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60 टन का डंपर भी नहीं झेल पाया कुसमुंडा खदान की लापरवाही का बोझ! 170 फीट नीचे गिरा ऑपरेटर की मौत

कोरबा की एसईसीएल कुसमुंडा खदान में शनिवार रात एक बड़ा हादसा हो गया, जहां खोडरी फेस में डंपिंग के दौरान 60 टन का डंपर 170 फीट गहरी खाई में गिर गया। हाद...और पढ़ें

By Devendra GuptaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Sun, 21 Jun 2026 01:00:04 PM (IST)Updated Date: Sun, 21 Jun 2026 01:00:04 PM (IST)
60 टन का डंपर भी नहीं झेल पाया कुसमुंडा खदान की लापरवाही का बोझ! 170 फीट नीचे गिरा ऑपरेटर की मौत
हादसे में डंपर ऑपरेटर सत्यनारायण की मौत ।

HighLights

  1. उत्पादन के दबाव में सुरक्षा से समझौते का आरोप
  2. 150 से अधिक एसईसीएल कर्मी हड़ताल पर
  3. कुसमुंडा 170 फीट गहरी खाई में गिरा डंपर, आपरेटर की मौत

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) की कुसमुंडा खदान में शनिवार देर रात हुए हादसे में विभागीय डंपर आपरेटर सत्य नारायण की मौत हो गई। खोडरी फेस में डंपिंग कार्य के दौरान 60 टन क्षमता का डंपर अनियंत्रित होकर करीब 170 फीट गहरी खाई में जा गिरा। हादसे के बाद खदान क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। राहत दल और एंबुलेंस मौके पर पहुंची, लेकिन तब तक आपरेटर की मौत हो चुकी थी।

रात करीब एक बजे सत्य नारायण डंपर से ओवर बर्डन मिट्टी की डंपिंग कर रहे थे। इसी दौरान वाहन पीछे की ओर फिसल गया और डंपिंग यार्ड से नीचे खाई में जा गिरा। घटना के बाद खदान में काम कर रहे कर्मचारियों में भारी नाराजगी है। कर्मचारियों का आरोप है कि सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण यह हादसा हुआ है।हादसे के विरोध में एसईसीएल के नियमित कर्मचारी काम बंद कर हड़ताल पर चले गए हैं।


बताया जा रहा है कि करीब 150 विभागीय कर्मचारी कार्य से अलग हो गए हैं। इसके चलते खदान में ओवर बर्डन मिट्टी निकासी का काम प्रभावित हो गया है। हालांकि विभिन्न ठेका कंपनियों के कर्मचारियों से कुछ कार्य जारी रखा गया है।कर्मचारियों का आरोप है कि कुसमुंडा क्षेत्र के प्रबंधन स्तर पर सुरक्षा संबंधी गंभीर कमियों को लगातार नजरअंदाज किया जा रहा है। उनका कहना है कि कालरी प्रबंधक कैलाश चंद्र बल सुरक्षा व्यवस्था की अनदेखी करते हुए कर्मचारियों से काम करा रहे हैं।

कर्मचारियों ने यह भी आरोप लगाया कि डंपिंग यार्ड में रैंप का निर्माण निर्धारित मानकों के अनुरूप नहीं किया गया है, जिससे भारी वाहनों के संचालन के दौरान दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। श्रमिकों का कहना है कि देश में अधिक कोयला उत्पादन के लक्ष्य और दबाव के कारण अधिकारियों की ओर से कर्मचारियों से असुरक्षित परिस्थितियों में काम लिया जा रहा है। लगातार सामने आ रही दुर्घटनाओं ने कर्मचारियों के बीच भय और असंतोष का माहौल पैदा कर दिया है।

घटना की तकनीकी व विभागीय जांच शुरू

घटना के बाद तकनीकी जांच शुरू कर दी गई है। जांच दल यह पता लगाने में जुटा है कि डंपर के पीछे फिसलने की वास्तविक वजह क्या थी और दुर्घटना में सुरक्षा संबंधी कौन-कौन सी चूक हुई। प्रबंधन की ओर से भी मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की बात कही गई है।

सुरक्षा मानकों की समीक्षा की मांग

हादसे के बाद कर्मचारियों और श्रमिक संगठनों ने खदान की सुरक्षा व्यवस्था की व्यापक समीक्षा की मांग उठाई है। उनका कहना है कि डंपिंग यार्ड, रैंप, ढलान वाले क्षेत्रों और भारी मशीनों के संचालन स्थलों पर अतिरिक्त निगरानी और तकनीकी सुरक्षा उपाय तत्काल लागू किए जाएं। कर्मचारियों ने चेतावनी दी है कि सुरक्षा संबंधी कमियों को दूर नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।