
नईदुनिया प्रतिनिधि, रायपुर। रायपुर पुलिस ने अंतरराज्यीय नशा तस्करी नेटवर्क का राजफाश करते हुए किशोर साहू, अजय विश्वकर्मा, शुभम साहू उर्फ बऊ और प्रिंस प्रजापति को गिरफ्तार किया है। इस कार्रवाई की सबसे अहम कड़ी मुख्य आरोपित किशोर साहू है, जो पहले एनडीपीएस एक्ट के मामले में 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा पा चुका है। वह हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर आने के बाद फिर से नशे के कारोबार में सक्रिय हो गया था।
पुलिस ने चारों आरोपितों के कब्जे से तीन किलो गांजा, दो हजार नशीली टैबलेट, 30 कोडीन सिरप, 290 पेंटाजोसिन इंजेक्शन, 300 सिरिंज और नकद राशि जब्त की है। इस कार्रवाई के साथ पूरे मामले में अब तक पांच आरोपितों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 16.15 लाख रुपये से अधिक मूल्य का मादक पदार्थ एवं अन्य सामान बरामद किया जा चुका है।
रायपुर कमिश्नरेट पुलिस द्वारा नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस उपायुक्त (क्राइम एवं साइबर) स्मृतिक राजनाला तथा पुलिस उपायुक्त (मध्य) उमेश प्रसाद गुप्ता के निर्देशन में एंटी क्राइम एंड साइबर यूनिट, एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स और गंज थाना पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की। इस बार पुलिस ने केवल आरोपित पकड़ने तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि 'बैकवर्ड लिंक' पर काम करते हुए पूरे सप्लाई नेटवर्क तक पहुंचने की रणनीति अपनाई। इसी रणनीति से अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार 30 जून को गंज थाना क्षेत्र स्थित राजपूताना होटल के सामने कार्रवाई करते हुए मेरठ निवासी अभिषेक कुमार को 10.710 किलोग्राम गांजा के साथ गिरफ्तार किया गया था। पूछताछ में अभिषेक कुमार ने बताया कि वह ओडिशा से गांजा लेकर उत्तर प्रदेश के मेरठ जा रहा था। उसने उन लोगों के नाम और ठिकानों की जानकारी भी दी, जिनसे उसने मादक पदार्थ लिया था। यहीं से पुलिस ने मामले की बैकवर्ड लिंक पर जांच शुरू की।
तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से मिली जानकारी के आधार पर पुलिस को पता चला कि नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्य भी रायपुर आने वाले हैं। इसके बाद संयुक्त टीम ने योजनाबद्ध तरीके से घेराबंदी कर किशोर साहू, अजय विश्वकर्मा, शुभम साहू उर्फ बऊ और प्रिंस प्रजापति को गिरफ्तार कर लिया। तलाशी के दौरान आरोपितों के बैग से तीन किलो गांजा, 2,000 नाइट्रोटेन टैबलेट, 30 कोडीन सिरप, 290 इंजेक्शन, 300 सिरिंज और 3,100 रुपये नकद बरामद हुए। जब्त सामग्री की कुल कीमत लगभग 10.70 लाख रुपये आंकी गई है।
पुलिस जांच में सामने आया कि मुख्य आरोपित किशोर साहू का आपराधिक रिकार्ड लंबा है। उसके खिलाफ महासमुंद जिले के खल्लारी थाने में पहले से एनडीपीएस एक्ट का मामला दर्ज है। उस प्रकरण में महासमुंद की अदालत ने उसे 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई थी। वर्तमान में वह हाई कोर्ट से जमानत पर बाहर था। पुलिस का कहना है कि जेल से बाहर आते ही उसने फिर से नशे के कारोबार में सक्रिय भूमिका निभानी शुरू कर दी।
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प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि यह कोई स्थानीय गिरोह नहीं, बल्कि ओडिशा, छत्तीसगढ़ और उत्तर प्रदेश तक फैला अंतरराज्यीय नेटवर्क है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि गांजा और प्रतिबंधित दवाइयों की सप्लाई किन राज्यों से की जा रही थी, इनके खरीदार कौन थे और किन-किन शहरों में इनकी आपूर्ति की जाती थी। जांच एजेंसियां अब इस गिरोह के वित्तीय लेन-देन, सप्लाई चेन, ट्रांसपोर्ट नेटवर्क और अन्य सहयोगियों की भी जानकारी जुटा रही हैं।