• Jagran.com
  • Jagran Josh
  • Her Zindagi
  • Onlymyhealth
  • Jagran TV
  • Vishvas News
  • Inextlive
  • मेरी खबरें
मेरी खबरें
  • होम
  • ताजा खबरें
  • मध्यप्रदेश
  • छत्तीसगढ़
  • उत्तर प्रदेश
  • देश
  • धर्म
  • मनोरंजन
  • राशिफल
  • लाइफस्टाइल
  • अन्य
    • बिज़नेस
    • बड़ी खबरें
    • खेल
    • विदेश
    • करियर
    • टॉपिक्स
    • टेक्नोलॉजी
    • कोरोना वायरस
    • शिक्षा
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • राशिफल
  • राज्य चुनें
  • ई-पेपर
  • फटाफट
  • राशिफल
  • वेब स्टोरीज
नईदुनिया ट्रेंडिंग
  • बढ़ता यूपी
  • समृद्ध उत्तराखंड
  • गणेशोत्‍सव 2026
  • हनुमान अंश
  • मध्‍य प्रदेश की खबरें
  • राशि परिवर्तन
  • मानसून
  • वास्‍तु शास्‍त्र
  • स्वच्छ जल
  • होम
  • छत्तीसगढ़
  • जांजगीर चांपा

10वीं पास लोग बन बैठे बड़े डॉक्टर, छत्तीसगढ़ के मालखरौदा में बिना डिग्री के गली-गली चल रही क्लीनिकें

छत्तीसगढ़ के मालखरौदा विकासखंड क्षेत्र में बिना किसी मेडिकल डिग्री और लाइसेंस के धड़ल्ले से झोलाछाप डॉक्टरों की क्लीनिकें संचालित हो रही हैं। 10वीं-12...और पढ़ें

By Madan TiwariEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 25 Aug 2026 06:38:47 PM (IST)Updated Date: Tue, 25 Aug 2026 06:38:47 PM (IST)
10वीं पास लोग बन बैठे बड़े डॉक्टर, छत्तीसगढ़ के मालखरौदा में बिना डिग्री के गली-गली चल रही क्लीनिकें
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मालखरौदा

HighLights

  1. मालखरौदा क्षेत्र में झोलाछाप डॉक्टरों का आतंक।
  2. स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी का फायदा।
  3. स्वास्थ्य विभाग की चुप्पी के साए में फल-फूल रहे फर्जी डॉक्टर।

नईदुनिया प्रतिनिधि, जांजगीर-चांपा : एक तरफ शासन-प्रशासन गांव-गांव में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा का दावा कर रहा है, वहीं जमीनी हकीकत कुछ और ही है। मालखरौदा विकासखंड क्षेत्र में इन दिनों झोलाछाप डॉक्टरों की बाढ़ सी आ गई है। क्षेत्र में बिना किसी मेडिकल डिग्री और लाइसेंस के धड़ल्ले से क्लीनिक चल रहे हैं। सबसे बड़ी बात यह है कि स्वास्थ्य विभाग ने आज तक इनकी पड़ताल तक नहीं की है। विभाग की इस चुप्पी पर अब सवाल खड़े होने लगे हैं।

ग्रामीणों द्वारा बताया जा रहा है कि इनमें से अधिकांश संचालक 10वीं-12वीं पास हैं, जिन्होंने किसी बड़े अस्पताल में 2-3 साल कंपाउंडर का काम सीखा और खुद ही डॉक्टर बनकर क्लीनिक खोल लिया।

जानकारी के अनुसार क्षेत्र में दुकान के बाहर बड़े-बड़े अक्षरों में लिखा मिलते यहां सभी प्रकार के रोगों का सफल इलाज किया जाता है, अनुभवी डॉक्टर उपलब्ध, 24 घंटे सेवा ।अंदर न तो कोई डिग्री फ्रेम में लगी है, न ही पंजीयन प्रमाण पत्र। एक छोटी सी टेबल, एक बीपी मशीन, और 2-3 तरह के स्टेरायड वाले इंजेक्शन और एंटीबायोटिक - यही इनकी पूरी पूंजी है।


यह भी पढ़ें- जांजगीर डीईओ कार्यालय में बड़ा फर्जीवाड़ा, टीसी पर फर्जी हस्ताक्षर करने वाले दो कर्मचारी निलंबित

क्यों फल-फूल रहे झोलाछाप सरकारी सिस्टम की नाकामी

ग्रामीणों में चर्चा के अनुसार इसका सबसे बड़ा कारण है सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था की कमजोरी। मालखरौदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टरों की कमी, दवाइयों की किल्लत और रात में डॉक्टरों का न मिलना ग्रामीणों को इन झोलाछापों के पास जाने को मजबूर करता है।

रात-बिरात बुखार आने पर, पेट दर्द होने पर डाक्टर नदारद मिलने की बात सामने आ रही है जबकि झोलाछाप डाक्टर आधी रात को भी घर आकर बोतल चढ़ा देता है। 500-700 रुपये में तुरंत इलाज का लालच ग्रामीणों को फंसा रहा है।

इलाज के नाम पर जान से खिलवाड़, कई केस बिगड़े

इन झोलाछाप डाक्टरों के गलत इलाज से कई मरीजों की हालत बिगड़ने की भी चर्चाएं हैं। चर्चा के अनुसार, ये डाक्टर बिना जांच के ही टाइफाइड, मलेरिया, पीलिया का इलाज अपने हिसाब से कर देते हैं। एंटीबायोटिक का ओवरडोज, एक्सपायरी दवाइयां, एक ही सिरिंज का कई बार इस्तेमाल - जैसी गंभीर लापरवाही सामने आ रही है। सबसे ज्यादा खतरा गर्भवती महिलाओं और बच्चों को है। कई झोलाछाप क्लीनिकों में अवैध रूप से प्रसव तक कराए जाने की चर्चा है, जो मां और बच्चे दोनों की जान के लिए खतरा है।

विभाग की चुप्पी बनी रहस्य

सबसे बड़ा सवाल स्वास्थ्य विभाग पर है। जिले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (सीएमएचओ) और ब्लाक मेडिकल आफिसर (बीएमओ) की जिम्मेदारी है कि वे समय-समय पर ऐसे फर्जी क्लीनिकों पर छापा मारें, लेकिन मालखरौदा में पिछले दो साल में एक भी छापेमारी की कार्रवाई नहीं हुई है।