने 23 से 26 सितंबर केे बीच बस्तर और ओडिशा में अति बारिश के साथ ही ओडिशा के नवरंगपुर जिले में इंद्रावती नदी पर स्थित खातीगुड़ा बांध से (लगभग 10 टीएमसी) पानी छोड़ने के निर्णय को प्रमुख कारण बताया था।
दूसरी ओर ओडिशा ने अपने क्षेत्र में इंद्रावती-जोरा नाला संगम से नीचे छत्तीसगढ़ की सीमा तक (नगरनार के भेजापदर भालूगुड़ा तक) बाढ़ के लिए नगरनार के समीप इंद्रावती नदी पर स्थित डेढ़ मीटर उंचे भालूगुड़ा एनीकट को जिम्मेदार ठहरातेे हुए विरोध दर्ज कराया था।
ओडिशा के अधिकारियों के बदले सुर
- एक अक्टूबर को जल संसाधन विभाग ओडिशा की टीम भालूगुड़ा एनीकट के निरीक्षण के लिए आई थी। निरीक्षण दौरे पर बस्तर के विभागीय इंजीनियरों केे साथ चर्चा के बाद ओडिशा के अधिकारियों ने माना था कि डेढ़़ मीटर एनीकट खुद पानी में डूब जाता है तो बाढ़ कैसे लाएगा। लेकिन यहां से लौटते ही उनके सुर बदल गए और दोबारा अपने आराेपों पर अड़ गए अौर ओडिशा शासन को गलत रिपोर्ट भेेज दी गई।
- रविवार को दोबारा अपर काेलाब डिवीजन बारनीपुट के अतिरिक्त मुख्य अभियंता हेमंतोे दास के नेतृत्व में टीम ओडिशा से भालूगुड़ा एनीकट देखने पहुंंची थी। बस्तर से जल संसाधन विभाग के प्रभारी कार्यपालन यंत्री भरत सिंंह, सहायक यंत्री निर्मल पानीग्राही व नगरनार स्टील प्लांट के अधिशासी निदेशक प्रमोद कुमार सिंह संयुक्त निरीक्षण में शामिल थे। निरीक्षण में जल संसाधन विभाग और एनएमडीसी के अधिकारियों ने साफ तौर पर कहा कि डेढ़ मीटर उंचे एनीकट के कारण बाढ़ नहीं आ सकती यह ओडिशा का झूठा प्रपंच है।
हालांकि दोनों पक्षों ने तय किया कि आगामी 27-28 अक्टूबर काे बंगाल की खाड़ी में चक्रवाती तूफान के कारण अति बारिश की संभावना को देखतेे हुए दोनों राज्य बाढ़ आपदा प्रबंधन के लिए मिलकर काम करेंगें। सूचनाओं का आदान-प्रदान किया जाएगा। ओडिशा ने खातीगुड़ा बांध से पानी छोड़ने की स्थिति बनने पर पूर्व से समय पर सूचना देने पर सहमति व्यक्त की। खातीगुड़ा से 10 टीएमसी पानी छोड़ा था
दोनों राज्यों की बीच चर्चा में सामने आए तथ्यों के अनुसार सितंबर केे अंतिम सप्ताह में बस्तर इंद्रावती नदी का जलस्तर जगदलपुर में 12.390 मीटर तक पहुंच गया था। तब बाढ़ का 92 फीसद पानी ओडिशा से अाया था। यहां पुराने पुल से 23 से 26 सितंबर के बीच लगभग 40 टीएमसी पानी बहा था जिसमें 10 टीएमसी से अधिक पानी खातीगुड़ा बांध से छोड़ा गया था। जिसके कारण बस्तर में तबाही हुई थी।
वर्चुअल बैठक में उच्चस्तरीय समीक्षा
- नवरंगपुर ओडिशा की कलेक्टर अन्या दास ने 23 अक्टूबर को अपर इंद्रावती प्रोजेक्ट नवंगरपुर और अपर काेलाब डिजीवन बारनीपुट ओडिशा और इंद्रावती परियोजना मंडल जगदलपुर के अधिकारियाें की वर्चुअल बैठक लेकर स्थिति की समीक्षा के साथ विवाद पर चर्चा की थी। 25 अक्टूबर की शाम दोबारा वर्चुअल बैठक हुई जिसमें नवरंगपुर कलेक्टर के साथ बस्तर से मुख्य कार्यपालन अधिकारी जिला पंचायत तन्मय खन्ना और अधीक्षण यंत्री इंंद्रावती परियोजना मंडल वेदप्रकाश पांडे भी शामिल हुए।
- अधिकारियों ने साफ फिर दोहराया कि भालूगुड़ा एनीकट के कारण बाढ़ की स्थिति नहीं बनती है। हालांकि यह तय किया गया कि तूफान के असर से अगले दो-तीन दिन बारिश की संभावना को देखते हुए भालूगुड़ा एनीकट के सभी गेट खोलकर पानी निकाला जा रहा है। बताया गया कि ओडिशा ने भी खातीगुड़ा बांध के दो गेट खोलकर पानी छोड़ रहा है ताकि बारिश के बाद बाढ़ आपदा की स्थिति से बचा सके। बैठक में तय किया गया कि विवाद पर आगे चर्चा जारी रहेगी।
एनीकट के सभी गेट खोले गए
आगामी 27 एवं 28 अक्टूबर को संभावित चक्रवाती वर्षा और बाढ़ की आशंका के मद्देनजर छत्तीसगढ़ जल संसाधन विभाग ने अंतरराज्यीय सीमा पर स्थित भालूगुड़ा एनीकट के सभी 38 जलद्वार पूर्ण रूप से खोल दिए हैं। यह कदम ओडिशा जल संसाधन विभाग के आग्रह पर उठाया गया है। अधीक्षण यंत्री वेदप्रकाश पांडे ने बताया कि संभावित चक्रवाती आपदा को देखते हुए यह कदम एनएमडीसी (राष्ट्रीय खनिज विकास निगम) के समन्वय से उठया गया है।
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बस्तर में हाई अलर्ट
- चक्रवाती तूफान और मौसम विभाग द्वारा बस्तर संभाग में आरेंज अलर्ट जारी करने के बाद जिला प्रशासन सक्रिय हो गया है। कलेक्टर आकाश छिकारा ने 27 अक्टूबर से भारी बारिश की आशंका को देखते हुए सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रखा है। जिला और तहसील स्तर पर नियंत्रण कक्ष 24 घंटे सक्रिय कर दिए गए हैं।
- राजस्व, पुलिस, नगर निगम, स्वास्थ्य और विद्युत विभाग समन्वय के साथ तैनात रहेंगे। निचले और बाढ़ संभावित इलाकों की पहचान कर ली गई है। राज्य आपदा मोचन दल और होमगार्ड को बोट व उपकरणों के साथ तैयार रहने को कहा गया है।