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कोरबा: राखड़ डैम फूटने प्रदूषित हुआ हसदेव बैराज का पानी, सीएसपीजीसीएल पर लगा 27.60 लाख का जुर्माना

कोरबा में हसदेव ताप विद्युत गृह के राखड़ बांध (लैगून-बी) के फूटने से हुए भारी जल प्रदूषण के कारण छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने सीएसपीजीसीएल पर 27...और पढ़ें

By Devendra GuptaEdited By: Manoj Kumar Tiwari
Publish Date: Tue, 23 Jun 2026 08:51:18 AM (IST)Updated Date: Tue, 23 Jun 2026 08:51:18 AM (IST)
कोरबा: राखड़ डैम फूटने प्रदूषित हुआ हसदेव बैराज का पानी, सीएसपीजीसीएल पर लगा 27.60 लाख का जुर्माना

HighLights

  1. राखड़ डैम फूटने से 39 दिन तक लगातार होता रहा जल प्रदूषण।
  2. राखड़ डैम फूटने से हसदेव बैराज तक पहुंचा राख मिश्रित पानी।
  3. पर्यावरण विभाग ने सीएसपीजीसीएल पर लगाया 27.60 लाख का जुर्माना।

नईदुनिया प्रतिनिधि, कोरबा : हसदेव ताप विद्युत गृह (पूर्व) के राखड़ बांध फूटने से हुए जल प्रदूषण के मामले में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल ने छत्तीसगढ़ स्टेट पावर जनरेशन कंपनी लिमिटेड (सीएसपीजीसीएल) पर 27 लाख 60 हजार रुपये की पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की है। मंडल ने जांच में पर्यावरणीय नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होने के बाद यह कार्रवाई की है।

पर्यावरण संरक्षण मंडल के अनुसार राखड़ बांध में आई दरार के कारण बड़ी मात्रा में राख मिश्रित पानी बाहर निकलकर आसपास के क्षेत्रों और प्राकृतिक जल स्रोतों में फैल गया था। इससे जल स्रोत प्रभावित हुए और पर्यावरण को नुकसान पहुंचा। मामले की गंभीरता को देखते हुए मंडल की टीम ने 18 मार्च 2026 को बांध का निरीक्षण किया था। जांच में राखड़ बांध से लगातार राखयुक्त पानी का रिसाव पाया गया।


इसके बाद प्रबंधन को जल तथा वायु प्रदूषण नियंत्रण संबंधी प्रावधानों के तहत नोटिस जारी कर तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने को कहा गया था। निर्देशों के बावजूद स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं होने पर 19 अप्रैल 2026 को दोबारा निरीक्षण किया गया। इस दौरान पाया गया कि राख का रिसाव जारी है और राख मिश्रित पानी बहते हुए हसदेव बैराज क्षेत्र तक पहुंच चुका है। इसके बाद 22 अप्रैल को दूसरा नोटिस जारी कर प्रभावी नियंत्रण उपाय करने के लिए कहा गया। जांच में यह तथ्य सामने आया कि 18 मार्च से 25 अप्रैल 2026 तक कुल 39 दिनों तक प्रदूषण जारी रहा। इसी अवधि को आधार बनाकर पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति की गणना की गई और सीएसपीजीसीएल पर 27.60 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। प्रबंधन ने अपने जवाब में बताया कि लैगून-बी के क्षतिग्रस्त होने से यह स्थिति निर्मित हुई थी।

कंपनी का कहना था कि घटना की जानकारी मिलते ही राखड़युक्त पानी का डिस्चार्ज बंद कर मरम्मत कार्य शुरू कर दिया गया था। साथ ही 25 अप्रैल से हसदेव बैराज क्षेत्र की ओर राखयुक्त पानी का प्रवाह रोक दिए जाने का दावा भी किया गया। हालांकि पर्यावरण संरक्षण मंडल ने इस स्पष्टीकरण को राहत का आधार नहीं माना। मंडल ने कहा कि निर्धारित अवधि तक प्रदूषण जारी रहने से पर्यावरणीय क्षति हुई है, जिसके लिए कंपनी जिम्मेदार है। क्षेत्रीय अधिकारी प्रसन्ना सोनकर ने बताया कि निरीक्षण के दौरान राखयुक्त पानी के प्राकृतिक जल स्रोतों तक पहुंचने की पुष्टि हुई थी। प्रबंधन को समय-समय पर नोटिस जारी किए गए, लेकिन प्रदूषण जारी रहने के कारण पर्यावरणीय क्षतिपूर्ति अधिरोपित की गई।

39 दिन तक जारी रहा प्रदूषण

पर्यावरण संरक्षण मंडल के अनुसार 18 मार्च से 25 अप्रैल 2026 तक लगातार 39 दिनों तक राख मिश्रित पानी का बहाव जारी रहा। इस दौरान जल स्रोत प्रभावित हुए और हसदेव बैराज क्षेत्र तक प्रदूषण पहुंच गया। इसी अवधि को आधार बनाकर जुर्माने की राशि तय की गई। मामले के बाद राखड़ बांध की निगरानी और रखरखाव व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हुए हैं। पर्यावरण संरक्षण मंडल ने संयंत्र प्रबंधन को भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने के निर्देश दिए हैं।