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मानसून के इंतजार में कोरबा: लक्ष्य के मुकाबले रोपाई की धीमी प्रगति, कृषि विभाग की फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह

कोरबा में बीते वर्ष की तुलना में 96 मिमी कम बारिश होने से कृषि कार्य प्रभावित हुए हैं। धान की रोपाई और बोआई पर संकट है। सिचाई सुविधाओं के अभाव में किस...और पढ़ें

By Suresh kumar DewanganEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 14 Jul 2026 08:49:42 AM (IST)Updated Date: Tue, 14 Jul 2026 08:49:42 AM (IST)
मानसून के इंतजार में कोरबा: लक्ष्य के मुकाबले रोपाई की धीमी प्रगति, कृषि विभाग की फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह
खेतों मे पानी कम हाेने से रोपाई और बोआई बाधित, नईदुनिया

HighLights

  1. पिछले वर्ष की तुलना में 96 मिमी कम बारिश से खेती की गति धीमी हुई।
  2. 13 करोड़ के बजट के बावजूद जल संसाधन विभाग को राशि नहीं मिलने से योजना अटकी।
  3. धान के स्थान पर कम पानी वाली फसलें अपनाने पर 15 हजार रुपये अनुदान देने की घोषणा।

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा: जिले में पिछले चार दिनों से मानसून की गतिविधियां लगभग थम गई हैं। लगातार तेज धूप और वर्षा नहीं होने से खेती-किसानी का काम प्रभावित होने लगा है। खेतों में नमी तेजी से कम हो रही है, जिससे धान की बोआई और रोपाई की रफ्तार धीमी पड़ गई है। किसान अब एक बार फिर मानसून के सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं। आने वाले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा नहीं हुई तो बोए गए धान के अंकुर प्रभावित हो सकते हैं और कई किसानों को दोबारा बोआई करनी पड़ सकती है।

जिले में एक जून से अब तक औसतन 277.5 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। पिछले वर्ष इसी अवधि तक 323.5 मिमी वर्षा हुई थी। इस प्रकार इस वर्ष अब तक लगभग 96 मिमी कम वर्षा होने से कृषि कार्य अपेक्षित गति नहीं पकड़ पाया है। शुरुआती बारिश के बाद किसानों ने खेतों की जुताई कर सूखा बोआई शुरू कर दी थी, लेकिन लगातार बारिश नहीं होने के कारण अब खेतों में पर्याप्त नमी नहीं बची है। इसका सबसे अधिक असर धान की खेती पर दिखाई दे रहा है।


कोरबा जिले की अधिकांश खेती आज भी मानसून पर निर्भर है। सिंचाई सुविधाओं के सीमित होने के कारण किसान वर्षा के भरोसे ही खेती करते हैं। यही वजह है कि बारिश में थोड़ी भी कमी का सीधा असर कृषि कार्यों पर पड़ता है। धान के अंकुरण के लिए लगातार नमी जरूरी होती है, लेकिन तेज धूप और बारिश नहीं होने से खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। इससे किसानों की चिंता बढ़ गई है।

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कृषि की दृष्टि से करतला और पाली विकासखंड जिले के सबसे बड़े कृषि क्षेत्र माने जाते हैं। इन क्षेत्रों में धान की खेती बड़े पैमाने पर होती है। वहीं वर्षा के आंकड़ों पर नजर डालें तो अब तक दर्री तहसील में सर्वाधिक 341.7 मिमी वर्षा दर्ज की गई है, जबकि पसान तहसील में सबसे कम 194.4 मिमी वर्षा हुई है।

वर्षा के इस असमान वितरण का असर भी खेती पर स्पष्ट दिखाई दे रहा है। कई किसान रोपा पद्धति से धान की खेती करते हैं। इसके लिए खेतों में पर्याप्त पानी भरना आवश्यक होता है। वर्तमान स्थिति में खेतों में पानी की कमी के कारण रोपाई का कार्य लगभग ठप पड़ा है।

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार बुधवार तक मानसून के फिर सक्रिय होने की संभावना जताई जा रही है। किसानों की उम्मीदें अब इसी पर टिकी हैं। यदि सप्ताहभर तक पर्याप्त वर्षा नहीं हुई तो पहले से बोए गए बीजों का अंकुरण प्रभावित होगा और किसानों को दोबारा बोआई करनी पड़ सकती है, जिससे उनकी लागत भी बढ़ेगी।

लिफ्ट इरिगेशन योजना को नहीं मिली गति

सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए किसानों को लिफ्ट इरिगेशन योजना से जोड़ने की तैयारी की गई थी। इसके लिए शासन स्तर से लगभग 13 करोड़ रुपये के बजट को स्वीकृति भी मिल चुकी है, लेकिन जल संसाधन विभाग को राशि आवंटित नहीं होने के कारण योजना धरातल पर नहीं उतर सकी है। इसका परिणाम यह है कि दर्री बैराज की नहरों से किसानों को इस वर्ष भी सिंचाई सुविधा मिलने की संभावना नहीं है।

दूसरी ओर अधिकांश मायनर और छोटे जलाशय भी सूख चुके हैं, जिससे सिंचित क्षेत्र के किसानों को भी पर्याप्त पानी उपलब्ध नहीं हो पा रहा है। जिले में वर्षा जल संरक्षण की पर्याप्त व्यवस्था नहीं होने के कारण हर वर्ष किसानों को ऐसी स्थिति का सामना करना पड़ता है। यदि जल संरक्षण और सिंचाई संसाधनों का विस्तार किया जाए तो मानसून की अनिश्चितता का असर काफी हद तक कम किया जा सकता है।

90 हजार हेक्टेयर में धान का लक्ष्य, प्रगति धीमी

जिला कृषि विभाग ने इस खरीफ सीजन में 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में धान की रोपाई और बोआई का लक्ष्य निर्धारित किया है। अब तक लगभग 87.2 प्रतिशत क्षेत्र में बोआई का कार्य पूरा हुआ है, जबकि रोपाई केवल एक प्रतिशत ही हो सकी है। अधिकांश किसान अभी भी नर्सरी (थरहा) तैयार होने और खेतों में पर्याप्त पानी भरने का इंतजार कर रहे हैं। अधिकांश किसान वर्षा आश्रित खेती करते हैं। अभी हुई वर्षा जल संसाधन के जलाशयों में पूर्ण भराव नहीं हुआ है, लिहाजा सिचाई के लिए पानी मिलने की संभावना कम है।

फसल विविधीकरण अपनाने की सलाह

मानसून की अनिश्चितता को देखते हुए कृषि विभाग किसानों को कम पानी में तैयार होने वाली फसलों की खेती अपनाने की सलाह दे रहा है। विभाग का कहना है कि धान के साथ-साथ कोदो, रागी, मक्का जैसी फसलें कम पानी में बेहतर उत्पादन दे सकती हैं। फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने के लिए शासन ने धान के स्थान पर अन्य फसलें लगाने वाले किसानों को 15 हजार रुपये तक की अनुदान राशि देने की घोषणा की है। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इससे किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ पानी की बचत भी होगी और मानसून पर निर्भरता कम करने में मदद मिलेगी।

वर्षा एक जून से अब तक (मिलीमीटर में)

तहसील वर्षा

कोरबा 321.2

भैसमा 268.4

करतला 210.3

कटघोरा 322.7

दर्री 341.7

पाली 317.2

हरदीबाजार 238.8

पोड़ी उपरोड़ा 309.2

पसान 194.4

अजगरबहार 234.8