

नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग के तत्कालीन मुख्य अभियंता भागीरथ वर्मा के खिलाफ अदालत में चालान पेश हो गया। आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (ईओडब्ल्यू) ने 1500 पन्नों का चालान तैयार किया था जिसे गुरूवार को अदालत में पेश किया गया। तत्कालीन मुख्य अभियंता पर एक करोड़ 76 लाख 29 हजार रुपए की हेराफेरी का आरोप है।
जांच में पाया गया था कि आरोपी द्वारा नगरीय निकायों में निविदा कार्य दिलाने और बिलों का भुगतान कराने के एवज में कथित तौर पर कमीशन के रूप में यह रकम प्राप्त की गई।
ईओडब्ल्यू के अनुसार, शिकायतकर्ता राघवेन्द्र तिवारी ने भागीरथ वर्मा के खिलाफ शिकायत की थी। आरोप था कि उन्होंने अपने पद का दुरुप्रयोग किया और निविदा कार्य आवंटित कराने के एवज में कमीशन मांगा गया है जिसके बाद ईओडब्ल्यू ने छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश के आठ अलग-अलग स्थानों पर छापेमारी की और इस दौरान संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज, रिकॉर्ड और डिजिटल साक्ष्य समेत अन्य महत्वूपूर्ण सामग्री जब्त की गई थी।
गौरतलब है कि, आरोपी साल 2019 से लेकर 2023 तक नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में मुख्य अभियंता के पद पर कार्यरत थे। शिकायत के बाद 15 जून 2026 को मामले में जांच शुरू हुई थी।
जांच में शिकायतकर्ता और आरोपी के बीच हुई वॉट्सऐप चैट से कई महत्वपूर्ण राज खुलने की संभावना है। इसके अलावा बैंक खातों का विश्लेषण, लेनदेन का विवरण और गवाहों के बयान महत्वपूर्ण साक्षी बने। जांच में आगे पाया गया कि आरोपी द्वारा कमीशन के रूप में नगदी और महंगे सामान लेने की बात सामने आई है।
अलग-अलग बैंक खातों में रकम ट्रांसफर कराने की जानकारी भी सामने आई। जांच के मुताबिक, सहयोग किराना स्टोर्स के खाते में 55 हजार, ओम किराना स्टोर्स में 75 हजार, महेन्द्र सागर भोई के खाते में 60 हजार और कम्प्यूटर ऑपरेटर चुम्मन साहू के खाते में 20 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए।
इस तरह कुल 2.10 लाख रुपए के बैंक एवं डिजिटल ट्रांसफर के संबंध में साक्ष्य जुटाए गए। अभिलेख में ओमप्रकाश पैकरा के खाते में 10 हजार रुपए ट्रांसफर किए जाने का भी अलग उल्लेख है।
विवेचना के अनुसार, साल 2019 में आरोपी को 32.65 लाख रुपए नकद और 40,250 रुपए की दो हीरे की अंगूठियां दिए जाने की बात सामने आई। साल 2019-20 में आरोपी के आवास के लिए 3,39,862 रुपए के टाइल्स और ग्रेनाइट उपलब्ध कराए गए। साल 2020 में अलग-अलग माध्यमों से कुल 42.65 लाख रुपए कमीशन के रूप में दिए जाने के साक्ष्य भी जांच में सामने आए हैं।
वहीं, साल 2021-22 में विभिन्न नगरीय निकायों में हाईमास्ट एलईडी लाइट लगाने के कार्यों के एवज में आरोपी द्वारा कथित तौर पर पांच एसी और दो स्मार्ट फैन की मांग किए जाने का आरोप है। जांच के मुताबिक, 1.72 लाख रुपए के पांच लॉयड एसी, 15,850 रुपए के दो स्मार्ट फोन और करीब 1.40 लाख रुपए की एलईडी लाइट आरोपी के आवास पर पहुंचाई गई।
जांच के दौरान आरोपी के अग्रोहा कॉलोनी स्थित आवास पर लॉयड कंपनी के एसी और टाइल्स लगे हुए पाए गए। इनके संबंध में खरीदी बिल, भुगतान रिकॉर्ड और गवाहों के बयान भी जांच का हिस्सा बनाए गए हैं।
जांच में जैजेपुर, पुसौर, भोपालपट्टनम, नरहरपुर और कोंटा नगरीय निकायों में हाईमास्ट एलईडी लाइट लगाने के लिए करीब 1.46 करोड़ रुपए की स्वीकृति का मामला भी सामने आया। शिकायतकर्ता की फर्म ने कोंटा, नरहरपुर और जैजेपुर में काम किया था। आरोप है कि इन कार्यों और पूर्व में किए गए एलईडी लाइट के कामों के एवज में आरोपी ने पांच एसी और दो स्मार्ट पंखों की मांग की थी।
इसके बाद करीब 1.72 लाख रुपए के पांच लॉयड एसी, 15,850 रुपए के दो स्मार्ट फोन और करीब 1.40 लाख रुपए की एलईडी लाइट आरोपी के आवास पर पहुंचाई गई। जांच के दौरान एसी और टाइल्स आरोपी के अग्रोहा कॉलोनी स्थित आवास पर लगे मिले।
जांच में वर्ष 2021-22 की अवधि में आरोपी को अलग-अलग तिथियों में कुल 93.22 लाख रुपए नकद देने और दीपावली के समय करीब 69,400 रुपए कीमत की दो सोने की अंगूठियां दिए जाने की बात भी सामने आईं। इन लेनदेन से जुड़े खरीदी बिल, भुगतान दस्तावेज और गवाहों के बयान ईओडब्ल्यू ने जुटाए हैं।
ईओडब्ल्यू ने भागीरथ वर्मा को 17 जून 2026 को गिरफ्तार किया था। वह वर्तमान में केंद्रीय जेल रायपुर में निरुद्ध है। जांच एजेंसी के अनुसार वर्ष 2019 से 2021-22 के बीच आरोपी को कुल 1,68,52,000 रुपए नकद और 7,77,582 रुपए की सामग्री के रूप में कुल 1,76,29,582 रुपए का कथित असम्यक लाभ प्राप्त करना पाया गया है।
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ईओडब्ल्यू ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर आरोपी के खिलाफ विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम), रायपुर में करीब 1500 पन्नों का अभियोग-पत्र पेश किया है।
हालांकि, जांच एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि कथित अवैध राशि आगे किन लोगों तक पहुंचाई गईं, शिकायतकर्ता की फर्म के कार्य किन अधिकारियों और व्यक्तियों के माध्यम से स्वीकृत कराए गए तथा प्रकरण से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच अभी जारी है। इस मामले में आगे भी नए तथ्य सामने आने की संभावना है।