
नईदुनिया प्रतिनिधि, जगदलपुर। संतान सुख दिलाने और पारिवारिक संकट दूर करने के नाम पर तंत्र-मंत्र, झाड़-फूंक और विशेष पूजा का झांसा देकर एक दंपती से करीब डेढ़ करोड़ रुपये की कथित ठगी का मामला महिला आयोग पहुंचा है। आयोग ने प्रथम दृष्टया मामले को गंभीर मानते हुए पुलिस अधीक्षक जगदलपुर को धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर जांच रिपोर्ट आयोग को भेजने के निर्देश दिए हैं। वहीं अपर कलेक्टर सीपी बघेल को आरोपितों की चल-अचल संपत्ति, उसके मूल्यांकन तथा संपत्ति खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच कर एक माह के भीतर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
दंपती इलाज करा रहा था
शिकायत के अनुसार, वर्ष 2008 में विवाह के बाद संतान नहीं होने पर दंपती इलाज करा रहा था। महिला पीसीओडी से पीड़ित थीं और गर्भपात के बाद मानसिक रूप से परेशान थीं। इसी दौरान उनकी मुलाकात वन विभाग में पदस्थ वन रक्षक डूमर राम नायक और उसकी पत्नी शिखा नायक से हुई। आरोप है कि दोनों ने विशेष पूजा, तंत्र-मंत्र और दुर्लभ धार्मिक सामग्री के माध्यम से संतान सुख दिलाने का दावा किया।
पीड़िता का आरोप है कि वर्ष 2015 से 2021 के बीच पूजा, ताबीज, ताम्रपत्र, जड़ी-बूटियों और अन्य अनुष्ठानों के नाम पर लगातार रकम ली गई। इस दौरान उन्होंने अपनी जमा पूंजी खर्च कर दी, एफडी तुड़वा दी और जमीन-जायदाद तक बेच दी। शिकायत में दावा किया गया है कि आरोपितों को कुल करीब डेढ़ करोड़ रुपये दिए गए।
जमीन के दस्तावेज भी अपने पास रख लिए
महिला ने आयोग को बताया कि इसी रकम से आरोपितों ने जमीन खरीदी, मकान बनवाया और उसकी एक जमीन के दस्तावेज भी अपने पास रख लिए। आरोप है कि पहले एक कार खरीदी गई, बाद में दूसरी नई कार भी ली गई तथा आड़ावाल के कुसुमपाल क्षेत्र में 40 से 50 लाख रुपये की लागत का मकान भी बनाया गया।
शिकायत में यह भी कहा गया है कि मुख्य आरोपित कांगेर घाटी क्षेत्र में वन रक्षक के पद पर कार्यरत है और उसका मासिक वेतन करीब 43 हजार रुपये है। ऐसे में उसकी आय की तुलना में करोड़ों रुपये की संपत्ति अर्जित करने की जांच की मांग की गई है।
आय से अधिक संपत्ति की भी होगी जांच
महिला आयोग की सुनवाई में आरोपित की आय, संपत्ति और खर्च को लेकर कई सवाल उठे। आयोग ने माना कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच जरूरी है। इसी के चलते अपर कलेक्टर को आरोपितों की पूरी संपत्ति, उसके मूल्यांकन और खरीद से जुड़े दस्तावेजों की जांच के निर्देश दिए हैं। वहीं पुलिस को धोखाधड़ी का अपराध दर्ज कर पूरे मामले की विवेचना करने तथा निर्धारित समय में जांच रिपोर्ट आयोग को उपलब्ध कराने के लिए कहा गया है।
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