नईदुनिया न्यूज, कोरबा : विभाजन की त्रासदी से युवाओं को सीख लेने की जरूरत है। सामाजिक सौहार्द, आपसी भाईचारे और राष्ट्र की अखंडता को बनाए रखना सभी की जिम्मेदारी है। इतिहास के दर्दनाक अध्याय को याद करने का उद्देश्य यही है कि भविष्य में ऐसी त्रासदी दोबारा न हो। यह बात कमला नेहरू महाविद्यालय के प्राचार्य डा प्रशांत बोपापुरकर ने शुक्रवार को विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कही।
महाविद्यालय के शिक्षा संकाय सभागार में आयोजित विशेष व्याख्यान में वर्ष 1947 में हुए भारत विभाजन की त्रासदी, विस्थापन और उस दौरान लोगों के संघर्ष पर चर्चा की गई। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता भूगोल विभागाध्यक्ष अजय कुमार मिश्रा ने कहा कि भारत और पाकिस्तान का बंटवारा इतिहास का ऐसा गहरा जख्म है, जिसके दर्द को भुलाया नहीं जा सकता।
विभाजन ने न केवल मानवता को झकझोरा, बल्कि आपसी भाईचारे को भी हिंसा और त्रासदी में बदल दिया। उन्होंने कहा कि वर्ष 1947 का विभाजन मानव इतिहास की बड़ी त्रासदियों में से एक था। इसके कारण करीब दो करोड़ लोग विस्थापित हुए और बड़ी संख्या में लोगों को अपनी जान गंवानी पड़ी।
लाखों लोगों को अपना घर-बार छोड़कर अनजान जगहों की ओर पलायन करना पड़ा। भूख, गर्मी, बाढ़ और दंगों के बीच लोगों ने मीलों पैदल सफर किया। लूटपाट और आगजनी की घटनाओं ने इस त्रासदी को और भयावह बना दिया। प्राचार्य ने कहा कि विभाजन के दौरान लाखों नागरिकों ने अपनी जड़ों और घरों को खोने के बावजूद नए सिरे से जीवन शुरू किया। उनके साहस और संघर्ष को याद करना जरूरी है।
युवाओं को इतिहास के इन अनुभवों से सीख लेकर देश में भाईचारा और सामाजिक समरसता मजबूत करने की दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि तत्कालीन परिस्थितियों और अंग्रेजों की नीतियों को समझना भी जरूरी है, ताकि इतिहास की गलतियों से सबक लिया जा सके।
कार्यक्रम में वाणिज्य विभागाध्यक्ष बीके वर्मा, रासेयो जिला संगठक वायके तिवारी, शिक्षा संकाय प्रभारी डा. भारती कुलदीप, प्रीति द्विवेदी, एनसीसी प्रभारी अनिता यादव, डा अंजू खेस्स, नितेश यादव, शंकर यादव और राकेश गौतम समेत काफी संख्या में छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे।
रासेयो स्वयंसेवक सरिता चौहान, नियति गुप्ता, सोनालिया महंत और कंचन लहरे भी मौजूद रहीं। कार्यक्रम के अंत में विभाजन की त्रासदी में जान गंवाने वालों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखकर श्रद्धांजलि दी गई। कार्यक्रम का संचालन रासेयो जिला संगठक वाइके तिवारी ने किया।
इतिहास की पीड़ा को समझना जरूरी
प्राचार्य ने कहा कि विभाजन केवल भू-भाग का बंटवारा नहीं था, बल्कि लाखों परिवारों के विस्थापन और अपनों से बिछड़ने की पीड़ा भी थी। युवा पीढ़ी को इस इतिहास को केवल किताबों तक सीमित रखने के बजाय उसके मानवीय पक्ष को समझना चाहिए। इससे समाज में आपसी विश्वास, भाईचारे और राष्ट्रीय एकता की भावना को मजबूत करने की प्रेरणा मिलेगी।