नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: पोड़ी उपरोड़ा स्थित कस्तूरबा गांधी बालिका छात्रावास की छात्राओं का गुरुवार को आक्रोश फूट पड़ा। छात्रावास की अधीक्षिका के खिलाफ गंभीर आरोप लगाते हुए छात्राओं ने कटघोरा-अंबिकापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर चक्काजाम कर दिया। करीब आधे घंटे तक चले प्रदर्शन से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। सूचना मिलते ही पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंचे।
अधिकारियों ने छात्राओं से चर्चा कर मामले की जांच कराने और नियमानुसार कार्रवाई का आश्वासन दिया, जिसके बाद जाम समाप्त हुआ और यातायात सामान्य हो सका। छात्राओं ने आरोप लगाया कि अधीक्षिका शारदा नेताम उनसे कपड़े धुलवाती हैं, हाथ-पैर की मालिश कराती हैं और देर रात तक पूजापाठ कराती हैं। उनका कहना है कि छात्रावास में मिलने वाला भोजन गुणवत्ताहीन है।
विरोध करने पर डांट-फटकार, मारपीट और कार्रवाई की धमकी दी जाती है। छात्राओं का यह भी आरोप है कि उन्हें अभिभावकों से मिलने नहीं दिया जाता और शिकायत करने पर जेल भिजवाने की धमकी दी जाती है। इससे छात्राएं लंबे समय से मानसिक दबाव में रह रही हैं। छात्राओं ने बताया कि उन्होंने पहले भी विकासखंड शिक्षा अधिकारी से शिकायत की थी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ।
इसी कारण उन्हें सड़क पर उतरकर विरोध प्रदर्शन करना पड़ा। उनका कहना था कि छात्रावास की व्यवस्था में सुधार और अधीक्षिका के खिलाफ कार्रवाई होने तक वे शांत नहीं बैठेंगी। चक्काजाम की सूचना पर तहसीलदार विनय देवांगन, नायब तहसीलदार समुन मानिकपुरी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी के.आर. दयाल और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने छात्राओं से अलग-अलग चर्चा कर उनकी शिकायतें सुनीं।
इसके बाद प्रशासन ने पूरे मामले की जांच कराने का निर्णय लिया। विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने बताया कि जांच पूरी होने तक अधीक्षिका का प्रभार बदल दिया गया है। जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। छात्राओं ने स्पष्ट किया कि यदि शिकायतों पर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो वे फिर आंदोलन करेंगी। उनका कहना है कि छात्रावास में पढ़ने वाली सभी छात्राओं को सुरक्षित माहौल और बेहतर सुविधाएं मिलनी चाहिए।
आश्रम-छात्रावासों में अधीक्षकों के 46 पद रिक्त
जिले में संचालित 120 आश्रम और छात्रावासों में अधीक्षकों के 46 पद खाली हैं। कई स्थानों पर शिक्षकों को अतिरिक्त प्रभार देकर छात्रावासों का संचालन कराया जा रहा है। इससे विद्यालयों में शिक्षकों की कमी भी बनी हुई है। नियमित भर्ती नहीं होने के कारण एकल शिक्षकीय विद्यालयों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
पखवाड़े पहले एकलव्य विद्यालय में भी हुआ था प्रदर्शन
कुछ दिन पहले एकलव्य आवासीय विद्यालय के विद्यार्थियों ने भी प्राचार्य पर मानसिक प्रताड़ना और गुणवत्ताहीन भोजन का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया था। उस मामले में भी प्रशासन ने जांच का भरोसा दिया था। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं से आश्रम और छात्रावासों की व्यवस्थाओं पर सवाल उठ रहे हैं।
बच्चों को सड़क पर उतरना पड़े तो व्यवस्था पर उठते हैं सवाल
आवासीय विद्यालय और छात्रावासों में पढ़ने वाले बच्चे अपनी समस्याओं के समाधान के लिए सबसे पहले संस्थान, फिर शिक्षा विभाग और प्रशासन की ओर उम्मीद से देखते हैं। यदि उन्हें अपनी बात सुनाने के लिए सड़क पर उतरकर चक्काजाम जैसा कदम उठाना पड़े, तो यह केवल एक संस्थान की समस्या नहीं, बल्कि निगरानी और शिकायत निवारण व्यवस्था पर भी सवाल खड़े करता है।
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नियमित निरीक्षण, गोपनीय संवाद और शिकायतों पर समय
बद्ध कार्रवाई की व्यवस्था प्रभावी होती तो हालात यहां तक नहीं पहुंचते। बच्चों का विरोध किसी भी व्यवस्था के लिए अंतिम स्थिति माना जाता है। ऐसे मामलों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के साथ यह भी सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में विद्यार्थियों को अपनी आवाज उठाने के लिए सड़क का सहारा न लेना पड़े।
छात्राओं की शिकायतों की जांच कराई जाएगी। आरोप सही पाए जाने पर संबंधित अधीक्षिका के विरुद्ध नियमानुसार अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। — मनोज बंजारे, एसडीएम, पोड़ी उपरोड़ा